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अब उपभोक्ताओं को हर महीने मिलेगा बिजली का बिल

Wed, 29 Jun 2016 04:42 PM IST
palwal
palwal Updated Wed, 29 Jun 2016 04:42 PM IST
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electric bil
- फोटो : अमर उजाला
बिजली विभाग हर महीने बिजली निगमों में एनर्जी ऑडिट की तैयारी कर रहा है। इसके तहत अब उपभोक्ताओं को बिजली बिल प्रतिमाह भेजे जाएंगे। इससे विभाग को पता चलेगा कितनी बिजली दी गई, कितनी खपत हुई और कितने का बिल तैयार हुआ।
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इससे बिजली निगमों के कामकाज में पारदर्शिता आएगी। विभागीय सूत्रों की मानें तो एनर्जी ऑडिट के लिए विभाग शीघ्र ही कर्मचारियों की भर्ती भी करेगा। बिजली विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी राजन गुप्ता ने अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में कहा कि बिजली निगमों में भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसका मुख्य कारण सेल्स सर्कुलरों सहित कई तरह के निर्देशों की समानता का न होना है।
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वह कहते हैं कि पहले बिजली के बिल दो महीने पर भेजे जाते थे लेकिन अब यह प्रतिमाह भेजे जाएंगे। इससे हर महीने का लेखा-जोखा मिल सकेगा। 


उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार पर काबू पाने के लिए दो स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। पहला उपमंडलीय अधिकारियों के एकाउंटिंग ढंाचे को मजबूत किया जा रहा है। एक उपमंडलीय कार्यालय पर हर साल औसतन सौ करोड़ रुपये का टर्नओवर होता है। परंतु यहां एकाउंटिंग सिस्टम संभालने के लिए दसवीं अथवा बारहवीं पास क्लर्क लगे हुए हैं।
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इन पदों को अपग्रेड करके बीकॉम और कंप्यूटर ज्ञान रखने वाले लोगों को लगाया जाएगा। इससे सिस्टम में 70 प्रतिशत सुधार हो जाएगा। गुप्ता ने कहा कि बिजली चोरी रोकने के लिए राजनीतिक तौर पर भी ज्यादा जिम्मेदारी लेने की जरूरत है।


राजनेताओं से लोग प्रभावित होते हैं। इसी के चलते सीएम मनोहर लाल ने विधायकों मंत्रियों को बिजली निगमों के फीडर सौंपे हैं। उन्होंने कहा जगमग हरियाणा कार्यक्रम के पहले चरण में राज्य के तीन सौ से
ज्यादा गांव शामिल किए गए थे। अगले चरण में 1000 गांव शामिल किए जाएंगे। जब जनता के प्रतिनिधि गांवों में जाकर लोगों को कहेंगे कि बिजली चोरी न करें और बिजली कनेक्शन लगवायें। बिजली बिल भरे तो लोगों पर इसका असर पडे़गा। 


उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 56 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। हर साल करीब तीन लाख नए मीटरों की जरूरत नए कनेक्शनों के लिए पड़ती है। एक मीटर की लाइफ 6-7 साल तक होती है। इस हिसाब से छह लाख मीटर हर साल बदलने की जरूरत होती है। परंतु चार-पांच साल तक मीटरों की खरीद नहीं हो

सकी।

जिसके चलते अब करीब 14 लाख बिजली मीटरों की जरूरत है जो इस साल लगाने हैं। अब इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है व अगले साल साल जुलाई के बाद बिजली मीटरों की कोई समस्या नहीं होगी।
               
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