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Palwal News: पानी में डूबी उम्मीदों को मिलेगी उड़ान, 22,000 एकड़ खेतों में लौटेगी जान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2026 11:14 PM IST
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Life will return to 22,000 acres of farmland
खेतों में भरा पानी
392 सोलर ट्यूबवेल से होगी जल निकासी
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53 करोड़ से 41 गावों में अप्रैल तक काम पूरा करने का रखा लक्ष्य

रिजवान खान
नूंह। जलभराव की समस्या झेल रहे हजारों एकड़ खेत के मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। इन खेतों पर कभी फसलें लहलहाती थीं, लेकिन पांच साल से जलभराव का शिकार होकर किसानों की बेबसी बयां कर रहे हैं। खेतों में पानी जमा होने के कारण यहां खेती करना मुश्किल हो गया है। इससे किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की भूमि संरक्षण शाखा ने जिले के चार खंडों के 41 गांवों की 22,132 एकड़ भूमि से सेम की समस्या दूर करने के लिए करीब 53 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। इसके तहत 392 सोलर ट्यूबवेल लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से खेतों से पानी निकालकर नजदीकी ड्रेन तक पहुंचाया जाएगा। विभाग ने अप्रैल तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
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नगीना के 16 गांवों पर खर्च होंगे 23 करोड़ रुपये
विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नगीना खंड के 16 गांवों की 7,635 एकड़ सेम प्रभावित भूमि की जल निकासी के स्थायी समाधान के लिए करीब 23 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं। इनमें बलई, बनारसी, खुशपुरी, नांगल शाहपुर, सुल्तानपुर नूंह, गंडूरी और हसनपुर नूंह सहित अन्य गांव शामिल हैं। इन गांवों में जल निकासी की व्यवस्था होने से लंबे समय से प्रभावित किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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नूंह खंड में 7,650 एकड़ भूमि होगी सेम मुक्त
नूंह खंड के घासेड़ा, सुगरपुर, बड़वा, मालब, रानीका, अलावलपुर, टांई और टेरकपुर सहित 11 गांवों की 7,650 एकड़ भूमि से जलभराव दूर करने के लिए करीब 19.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह जिले की प्रमुख सेम प्रभावित कृषि भूमि में शामिल हैं। योजना के तहत सोलर ट्यूबवेल के माध्यम से पानी निकालने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि खेतों को दोबारा खेती योग्य बनाया जा सके।

इंडरी के 12 गांवों के लिए 5.36 करोड़
इंडरी खंड के छछेड़ा, गजरपुर, शाहपुरा, रिठौड़ा, खेड़ली दौसा, कुतुबगढ़ और मेलाबास सहित 12 गांवों की 5,637 एकड़ भूमि से सेम की समस्या दूर करने के लिए पांच करोड़ 36 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया है। इन गांवों में जलभराव के स्थायी समाधान के लिए सोलर ट्यूबवेल लगाए जाएंगे।

पुन्हाना और पिनगवां में भी होगी जल निकासी
पुन्हाना खंड के रहरेड़ा, नाहरपुर और हतनगांव सहित तीन गांवों की सेम प्रभावित भूमि के लिए तीन करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। वहीं, पिनगवां खंड के मामलिका और गंगवानी गांवों की भूमि को सेम मुक्त बनाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर जारी किए गए हैं। इन कार्यों से दोनों क्षेत्रों के किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

विधायक आफताब अहमद ने उठाया था मुद्दा
सेम की समस्या से परेशान किसानों की आवाज नूंह के कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने विधानसभा में उठाई थी। उन्होंने लंबे समय से जलभराव झेल रहे किसानों की परेशानी को सरकार के सामने रखा था। अब विभाग की ओर से योजना पर काम शुरू होने से प्रभावित किसानों को राहत की उम्मीद बंधी है।

किसानों को खेती का इंतजार
पिछले पांच साल से जलभराव की समस्या झेल रहे किसानों के लिए यह योजना केवल पानी निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी खेती और आजीविका को दोबारा पटरी पर लाने की उम्मीद भी है। हालांकि, योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी गांवों में निर्धारित समय तक गुणवत्तापूर्ण काम पूरा हो और खेतों से पानी की निकासी प्रभावी बनी रहे। किसानों को अब इंतजार है कि उनकी जलभराव से प्रभावित जमीन दोबारा फसल उगाने के योग्य बन सके।


कोट
विभाग योजना को निर्धारित समय में पूरा कराने के लिए प्रयासरत है। अप्रैल तक जल निकासी का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। टेंडर प्राप्त करने वाली कंपनियां तीन साल तक सोलर ट्यूबवेल में आने वाली खामियों को ठीक करने के लिए जिम्मेदार रहेंगी। इससे उपकरणों के रखरखाव में भी मदद मिलेगी। - कुलदीप सिंह, सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी
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