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Palwal News: आईसीयू में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था
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जिले में मौजूद 25 में से सात एम्बुलेंस खराब
रोहित
नगीना। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार के दावों की जमीनी हकीकत नूंह जिले में सवालों के घेरे में है। करीब 20 लाख की आबादी वाले जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था महज 25 एंबुलेंसों के भरोसे चल रही है। इनमें से भी सात एंबुलेंस फिलहाल सेवा देने की स्थिति में नहीं हैं। पांच एम्बुलेंस सर्विसिंग के लिए वर्कशॉप में खड़ी हैं, जबकि दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद दो रिपेयरिंग सेंटर में मरम्मत का इंतजार कर रही हैं।
नूंह जिला पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता है। नीति आयोग भी जिले को देश के आकांक्षी एवं पिछड़े जिलों की श्रेणी में शामिल किया हुआ है। आयोग की रैंकिंग स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास तथा आधारभूत ढांचे जैसे पांच प्रमुख सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों में प्रदर्शन के आधार पर तय की जाती है। इस रैंकिंग से स्पष्ट है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की अभी भी बड़ी जरूरत है।
डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी
जिले की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से मांडीखेड़ा स्थित जिला अस्पताल और नल्हड़ राजकीय मेडिकल कॉलेज पर है। हालांकि, इन संस्थानों में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, चिकित्सा उपकरणों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी लंबे समय से बनी हुई है। ऐसे में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए एंबुलेंसों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, लेकिन सीमित संख्या और एंबुलेंसों की खराब स्थिति के कारण मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं।
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अतिरिक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सरकार से अतिरिक्त एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की है। जिला अस्पताल की एम्बुलेंस शाखा के इंचार्ज डॉ. पंकज वत्स ने बताया कि विभाग की ओर से काफी समय पहले सरकार और उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर सात नई एम्बुलेंस उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा बेड़े में सात से आठ एम्बुलेंस ऐसी हैं, जो अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुकी हैं और उन्हें कंडम घोषित किया जा चुका है। विभाग जल्द ही इन वाहनों की नीलामी प्रक्रिया शुरू करेगा।
कोट
पुरानी और जर्जर हो चुकी एम्बुलेंसों के कारण सेवा संचालन में लगातार परेशानी आ रही है। नई एम्बुलेंस मिलने से जिले में आपातकालीन सेवाओं को काफी राहत मिलेगी। -डॉ. वत्स
कंडम हो चुकी गाड़ियों का सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों पर पड़ रहा है। समय पर एम्बुलेंस नहीं पहुंचने से मरीजों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। -रजत जैन, समाजसेवी
अंशुल सैनी ने स्वास्थ्य विभाग की इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की। एंबुलेंस की कमी और स्वास्थ्य ढांचे की कमजोर स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
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मुस्ताक खान नगीना ने कहा कि जिले के अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं है, ऐसे में मरीजों को बाहर ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा दुरुस्त रहनी चाहिए, ताकि एमरजेंसी में लोगों को असुविधा न हो।
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फिरोजपुर झिरका से कांग्रेस विधायक मामन खान ने कहा कि वे इस मामले को आगामी विधानसभा सत्र में सरकार के समक्ष रखेंगे और लोगों की सुविधा के लिए बेहद इस आवश्यक कार्य को पूरा कराने का प्रयास करेंगे।
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रोहित
नगीना। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार के दावों की जमीनी हकीकत नूंह जिले में सवालों के घेरे में है। करीब 20 लाख की आबादी वाले जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था महज 25 एंबुलेंसों के भरोसे चल रही है। इनमें से भी सात एंबुलेंस फिलहाल सेवा देने की स्थिति में नहीं हैं। पांच एम्बुलेंस सर्विसिंग के लिए वर्कशॉप में खड़ी हैं, जबकि दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद दो रिपेयरिंग सेंटर में मरम्मत का इंतजार कर रही हैं।
नूंह जिला पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता है। नीति आयोग भी जिले को देश के आकांक्षी एवं पिछड़े जिलों की श्रेणी में शामिल किया हुआ है। आयोग की रैंकिंग स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास तथा आधारभूत ढांचे जैसे पांच प्रमुख सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों में प्रदर्शन के आधार पर तय की जाती है। इस रैंकिंग से स्पष्ट है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की अभी भी बड़ी जरूरत है।
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डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी
जिले की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से मांडीखेड़ा स्थित जिला अस्पताल और नल्हड़ राजकीय मेडिकल कॉलेज पर है। हालांकि, इन संस्थानों में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, चिकित्सा उपकरणों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी लंबे समय से बनी हुई है। ऐसे में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए एंबुलेंसों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, लेकिन सीमित संख्या और एंबुलेंसों की खराब स्थिति के कारण मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं।
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अतिरिक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सरकार से अतिरिक्त एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की है। जिला अस्पताल की एम्बुलेंस शाखा के इंचार्ज डॉ. पंकज वत्स ने बताया कि विभाग की ओर से काफी समय पहले सरकार और उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर सात नई एम्बुलेंस उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा बेड़े में सात से आठ एम्बुलेंस ऐसी हैं, जो अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुकी हैं और उन्हें कंडम घोषित किया जा चुका है। विभाग जल्द ही इन वाहनों की नीलामी प्रक्रिया शुरू करेगा।
कोट
पुरानी और जर्जर हो चुकी एम्बुलेंसों के कारण सेवा संचालन में लगातार परेशानी आ रही है। नई एम्बुलेंस मिलने से जिले में आपातकालीन सेवाओं को काफी राहत मिलेगी। -डॉ. वत्स
कंडम हो चुकी गाड़ियों का सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों पर पड़ रहा है। समय पर एम्बुलेंस नहीं पहुंचने से मरीजों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। -रजत जैन, समाजसेवी
अंशुल सैनी ने स्वास्थ्य विभाग की इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की। एंबुलेंस की कमी और स्वास्थ्य ढांचे की कमजोर स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
मुस्ताक खान नगीना ने कहा कि जिले के अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं है, ऐसे में मरीजों को बाहर ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा दुरुस्त रहनी चाहिए, ताकि एमरजेंसी में लोगों को असुविधा न हो।
फिरोजपुर झिरका से कांग्रेस विधायक मामन खान ने कहा कि वे इस मामले को आगामी विधानसभा सत्र में सरकार के समक्ष रखेंगे और लोगों की सुविधा के लिए बेहद इस आवश्यक कार्य को पूरा कराने का प्रयास करेंगे।