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फसल के अवशेष न जलाएं किसान

Fri, 25 Mar 2016 11:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पलवल
ब्यूरो/अमर उजाला, पलवल Updated Fri, 25 Mar 2016 11:04 PM IST
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Do not burn crop residues farmers
किसान जागरूकता शिविर - फोटो : अमर उजाला

कृभको व कृषि विभाग ने गांव फिरोजपुर राजपूत व पेलक में किसान जागरूकता शिविर लगाए। शिविरों में किसानों को फसल के बचे हुए अवशेष न जलाने की नसीहत दी गई। किसानों को गेहूं के भंडारण के संबंध में भी जानकारी दी गई तथा गर्मियों में दलहन की बिजाई करने का सुझाव दिया गया।

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गांव फिरोजपुर राजपूत में कृभको के संयोजन में लगे शिविर में कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक ने कहा है कि गेहूं की फसल की कटाई के बाद किसान फसल अवशेष न जलाएं। इससे भूमि के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे भूमि में मौजूद मित्र कीट मर जाते हैं और भूमि की सतह सख्त हो जाती है, जिससे आगामी फसल की पैदावार पर असर पड़ता है।
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इससे हवा में कार्बन, नाइट्रोजन तथा हाइड्रोकार्बन की मात्रा बढ़ जाती है और ग्रीन हाउस में गैसों की वृद्धि से ग्लोबल वार्मिंग होती है। फसल अवशेष को कंपोस्ट खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। अवशेष मृदा में मिलाने से जैविक कार्बन की मात्रा में वृद्धि होती है। जो मृदा में नमी संरक्षण में सहायक है। शिविर का संचालन कृभको के क्षेत्रीय प्रबंधक वाईपी परमार ने किया।
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डॉ. मलिक ने कहा कि गेहूं फसल की कटाई के बाद उसका सुरक्षित भंडारण भी जरूरी है। भंडारण से पूर्व टंकियों की अच्छी तरफ सफाई कर लें और उसे अच्छी प्रकार  सुखाने के बाद ही भंडारित करें। भंडारण करते समय गेहूं में नमी 10 प्रतिशत से अधिक न हो। इस मौके पर मदनमोहन, राजवीर सिंह, देवेंद्र, विजय सिंह, लख्मीचंद, पवन सिंह, महेंद्र फौजी, सुनील, जसवंत सहित कई अन्य किसान मौजूद रहे।  

गांव पेलक में कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रेमवीर सिंह पूनिया ने कहा है कि किसान धान-गेहूं फसल चक्र में बदलाव लाएं। गर्मियों में दलहनी फसलों की बिजाई करें। इससे भूमि की उपजाऊ शक्ति में बढ़ोतरी होती है तथा किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है।

उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन में मूंग के भी अनेक फायदे हैं। इससे खाली खेतों का सदुपयोग भी होता है और किसानों को भी अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। खंड तकनीकी प्रबंधक सुंदर सिंह ने कहा कि ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए एसएमएल-668 और एमएच-421 की बिजाई कर सकते हैं। एसएमएल-668 किस्म  65-70 दिन में पक जाती है, जबकि एमएच-421 किस्म 58-61 दिन में पककर तैयार हो जाती है।


जड़ गलन रोग से बचाने के लिए दो ग्राम वीटवैक्स प्रति किलोग्राम पर लगाकर बोएं। शिविर में हरिओम, बाबूराम, सूरजभान, पुस्कर, नारायण, मास्टर ताराचंद, गयालाल, तुलाराम, मास्टर गोपाल, ओमी सहित कई अन्य किसान मौजूद रहे।
                 

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