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12 साल में केएमपी का मात्र 40 फीसदी कार्य पूरा
ब्यूरो/अमर उजाला, पलवल
Updated Wed, 06 Apr 2016 05:03 PM IST
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केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने केएमपी एक्सप्रेस-वे (ईस्टर्न पेरीफेरल वे) के पहले चरण का उद्घाटन कर दिया। केंद्र व प्रदेश सरकार की बहुआयामी योजना के 12 साल बाद कहीं जाकर अच्छे दिन आए, वह भी आधे अधूरे। पहले चरण में 40 फीसदी हिस्से को जनता को समर्पित किया गया है। सरकार की मानें तो सुहाने सफर का पूरा आनंद लेने के लिए लोगों को अभी दो वर्ष का और इंतजार करना पडे़गा।
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वर्ष 2004 में ओमप्रकाश चौटाला की अगुवाई वाली इनेलो सरकार ने केएमपी-एक्सप्रेस वे का निर्माण कराने की घोषणा की थी। उनकी सरकार चली गई, उसके बाद यह योजना भी खटाई में जाती दिखी। वर्ष 2007 में कांग्रेस सरकार के तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसकी शुरूआत करते हुए तीन वर्ष में इसके निर्माण की घोषणा की।
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समय बीतता गया और कार्य लटकता गया। बीच-बीच में इसकी समय सीमा बढ़ाई गई, लेकिन सड़क निर्माण पूरा होना तो दूर ठेकेदार भी काम छोड़कर चले गए और कांग्रेस की सरकार भी चली गई। अक्तूबर 2014 में प्रदेश में मनोहर लाल ने भाजपा के सीएम के रूप में प्रदेश की कमान संभाली। शुरू में तो सरकार का इस तरफ कोई ध्यान नहीं था और यह मामला भी सुप्रीम कोर्ट में जा चुका था। कोर्ट ने तल्खी जताते हुए इसका पहला चरण एक वर्ष में पूरा करने के आदेश दिए।
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तब जाकर कहीं एक्सप्रेस-वे के निर्माण को गति मिली व मंगलवार को पहले चरण का कार्य पूरा कर जनता को समर्पित कर दिया गया।
पहले चरण में 135.6 किलोमीटर में से 53 किलोमीटर का कार्य पूरा हुआ यानि 40 फीसदी से भी कम। लोगों को सुहाने सफर का पूरा आनंद लेने में अभी करीब दो वर्ष तक का और इंतजार करना पडे़गा।
ऐसा ही कुछ हाल केजीपी एक्सप्रेस-वे (वेस्टर्न पैरीफेरल वे) का है, जिसके निर्माण को भी गति नहीं मिल पा रही है। वेस्टर्न पैरीफेरल वे (केजीपी) के निर्माण के होने तक ईस्टर्न पैरीफेरल वे (केएमपी) का मकसद भी अधूरा ही रहेगा।
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अभी भी करीब 300 मीटर एरिया में कार्य अधूरा
स्टेट इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) के अधिकारियों का कहना है कि मानेसर तक केएमपी को शुरूआत में ट्रैफिक के लिए तीन लेन को खोला जाएगा। कुछ दिनों में अधूरे काम को पूरा कर तीन अन्य मार्ग की सेवा भी शुरू कर दी जाएगी। एचएसआईआईडीसी के सीनियर मैनेजर डीएस ढांडा का कहना है कि तावडू के पास धार्मिक स्थल और पहाड़ के कारण करीब 300 मीटर एरिया में काम अभी भी जारी है।