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चालक-परिचालकों को नहीं रखा नौकरी पर तो चलेगा भीख मांगों आंदोलन
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पलवल। वर्ष 2018 में 18 दिनों तक चली रोडवेज कर्मचारियों के हड़ताल के दौरान लगाए गए चालक व परिचालक लामबंद होने लगे हैं। बृहस्पतिवार को चालक व परिचालकों ने हरियाणा रोडवेज बेरोजगार संगठन के बैनर तले ताऊ देवीलाल टाउन पार्क पर प्रदर्शन कर नौकरी पर रखने की मांग की। प्रदर्शन के बाद चालक-परिचालकों ने एसडीएम वैशाली सिंह को मांगों का ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि यदि उन्हें नौकरी पर नहीं रखा गया तो प्रदेश में भीख मांगों आंदोलन चलाया जाएगा, जिसमें बेरोजगार हुए चालक-परिचालक अर्द्धनग्न हालत में मंत्रियों व नेताओं के यहां जाकर अपने परिवार के लिए भीख मांगेंगे।
ज्ञापन संगठन के अध्यक्ष दलबीर डागर के नेतृत्व में सौंपा गया। ज्ञापन में कहा कि वर्ष 2018 में जब रोडवेज कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे, तब पूरे प्रदेश में हरियाणा रोडवेज का चक्का जाम हो गया। इस दौरान यात्रियों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ा था। उस दौरान भर्ती किए चालक व परिचालकों ने रोडवेज की गाड़ी को पटरी पर लाने का काम किया और आम जनता को सुविधा पहुंचाई, परंतु 18 दिनों बाद खत्म हुई हड़ताल के तुरंत बाद चालक-परिचालकों को घर का रास्ता दिखा दिया, जोकि पूरी तरह से अन्याय है। ये चालक-परिचालक अन्य स्थानों से नौकरी छोड़कर आए थे। ऐसे में वे दोनों जगह से बेरोजगार हो गए, क्योंकि पुराने मालिक भी उन्हें नौकरी पर रखने के लिए तैयार नहीं है। ज्ञापन में कहा गया कि 1972, 1979 व 1993 में हुई हड़ताल के दौरान आपातकाल में जिन कर्मचारियों ने सरकार की मदद की थी, उन्हें सरकार ने नौकरी दी थी, सरकार को इस बार भी बेरोजगार हुए चालक-परिचालकों को नौकरी देनी चाहिए।
संगठन के अध्यक्ष दलबीर डागर ने कहा कि पिछले साल से पंचकूला में उनका नियमित धरना चल रहा है। वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री ने उन्हें नौकरी पर रखने का आश्वासन दिया था, परंतु तीन साल बाद भी उनके साथ वादाखिलाफी की जा रही है। सरकार से मांग है कि विभाग में आई 809 बसों पर उनकी नियुक्ति की जाए। तब तक अन्य विभागों में खाली पड़े पदों पर नौकरी दी जाए, ताकि उनके बच्चे पल सके।
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इस अवसर पर मोहन श्याम, जितेंद्र कुमार व विष्णु मुख्य रूप से मौजूद थे।
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ज्ञापन संगठन के अध्यक्ष दलबीर डागर के नेतृत्व में सौंपा गया। ज्ञापन में कहा कि वर्ष 2018 में जब रोडवेज कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे, तब पूरे प्रदेश में हरियाणा रोडवेज का चक्का जाम हो गया। इस दौरान यात्रियों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ा था। उस दौरान भर्ती किए चालक व परिचालकों ने रोडवेज की गाड़ी को पटरी पर लाने का काम किया और आम जनता को सुविधा पहुंचाई, परंतु 18 दिनों बाद खत्म हुई हड़ताल के तुरंत बाद चालक-परिचालकों को घर का रास्ता दिखा दिया, जोकि पूरी तरह से अन्याय है। ये चालक-परिचालक अन्य स्थानों से नौकरी छोड़कर आए थे। ऐसे में वे दोनों जगह से बेरोजगार हो गए, क्योंकि पुराने मालिक भी उन्हें नौकरी पर रखने के लिए तैयार नहीं है। ज्ञापन में कहा गया कि 1972, 1979 व 1993 में हुई हड़ताल के दौरान आपातकाल में जिन कर्मचारियों ने सरकार की मदद की थी, उन्हें सरकार ने नौकरी दी थी, सरकार को इस बार भी बेरोजगार हुए चालक-परिचालकों को नौकरी देनी चाहिए।
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संगठन के अध्यक्ष दलबीर डागर ने कहा कि पिछले साल से पंचकूला में उनका नियमित धरना चल रहा है। वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री ने उन्हें नौकरी पर रखने का आश्वासन दिया था, परंतु तीन साल बाद भी उनके साथ वादाखिलाफी की जा रही है। सरकार से मांग है कि विभाग में आई 809 बसों पर उनकी नियुक्ति की जाए। तब तक अन्य विभागों में खाली पड़े पदों पर नौकरी दी जाए, ताकि उनके बच्चे पल सके।
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इस अवसर पर मोहन श्याम, जितेंद्र कुमार व विष्णु मुख्य रूप से मौजूद थे।