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किसान न्याय मिलने तक पीछे नहीं हटेंगे
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पलवल। तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर चल रहा किसान आंदोलन बृहस्पतिवार को भी पलवल केएमपी केजीपी-इंटरचेंज पर जारी रहा। कुलभानु कुमार छाता की अध्यक्षता में आयोजित धरने का संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। किसानों ने कहा कि लखीमपुर खीरी में किसानों को बड़ी ही निर्ममता से कुचल दिया गया, उसके बावजूद केंद्र व योगी सरकार कार्रवाई करने से हिचक रही है। किसान हत्याकांड मामले में न्याय मिलने तक किसी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे। साथ ही प्रदेश मुख्यमंत्री खुले तौर पर हिंसा भड़काने का भाषण दे रहे हैं, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।
मनोहर लाल के इस्तीफे तक किसान चुप नहीं बैठेंगे। किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान व रघुबीर सिंह ने कहा कि किसानों से हमदर्दी जताने की कोशिश करने वालों को घर में कैद किए जा रहे हैं, जबकि किसानों को कुचलकर मार डालने वाले आजाद घूम रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र वाले देश में न्याय और कानून आज भी ताकतवर लोगों की इच्छा के अनुसार निर्धारित होता है। आज भी यह विश्वास है कि प्रजातांत्रिक देश में चुनी हुई सरकारें नीति निर्धारण एवं क्रियान्वयन का कार्य करती है, इसलिए किसान मोर्चा ने मिशन उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड तैयार किया है।
धरने को किसान नेता सोहन पाल चौहान, राजेंद्र बैंसला, रमेशचंद सौरोत, नंदा सरपंच, नरेंद्र सहरावत, समसुद्दीन मेवाती, समय सिंह, बीर सिंह, केसरी लाल शर्मा, निसार अहमद, इंद्र सिंह रावत, रोशनलाल, हुकम सिंह व हरि नंबरदार ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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मनोहर लाल के इस्तीफे तक किसान चुप नहीं बैठेंगे। किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान व रघुबीर सिंह ने कहा कि किसानों से हमदर्दी जताने की कोशिश करने वालों को घर में कैद किए जा रहे हैं, जबकि किसानों को कुचलकर मार डालने वाले आजाद घूम रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र वाले देश में न्याय और कानून आज भी ताकतवर लोगों की इच्छा के अनुसार निर्धारित होता है। आज भी यह विश्वास है कि प्रजातांत्रिक देश में चुनी हुई सरकारें नीति निर्धारण एवं क्रियान्वयन का कार्य करती है, इसलिए किसान मोर्चा ने मिशन उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड तैयार किया है।
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धरने को किसान नेता सोहन पाल चौहान, राजेंद्र बैंसला, रमेशचंद सौरोत, नंदा सरपंच, नरेंद्र सहरावत, समसुद्दीन मेवाती, समय सिंह, बीर सिंह, केसरी लाल शर्मा, निसार अहमद, इंद्र सिंह रावत, रोशनलाल, हुकम सिंह व हरि नंबरदार ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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