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भौंकने लगा था कार्तिक: 30 दिन पहले बच्चे को कुत्ते ने काटा, दो दिन पहले पता चला उसे हो गई थी ये गंभीर बीमार

Thu, 01 Aug 2024 06:54 PM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 01 Aug 2024 06:54 PM IST
सार

मरने से दो दिन पहले यानी 28 जुलाई को घायल कार्तिक ने अचानक कुत्ते की तरह भौंकना शुरू कर दिया था, लेकिन उसके परिजन उसे ठीक से समझ नहीं पाए थे, क्योंकि वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा था। परिवार को लगा कि वह ठीक हो गया और जानबूझकर ऐसा कर रहा है। 

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A five-year-old boy died a month after being bitten by a dog
कुत्ते के काटने से पांच साल के बच्चे की मौत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा के पलवल स्थित गांव गुरवाड़ी में कुत्ते के काटने से घायल बच्चे की एक माह बाद रैबीज होने से मौत हो गई। एक माह से बच्चे का इलाज चल रहा था और वह करीब 15 दिन दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में भर्ती भी रहा था। अब एक माह बाद बच्चे को अचानक बुखार होने लगा और जहां जबड़ा व मुंह पर कुत्ते ने काटा था, वहां तेज दर्द होने के बाद अस्पताल ले जाते समय बच्चे की मौत हो गई। दो दिन पहले बच्चे में रैबीज का असर दिखाई देने लगा था। बच्चे कार्तिक ने कुत्ते की तरह भौंकना भी शुरू कर दिया था। पुलिस ने जिला नागरिक अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम कराया। जहां डॉक्टरों ने उसका बिसरा जांच के लिए भी मेडिकल कॉलेज में भेजा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कुत्ता काटने के एक माह बाद शरीर में क्या असर हुआ।

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गांव गुरवाड़ी निवासी राजू ने बताया कि उसका पांच वर्षीय पुत्र कार्तिक नर्सरी कक्षा में पढ़ता था। 27 जून को कार्तिक को गांव में पागल कुत्ते ने काट लिया था। कुत्ते ने कार्तिक के जबड़े और मुंह पर काट खाया था। इससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। जब उसके दादा वीरेंद्र उसे बचाने आए तो उन्हें भी उस कुत्ते ने काट लिया।

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वह अपने पुत्र कार्तिक और पिता वीरेंद्र को लेकर जिला नागरिक अस्पताल गए, लेकिन वहां उस समय रैबीज के इंजेक्शन नहीं थे, जिस कारण उन दोनों को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। सफदरजंग अस्पताल में कार्तिक का उपचार चला। उपचार पूरा कराने के करीब 15 दिन बाद कार्तिक अपने घर पर आ गया था।

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राजू ने पुलिस को बताया कि घर पर ही कार्तिक का इलाज चल रहा था। अचानक 30 जुलाई को कार्तिक को जबड़े में दर्द होना शुरू हो गया और उसे बुखार चढ़ गया। वह कार्तिक को लेकर शहर के एक निजी अस्पताल में गए। जहां कार्तिक की हालत गंभीर बताई गई। वह कार्तिक को लेकर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल जाने लगे, मगर बीच रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद वह कार्तिक के शव को लेकर जिला नागरिक अस्पताल पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मृतक बच्चे कार्तिक के शव का पोस्टमार्टम कराया। डॉक्टरों ने उसका बिसरा लेकर जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया है।

बच्चे ने भौंकना शुरू कर दिया था
मरने से दो दिन पहले यानी 28 जुलाई को घायल कार्तिक ने अचानक कुत्ते की तरह भौंकना शुरू कर दिया था, लेकिन उसके परिजन उसे ठीक से समझ नहीं पाए थे, क्योंकि वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा था। परिवार को लगा कि वह ठीक हो गया और जानबूझकर ऐसा कर रहा है। लेकिन गुरुवार को अचानक उसके जबड़े में दर्द होना शुरू हो गया। जिस कारण उसने रोना शुरू कर दिया और भौंकना और तेज कर दिया। उसे बुखार भी हो गया।

मृतक के दादा सहित कई और लोगों की होगी जांच
मृतक बच्चे कार्तिक के दादा वीरेंद्र और गांव के अन्य लोगों, जिन्हें उस कुत्ते ने काटा था, उनमें भी भय बन गया है। कार्तिक के परिजनों की जानकारी बाद स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग उन सभी लोगों के खून के सैंपल लेकर जांच करेगा, जिन्हें गांव में उस कुत्ते ने काटा था।

कुत्ता मार दिया गया
बताया गया कि कुत्ता पागल था। कार्तिक व उसके दादा के अलावा उसने अन्य लोगों पर भी हमला बोलना शुरू कर दिया था। जिसके बाद ग्रामीणों ने उस कुत्ते को मार दिया था और उसे जमीन में दफना दिया था, ताकि वह किसी और को घायल न करे।

चेहरे व गर्दन पर काटना बेहद खतरनाक होता है
कुत्ते द्वारा गर्दन और चेहरे खासकर मुंह के आसपास काटना बेहद खतरनाक होता है। यहां कुत्ता, बंदर व अन्य ऐसे जानवरों के काटने पर संक्रमण ज्यादा फैलने का खतरा रहता है। कुत्ते के काटे जाने की तीन तरह की कैटेगरी होती है। कार्तिक को तीसरी कैटेगरी से काटा गया था। उसके मुंह पर काटने के दौरान कुत्ते ने मांस तक खींच लिया था। जिसका असर अब हुआ। एक माह बाद संक्रमण फैल गया और उसकी मौत हो गई। तीसरी कैटेगरी होने पर रैबीज का टीका लगने के बाद एंटीबॉडी बनने में समय लगता है। कई बार टीका भी असर नहीं करता। जिससे रैबीज शरीर में फैल जाता है। -डॉ. विपिन कुमार, वरिष्ठ चिकित्सक नागरिक अस्पताल

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