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बेसहारा पशु बन रहे हैं परेशानी का सबब

Mon, 18 Jul 2016 04:15 PM IST
palwal
palwal Updated Mon, 18 Jul 2016 04:15 PM IST
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non domestic animals are make cause trouble
- फोटो : amar ujala
 सड़कों पर घूमते बेसहारा पशु शहरवासियों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग हो या शहर की गलियां झुंडों में घूमते पशु राह चलते किसी की भी जान जोखिम में डाल देते हैं। पशुओं के  सड़क पर बैठने के कारण आए दिन जाम की स्थिति रहती है।
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शहर में घूमते आवारा पशु पिछले वर्षों में कई लोगों को गंभीर रूप से घायल कर चुके हैं, कुछ मामलों में तो घायलों की मौत भी हो चुकी है। कई वर्ष पूर्व बेसहारा पशुओं पर लगाम कसने के लिए मीनार गेट के समीप एक पशु फाटक हुआ करता था, जो कि अज्ञात कारणों के चलते बंद कर दिया गया। 
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सिरे नहीं चढ़ी योजना :  
कुछ दिनों पूर्व प्रशासन ने शहरवासियों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए एक योजना तैयार की थी। जिसके तहत बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए ठेका छोड़ने पर विचार हुआ था। तय किया गया था कि पशुओं को पकड़ कर गौशालाओं में भेजा जाएगा। लेकिन पांच-छह माह पूर्व अलावलपुर चौक पर बेसहारा पशुओं को पकड़ने गई नगर परिषद की टीम व ठेकेदारों के साथ विवाद हो गया, जिसके बाद अभियान बंद हो गया। 
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कई लोगों की जा चुकी है जान
बेसहारा पशुओं के कारण शहर में कई लोगों की जान भी जा चुकी है। कुछ वर्ष पूर्व केमिस्ट एसोसिएशन के महासचिव संजय अरोड़ा को पॉश एरिया न्यू कॉलोनी में  सांड़ों ने कुचल दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। सब्जी मंडी में भी एक व्यापारी को सांड़ ने पटक कर मौत के घाट उतार दिया था। एनएच-2 पर भी सांडों की लड़ाई में एक कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें बाद में दो लोगों की मौत हो गई थी। मीनार गेट चौक पर भी एक दुकानदार को सांड़ ने घायल कर दिया था, बाद में उनकी मौत हो गई। 
 
इन स्थानों पर रहता है पशुओं का कब्जा 
सब्जी मंडी, पुराना जीटी रोड, रेलवे रोड, मीनार गेट चौक, जवाहर नगर कैंप में देवीलाल पार्क के पास, न्यू कॉलोनी में पावर हाऊस के गेट के समीप व श्रद्धानंद पार्क के समीप अकसर सांडों का कब्जा रहता है। इसके अलावा वे झुंड बनाकर आसपास की गलियों और मोहल्लों में घूमते रहते हैं। 

बाजारों में घूमते पशु कब किसी पर हमला कर दें पता ही नहीं चलता। इसके अलावा कई बार वे खरीददारी करने के लिए आने वाले ग्राहकों के सामान को भी खराब कर देते हैं। प्रशासन को इन पर रोक लगानी चाहिए, तथा बेसहारा पशुओं को शहर से बाहर भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए। 

-प्रवीन गर्ग, जिला महासचिव, व्यापार मंड़ल।  

दोपहिया वाहन पर चलते समय पशुओं से खासकर खतरा रहता है। अचानक लड़ते हुए वे सड़क पर आ जाते हैं व वाहन चालकों को गिरा देते हैं। जिससे कई बार तो जान पर भी बन जाती है। 
दिनेश चौहान, एड़वोकेट।
पशुओं से निजात दिलाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। जिसके तहत ठेकेदार की नियुक्ति कर बेसहारा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में भिजवाया जाएगा
अशोक कुमार शर्मा, डीसी, पलवल 
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