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जिले की मंडी में नहीं खरीदी जा रही कपास की फसल

Sat, 12 Oct 2013 11:17 PM IST
अमर उजाला, पलवल
अमर उजाला, पलवल Updated Sat, 12 Oct 2013 11:17 PM IST
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cotton crop is not purchasing in market

कपास की फसल की खरीद के लिए पलवल व आसपास की मंडियों में कोई सुविधा न होने की वजह से जिले के किसान अपनी फसल को बेचने के लिए दूसरे जिले की मंडियों के धक्के खाने को मजबूर हैं। या फिर उन्हें फसल व्यापारियों को सस्ते दामों पर बेचनी पड़ रही है। इसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है।

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कपास उत्पादक किसान प्रताप सिंह, पीतराम व कन्हैया का कहना है कृषि विभाग के आश्वासन पर जिले में करीब दो हजार एकड़ भूमि में इस वर्ष कपास की फसल बोई है। लेकिन अब जब फसल तैयार हो चुकी है तो उसको खरीदने वाला कोई नहीं हैं।
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किसानों को मजबूर होकर सस्ते दामों पर अपनी फसल को व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है। कपास का सरकारी भाव 37 सौ से चार हजार रुपये प्रति कुंतल हैं। लेकिन सरकारी खरीद न होने और मंडी में खरीद की सुविधा न होने की वजह से किसानों को अपनी फसल को तीन हजार से 32 सौ रुपये प्रति कुंतल में व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है।
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पूरे हरियाणा में कपास सरकारी रेट पर खरीदी जा रही है, लेकिन जिले में किसानों को सरकारी भाव नहीं मिल पा रहा है। किसानों में सरकार व कृषि विभाग के प्रति रोष व्याप्त है।


मंडी में नहीं कपास खरीद की सुविधा
जिले की अनाज मंडी के सुपरवाइजर सुमरथ चौहान का कहना हैं कि मंडी में कपास खरीद की सुविधा न होने से फसल बेचने में दिक्कतों का सामना उठाना पड़ रहा है।

कपास उत्पादक गांव
गांव धतीर, ककराली, अल्लिका, यादूपुर, महेशपुर, मंडकौला, गेलपुर, बढ़ा, कटेसरा, अलावलपुर, बलई, थंथरी, घोड़ी, चांदहट, सिहोल, पेलक, दिघोट, रायदासका, बामनीखेड़ा, बघौला व पृथला सहित अन्य दर्जनों गांवों के किसानों को कपास की फसल बेचने में परेशानी हो रही है ।

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