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परंपरा और उल्लास से हुई गोवर्धन पूजन
Palwal
Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
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पलवल। दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। पलवल जिला ब्रज क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए यहां गोवर्धन पर्व का उत्साह ज्यादा होता है और इसे परंपरागत तरीके से मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में गाय की पूजा की जाती है और उसके गोबर को पवित्र माना जाता है। प्राचीन काल से ही लोग इस अवसर पर घर के आंगन को गोबर से लेपते हैं, जमीन पर गोवर्धन भगवान की आकृति बनाकर उसकी पूजा अर्चना की जाती है। गाय को रोटी खिलाना पुण्य का काम माना जाता है। इस दिन महिलाएं गांव में गाय का गोबर एकत्रित करना शुरू कर देती हैं और दोपहर बाद उस गोबर से गोवर्धन भगवान की आकृति बनाकर उसे रंगबिरंगे रंगों, आटे, कपास व सीकों से सजाया जाता है।
गोवर्धन पर्व को लेकर पंचवटी मंदिर, खेड़ा देवत मंदिर, खोंटा मंदिर, मुकुटदास मंदिर, ओमकारेश्वर मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, गंगा मंदिर, श्रीराम कुटी में भारी भीड़ उमड़ी। मंदिरों में बाजरा-चावल की खिचड़ी, कड़ी के रूप में अन्नकूट का प्रसाद तैयार किया गया। हजारों लोगों ने मंदिर में एक साथ प्रसाद ग्रहण किया।
वहीं जिले में विश्वकर्मा दिवस धूमधाम से मनाया गया। कारीगरों ने वर्कशॉप में विश्वकर्मा भगवान की पूजा अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने अपने औजारों की भी पूजा की।
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गोवर्धन पर्व को लेकर पंचवटी मंदिर, खेड़ा देवत मंदिर, खोंटा मंदिर, मुकुटदास मंदिर, ओमकारेश्वर मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, गंगा मंदिर, श्रीराम कुटी में भारी भीड़ उमड़ी। मंदिरों में बाजरा-चावल की खिचड़ी, कड़ी के रूप में अन्नकूट का प्रसाद तैयार किया गया। हजारों लोगों ने मंदिर में एक साथ प्रसाद ग्रहण किया।
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वहीं जिले में विश्वकर्मा दिवस धूमधाम से मनाया गया। कारीगरों ने वर्कशॉप में विश्वकर्मा भगवान की पूजा अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने अपने औजारों की भी पूजा की।
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