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अनशन पर बैैठे युवक को पुलिस ने जबरन उठाकर दिल्ली छोड़ा
अमर उजाला ब्ययूराो
Updated Thu, 25 May 2017 11:16 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय ध्वज लगाने की मांग को लेकर चौधरी देवीलाल टाउन पार्क के बाहर पिछले चार दिनों से अनशन पर बैठे समाजसेवी ललित मित्तल को मंगलवार की देर रात पुलिस ने जबरन उठाकर एंबुलेंस में बैठा लिया तथा रात को ही दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के गेट पर छोड़ दिया। इतना ही नहीं उनके समर्थन में वहां बैठे लोगों पर भी लाठियां बरसाकर उन्हें भगा दिया और टेंट को उखाड़कर फेंक दिया। सुबह किसी तरह ललित पलवल पहुंचे तथा मीनार गेट पर फिर से अनशन शुरू कर दिया। उनके समर्थन में शहर के लोग एकत्रित होने शुरू हो गए। थोड़ी देर बाद ही अनशनकारी की तबियत खराब हो गई। इसे देखते हुए उन्हें जिला नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। अनशन को इस तरह उजाड़ने व अनशनकारी के साथ किए गए पुलिस के इस व्यवहार को लेकर शहर के लोगों में रोष है। अस्पताल में भर्ती उन्हें देखने के लिए कांग्रेसी विधायक करण सिंह दलाल भी पहुंचे तथा उन्होंने भी सरकार व पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई की निंदा की।'
गौरतलब है कि ताऊ देवीलाल पार्क में लगे हुए 100 फुट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज के खराब होने पर उसे उतार दिया गया था। इसे दोबारा नहीं लगाया गया। इसे लगवाने को लेकर समाजसेवी ललित मित्तल ने अनशन शुरू किया था। इसमें मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा भी पहुंची थीं। यहां आकर उन्हें न सिर्फ अनशन पर बैठे समाजसेवी का अपमान किया था, बल्कि तिरंगे को लेकर कुछ गलत टिप्पणी करने का भी आरोप है। अभी लोग उसी की निंदा में लगे थे कि मंगलवार की रात को पुलिस अनशन स्थल पर पहुंची तथा वहां बैठे लोगों को देखते हुए पहले तो वहां की बिजली काट दी। फिर वहां लाठियां बरसाने के बाद मित्तल को उठाकर एंबुलेंस में डाला तथा दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के गेट पर छोड़कर वापस आ गए। एक भी पैसा न होने की स्थिति में वह रात भर भूखा-प्यासे वहीं पड़े रहे और किसी तरह सुबह पलवल पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने अपने साथियों को आपबीती सुनाई तथा इसके बाद मीनार गेट पर अनशन पर बैठ गए। इस बात की जानकारी मिलने के बाद काफी संख्या में व्यापारी व समाजसेवा से जुड़े लोग वहां पहुंच गए। फिर अचानक उनकी तबीयत खराब होनी शुरू हो गई और वह बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। जहां उसे भर्ती किया गया है। अस्पताल में उन्हें देखने काफी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
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गौरतलब है कि ताऊ देवीलाल पार्क में लगे हुए 100 फुट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज के खराब होने पर उसे उतार दिया गया था। इसे दोबारा नहीं लगाया गया। इसे लगवाने को लेकर समाजसेवी ललित मित्तल ने अनशन शुरू किया था। इसमें मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा भी पहुंची थीं। यहां आकर उन्हें न सिर्फ अनशन पर बैठे समाजसेवी का अपमान किया था, बल्कि तिरंगे को लेकर कुछ गलत टिप्पणी करने का भी आरोप है। अभी लोग उसी की निंदा में लगे थे कि मंगलवार की रात को पुलिस अनशन स्थल पर पहुंची तथा वहां बैठे लोगों को देखते हुए पहले तो वहां की बिजली काट दी। फिर वहां लाठियां बरसाने के बाद मित्तल को उठाकर एंबुलेंस में डाला तथा दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के गेट पर छोड़कर वापस आ गए। एक भी पैसा न होने की स्थिति में वह रात भर भूखा-प्यासे वहीं पड़े रहे और किसी तरह सुबह पलवल पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने अपने साथियों को आपबीती सुनाई तथा इसके बाद मीनार गेट पर अनशन पर बैठ गए। इस बात की जानकारी मिलने के बाद काफी संख्या में व्यापारी व समाजसेवा से जुड़े लोग वहां पहुंच गए। फिर अचानक उनकी तबीयत खराब होनी शुरू हो गई और वह बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। जहां उसे भर्ती किया गया है। अस्पताल में उन्हें देखने काफी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
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