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किसान-मजदूर पंचायत के लिए कर रहे जनसंपर्क
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पलवल। किसान आंदोलन तेज करने के लिए 25 जुलाई को पलवल अनाज मंडी में आयोजित होने वाली किसान-मजदूर पंचायत को लेकर किसानों को जनसंपर्क अभियान जारी रहा। शनिवार को किसान संघर्ष समिति द्वारा निर्धारित कमेटियों ने गांव-गांव जाकर 36 बिरादरी को लोगों से पंचायत में पहुं्चने की अपील की। किसान नेताओं ने बताया कि पंचायत को लेकर लोगों को भरपूर सहयोग मिल रहा है। पंचायत के माध्यम से सरकार के किसान व मजदूरों को मांगों को पूरी करने की अपील की जाएगी।
राष्ट्रवादी विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद ने कहा कि स्वामी नाथन आयोग ने सिफारिश की थी कि किसानों को पांच किलोमीटर की दूरी में अपनी उपज को बेचने की सुविधा मिलनी चाहिए। आयोग की सिफारिश को लागू करते हुए मंडियों की संख्या बढ़ाना तो दूर वर्तमान सरकार ने नए कृषि कानून के अंतर्गत मंडियों को बंद करने का निर्णय ले लिया है। किसान आंदोलन किसान, कृषि और मंडियों को बचाने के लिए शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी और देश के विकास में किसानों का सर्वाधिक योगदान रहा है, लेकिन सरकार की किसानों के प्रति कोई हमदर्दी व सहानुभूति नहीं है। सरकार का रवैया पूर्णरूप से किसान विरोधी है। सरकार के तीनों काले कानून किसान विरोधी व जनविरोधी हैं। सरकार ने पूंजीपतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विरोधी कानून किसानों के ऊपर जबरदस्ती थोपे हैं। धरने की अध्यक्षता रूपचंद दलाल ने की, जबकि संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। इस मौके श्रीचंद औरंगाबाद, राजेंद्र सिंह, चंद्रमुनि धतीर, रणजीत मीतरोल, करतार सिंह, पोहप सिंह डागर, बाबूलाल आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रवादी विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद ने कहा कि स्वामी नाथन आयोग ने सिफारिश की थी कि किसानों को पांच किलोमीटर की दूरी में अपनी उपज को बेचने की सुविधा मिलनी चाहिए। आयोग की सिफारिश को लागू करते हुए मंडियों की संख्या बढ़ाना तो दूर वर्तमान सरकार ने नए कृषि कानून के अंतर्गत मंडियों को बंद करने का निर्णय ले लिया है। किसान आंदोलन किसान, कृषि और मंडियों को बचाने के लिए शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी और देश के विकास में किसानों का सर्वाधिक योगदान रहा है, लेकिन सरकार की किसानों के प्रति कोई हमदर्दी व सहानुभूति नहीं है। सरकार का रवैया पूर्णरूप से किसान विरोधी है। सरकार के तीनों काले कानून किसान विरोधी व जनविरोधी हैं। सरकार ने पूंजीपतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विरोधी कानून किसानों के ऊपर जबरदस्ती थोपे हैं। धरने की अध्यक्षता रूपचंद दलाल ने की, जबकि संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। इस मौके श्रीचंद औरंगाबाद, राजेंद्र सिंह, चंद्रमुनि धतीर, रणजीत मीतरोल, करतार सिंह, पोहप सिंह डागर, बाबूलाल आदि मौजूद रहे।
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