{"_id":"613653bc8ebc3e01e5442b7b","slug":"kisaan-anadolan-palwal-news-noi6031105190","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों के धरने पर पहुंचे डागर व रावत पाल के किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों के धरने पर पहुंचे डागर व रावत पाल के किसान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पलवल। कृषि कानूनों के विरोध में अटोहां मोड़ पर चल रहा धरना सोमवार को भी जारी रहा। मुजफ्फरनगर महापंचायत से लौटे किसानों ने धरना स्थल पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने की अध्यक्षता इंद्रजीत रावत अंधोप ने की। संचालन उदय सिंह सरपंच ने किया। धरने में रावत व डागर पाल के किसानों ने भाग लिया। किसान ट्रैक्टरों में सवार होकर धरना स्थल पर पहुंचे।
धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता राष्ट्रीय एकता विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती व बीधू सिंह ने बताया कि कृषि कानूनों को किसानों के हित में बताने वाली सरकार बिहार में किसानों की स्थिति की जानकारी क्यों नहीं देना चाहती। जहां 2006 से ये नए कानून लागू हैं। इन कानूनों के लागू होने के बाद बिहार के किसानों स्थिति सुधरी है या बिगड़ी है। सरकार हरियाणा व पंजाब के किसानों की स्थिति को भी बिहार के किसानों की तरह बर्बाद करना चाहती है। कृषि क्षेत्र में सुधार के नाम पर भारत सरकार कृषि अर्थव्यवस्था को पूंजीपतियों के हवाले करना चाहती है। उन्होंने बताया कि नए कृषि कानूनों का असर केवल किसानों पर ही नहीं पड़ेगा बल्कि देश के तमाम मेहनतकश वर्ग को भी इनके दुष्प्रभाव झेलने पड़ेंगे। गरीब जनता को भोजन भी उपलब्ध नहीं होगा तथा उन्हें अपने भोजन में कटौती करनी पड़ेगी।
धरने में शामिल किसानों को सोहनपाल चौहान, राजेन्द्र सिंह बैंसला, नरेन्द्र सिंह सहरावत, रमेश चंद सौरौत, अच्छेलाल, रोशनलाल, पोहप सिंह, समयराम ककराली, समंदर सिंह चौहान व हरि नंबरदार ने भी संबोधित किया।
विज्ञापन
फोटो 04पीएएलपी-1 में है।
कैप्शन: पलवल अटोहां मोड़ पर धरना दे रहे किसान
विज्ञापन
धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता राष्ट्रीय एकता विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती व बीधू सिंह ने बताया कि कृषि कानूनों को किसानों के हित में बताने वाली सरकार बिहार में किसानों की स्थिति की जानकारी क्यों नहीं देना चाहती। जहां 2006 से ये नए कानून लागू हैं। इन कानूनों के लागू होने के बाद बिहार के किसानों स्थिति सुधरी है या बिगड़ी है। सरकार हरियाणा व पंजाब के किसानों की स्थिति को भी बिहार के किसानों की तरह बर्बाद करना चाहती है। कृषि क्षेत्र में सुधार के नाम पर भारत सरकार कृषि अर्थव्यवस्था को पूंजीपतियों के हवाले करना चाहती है। उन्होंने बताया कि नए कृषि कानूनों का असर केवल किसानों पर ही नहीं पड़ेगा बल्कि देश के तमाम मेहनतकश वर्ग को भी इनके दुष्प्रभाव झेलने पड़ेंगे। गरीब जनता को भोजन भी उपलब्ध नहीं होगा तथा उन्हें अपने भोजन में कटौती करनी पड़ेगी।
विज्ञापन
धरने में शामिल किसानों को सोहनपाल चौहान, राजेन्द्र सिंह बैंसला, नरेन्द्र सिंह सहरावत, रमेश चंद सौरौत, अच्छेलाल, रोशनलाल, पोहप सिंह, समयराम ककराली, समंदर सिंह चौहान व हरि नंबरदार ने भी संबोधित किया।
विज्ञापन
फोटो 04पीएएलपी-1 में है।
कैप्शन: पलवल अटोहां मोड़ पर धरना दे रहे किसान