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बेटी बचाने में पिछड़ रहा पलवल
ब्यूरो/अमर उजाला, पलवल
Updated Tue, 26 Apr 2016 04:42 PM IST
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बेटी बचाआे
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बेटी बचाने का अभियान पलवल जिले में पिछड़ने लगा है। ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि यह सच स्वास्थ्य विभाग के फरवरी माह के जारी आंकड़ों से सामने आया है। विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार फरवरी माह में जन्मी बेटियों का सैक्स रेशो घटकर 865 तक आ गया है। वहीं विभागीय अधिकारियों का दावा है कि मार्च माह के आंकड़े में सुधार आ गया है।
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पलवल जिला सैक्स रेशो में किसी समय अव्वल रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से इसमें उठापटक जारी है। यहां लिंग जांच के भी कई मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन पिछले दो माह से कोख के हत्यारों पर भी विभाग की सख्ती कम ही दिखाई दे रही है। स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि उन्हें समय पर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों का सहयोग नहीं मिल पाता है।
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जनवरी व फरवरी के पहले सप्ताह में स्वास्थ्य विभाग कोख के हत्यारों पर सख्ती बरतने में चर्चाओं में रहा। जिले में पीएनडीटी एक्ट के तहत तीन नर्सिंग होम संचालकों पर केस दर्ज हुए। एमटीपी (गर्भपात की दवा बेचना) के भी छह केस दर्ज हुए। इसमें निचले स्तर के कर्मचारियों पर तो शिकंजा कसा गया, लेकिन बड़े ओहदों पर बैठै लोगों पर कार्रवाई होती नहीं दिखी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की पकड़ ढीली पड़ती दिखाई दी।
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सूचना देने वाले को नहीं मिली इनाम की रकम :
कोख के हत्यारों पर अंकुश लगाने में स्वास्थ्य विभाग व प्रशासनिक उदासीनता का इसी बात से पता चलता है कि लिंग जांच की सूचना देने वाले एक युवक को तीन माह बाद तक भी इनाम की राशि नहीं मिली है। दरअसल सरकार की ओर से लिंग जांच केंद्र की सूचना देने वाले व इन्हें पकड़वाने वालों को एक लाख रुपये का इनाम दिया जाता है। इनाम की राशि सिविल सर्जन की अनुशंसा पर जिला प्रशासन की तरफ से दी जाती है, लेकिन यहां एक सूचनादाता की इनाम संबंधी फाइल करीब तीन माह से स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन के पास अटकी हुई है।
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फरवरी माह में सैक्स रेशो वाकई चिंताजनक था, लेकिन मार्च माह का सैक्स रेशो काफी अच्छा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों ने भी पलवल जिले को सराहा है। जहां तक पीएनडीटी एक्ट के तहत जांच व कार्रवाई की बात है, उसमें स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई ढील नहीं दी गई है। कई बार उतनी पुलिस व प्रशासनिक मदद नहीं मिल पाती है, जितनी की जरूरत होती है। इसके चलते कई बार छापेमारी में कमी दिखाई प्रतीत होती है।
-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन, पलवल।
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पड़ोसी प्रदेशों में धड़ल्ले से हो रहा लिंग परीक्षण
लिंग जांच का खेल पड़ोसी प्रदेशों के जिलों में धड़ल्ले से चल रहा है। समय-समय पर इसके सुबूत भी सामने आते रहे हैं। जनवरी माह में जिला स्वास्थ्य विभाग ने एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए यूपी के बुलंदशहर के सांई अल्ट्रासाउंड केंद्र पर शिकंजा कसा था, हालांकि उसके संचालक डॉ. मयंक अग्रवाल को गिरफ्तार नहीं किया जा सका था। जिला व सत्र न्यायालय से तो डॉ. मयंक को जमानत तक नहीं मिली थी, लेकिन गत सप्ताह हाईकोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। वहीं सीएम मनोहर लाल ने भी गत दिनों में जारी बयान में पड़ोसी प्रदेशों को इन पर अंकुश लगाने संबंधी बयान जारी किया था।