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Palwal News: डेयरी स्थापित करने को स्वयं सहायता समूहों को मिलेगी 500 वर्ग गज भूमि
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ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए नई पहल
भूमि पांच वर्ष की लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। हरियाणा सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए नई पहल की है। अब हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) से पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों को ग्राम पंचायत की शामलात भूमि पर डेयरी स्थापित करने के लिए अधिकतम 500 वर्ग गज भूमि पांच वर्ष की लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी।
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि योजना के तहत जिला उपायुक्त भूमि आवंटन के लिए सक्षम प्राधिकारी होंगे। डेयरी का संचालन संतोषजनक पाए जाने और एचएसआरएलएम के प्रमाणन के बाद लीज अवधि तीन वर्ष तक बढ़ाई जा सकेगी। यदि एक ही भूमि के लिए एक से अधिक आवेदन आते हैं तो ग्राम स्तरीय समिति लॉटरी के माध्यम से चयन करेगी।
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ केवल एचएसआरएलएम से पंजीकृत, कम से कम एक वर्ष से सक्रिय स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा। समूह में न्यूनतम 10 सदस्य होना, नियमित बचत व आंतरिक ऋण गतिविधियां संचालित होना और बैठकों में 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। इच्छुक समूह ग्राम पंचायत, बीडीपीओ या जिला परिषद कार्यालय के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और गांवों में डेयरी आधारित आजीविका को बढ़ावा देने में अहम साबित होगी।
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भूमि पांच वर्ष की लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। हरियाणा सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए नई पहल की है। अब हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) से पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों को ग्राम पंचायत की शामलात भूमि पर डेयरी स्थापित करने के लिए अधिकतम 500 वर्ग गज भूमि पांच वर्ष की लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी।
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि योजना के तहत जिला उपायुक्त भूमि आवंटन के लिए सक्षम प्राधिकारी होंगे। डेयरी का संचालन संतोषजनक पाए जाने और एचएसआरएलएम के प्रमाणन के बाद लीज अवधि तीन वर्ष तक बढ़ाई जा सकेगी। यदि एक ही भूमि के लिए एक से अधिक आवेदन आते हैं तो ग्राम स्तरीय समिति लॉटरी के माध्यम से चयन करेगी।
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उन्होंने बताया कि योजना का लाभ केवल एचएसआरएलएम से पंजीकृत, कम से कम एक वर्ष से सक्रिय स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा। समूह में न्यूनतम 10 सदस्य होना, नियमित बचत व आंतरिक ऋण गतिविधियां संचालित होना और बैठकों में 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। इच्छुक समूह ग्राम पंचायत, बीडीपीओ या जिला परिषद कार्यालय के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और गांवों में डेयरी आधारित आजीविका को बढ़ावा देने में अहम साबित होगी।
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