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होली करीब आते ही बढ़ने लगी गुझिया की मांग
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पलवल। होली का पर्व जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे ही गुझिया की मांग बढ़ने लगी है। बाजारों में मिठाइयों की दुकानों पर भी तरह-तरह की गुझिया सज गई हैं। लोग भी अपनी पसंद की मिठाइयां खरीदने लगे हैं।
ब्रज क्षेत्र पलवल में तो होली का पर्व वैसे भी काफी महत्व रखता है। मथुरा, वृदावन, नंदगांव व बरसाना नजदीक होने के कारण यहां होली का अलग ही माहौल रहता है। पहले तो इस सीजन में घर-घर में बनाई जाती थी, लेकिन आज के दौर में लोगों के पास समय की कमी है। ऐसे में अब लोग बाजार से ही गुझिया खरीदना पसंद करते हैं। इस कारण बाजार में मिठाइयों की दुकानों पर गुझिया बिक्री ज्यादा होती है।
अब होली के करीब आते ही दुकानों पर हर तरह की गुझिया बिकनी शुरू हो गई है। पलवल में वेद हलवाई, सुभाष हलवाई, राम हलवाई, गुरदयाल हलवाई जैसी मशहूर दुकानों पर इसकी जोरो-शोरों से बिक्री हो रही है। वहीं बीकानेर के नाम से खुली मिठाइयों की दुकानों पर भी इस बार गुझिया की काफी बिक्री हो रही है। हालांकि इस बार इसके दाम 400 रुपये किलो है। वहीं रिफाइंड से बनी गुझिया 160 रुपये किलो व खोए की गुझिया 340 रुपये किलो है। इस बार बेक्ड व शुगर फ्री गुझिया, शहद व अंजीर से बनी गुझिया की मांग काफी है। हालांकि ये स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन ऐसी गुझिया के शौकीन फरीदाबाद, गुरुग्राम और दिल्ली से इसे लेकर आ रहे हैं।
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वर्जन-
होली के सीजन में गुझिया की बिक्री काफी होती है। हमने वसंत पंचमी से ही गुझिया बनानी शुरू कर दी थी। आजकल ग्राहक अन्य मिठाइयों के मुकाबले गुझिया की मांग करते हैं। अब जैसे-जैसे होली करीब आ रही है, वैसे-वैसे इसकी बिक्री बढ़ती जा रही है। - सुभाष, हलवाई
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ब्रज क्षेत्र पलवल में तो होली का पर्व वैसे भी काफी महत्व रखता है। मथुरा, वृदावन, नंदगांव व बरसाना नजदीक होने के कारण यहां होली का अलग ही माहौल रहता है। पहले तो इस सीजन में घर-घर में बनाई जाती थी, लेकिन आज के दौर में लोगों के पास समय की कमी है। ऐसे में अब लोग बाजार से ही गुझिया खरीदना पसंद करते हैं। इस कारण बाजार में मिठाइयों की दुकानों पर गुझिया बिक्री ज्यादा होती है।
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अब होली के करीब आते ही दुकानों पर हर तरह की गुझिया बिकनी शुरू हो गई है। पलवल में वेद हलवाई, सुभाष हलवाई, राम हलवाई, गुरदयाल हलवाई जैसी मशहूर दुकानों पर इसकी जोरो-शोरों से बिक्री हो रही है। वहीं बीकानेर के नाम से खुली मिठाइयों की दुकानों पर भी इस बार गुझिया की काफी बिक्री हो रही है। हालांकि इस बार इसके दाम 400 रुपये किलो है। वहीं रिफाइंड से बनी गुझिया 160 रुपये किलो व खोए की गुझिया 340 रुपये किलो है। इस बार बेक्ड व शुगर फ्री गुझिया, शहद व अंजीर से बनी गुझिया की मांग काफी है। हालांकि ये स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन ऐसी गुझिया के शौकीन फरीदाबाद, गुरुग्राम और दिल्ली से इसे लेकर आ रहे हैं।
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होली के सीजन में गुझिया की बिक्री काफी होती है। हमने वसंत पंचमी से ही गुझिया बनानी शुरू कर दी थी। आजकल ग्राहक अन्य मिठाइयों के मुकाबले गुझिया की मांग करते हैं। अब जैसे-जैसे होली करीब आ रही है, वैसे-वैसे इसकी बिक्री बढ़ती जा रही है। - सुभाष, हलवाई