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हरियाणा में परमाणु संयंत्र बनने का रास्ता साफ
फतेहाबाद/ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2013 11:03 PM IST
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गांव गोरखपुर में लगने वाले परमाणु बिजली संयंत्र का रास्ता साफ हो गया है।
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परमाणु संयंत्र के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे आखिरी 28 एकड़ जमीन
के मालिक भी राजी हो गए हैं।
प्रशासन ने अब संयंत्र के लिए निर्धारित पूरी 1503 एकड़ भूमि पर अपना कब्जा ले लिया है। इसके साथ ही लगभग तीन साल तक चला किसानों का विरोध भी एक बार समाप्त हो गया है। वीरवार को दिन भर प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ मौके पर डटा रहा। किसानों द्वारा बिजाई की गई जमीन पर ट्रैक्टर चलाने के बाद सभी ने राहत की सांस ली। अब जमीन का सॉयल टेस्टिंग और टॉपीग्राफिकल सर्वे तेजी से होगा।
सर्वे के लिए चाहिए थी पूरी जमीन
गोरखपुर परमाणु संयंत्र के लिए तीन गांवों की 1503 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना था। इसमें से 28.5 एकड़ भूमि के किसानाें ने न तो मुआवजा लिया और न ही कब्जा छोड़ा था। नेशनल जियोग्राफी रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा जमीन का सॉयल टेस्टिंग सर्वे चल रहा है। इसके अलावा टॉपीग्राफिकल सर्वे भी हो रहा है। एनजीआरआई सर्वे में भूकंप, मिट्टी की क्वालिटी और मिट्टी की सतह आदि का सर्वे किया जाता है। 28 एकड़ भूमि के मालिक रामफल, रामस्वरूप नैन, भगतराम, मंगल, हवा सिंह और रामकुमार आदि न तो जमीन छोड़ रहे थे और न ही सर्वे करने वालों को जमीन में घुसने दे रहे थे। इस स्थिति में एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने जिला प्रशासन को लिखित में शिकायत देकर कब्जा दिलवाने की मांग की थी।
एक-एक करके किसानों को तोड़ा
एनपीसीआईएल की कब्जा दिलाने की शिकायत पर जिला प्रशासन ने रणनीति बनाकर मौके पर पुलिस की चार बटालियन तैनात की। गांव की शांति कमेटी को साथ लेकर एसडीएम बलजीत सिंह, डीएसपी विजय जाखड़ व जिला राजस्व अधिकारी राम सिंह बिश्नोई ने किसानों से बातचीत की। सबसे पहले साढ़े चार एकड़ भूमि के मालिक रामफल से बातचीत की गई और वह मान गया। उसके खेत में लगी गेहूं पर हल चला दिया गया। बाकी किसानों को मनाने में प्रशासनिक अधिकारियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। दिनभर किसान जमीन न देने के लिए अड़े रहे, लेकिन बाद में एक-एक करके टूटते चले गए। इसके अलावा प्रशासन ने मुआवजे और अन्य मांगाें पर बातचीत करने, कोर्ट में जाने सहित कई विकल्प रखें। इस दौरान संजय गोमास्ता, होशियार सिंह, एसके शर्मा, ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार जमीयत राय सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
तीन साल का किसानों का संघर्ष हुआ खत्म
17 जुलाई 2010 को गोरखपुर में परमाणु संयंत्र लगाने के लिए अधिसूचना जारी की गई
1503 एकड़ जमीन गांव गोरखपुर, कुम्हारिया, बडोपल और काजलहेड़ी की होनी थी अधिगृहीत
1313 एकड़ गोरखपुर की जमीन, गोरखपुर किसान संघर्ष समिति का लघु सचिवालय पर धरना शुरू
16 जुलाई 2011 को सेक्शन 4 लागू, 26 जुलाई 2012 को सेक्शन 6 लगाया गया
17 जुलाई 2012 को जनसुनवाई, किसानों ने जमकर विरोध किया, सभी विपक्षी पार्टियां आई साथ, लेकिन किसानों ने मुआवजा लेना शुरू किया, इसके बाद धीरे-धीरे किसानों की एकजुटता बिखरने लगी
सितंबर, 2012 में दो साल से चला आ रहा धरना समाप्त, इस समय के दौरान तीन किसान शहीद हुए
05 दिसंबर 2013 को सभी किसान माने और सारी जमीन पर एनपीसीआईएल का कब्जा
नए कानून के तहत मिले मुआवजा : सिवाच
गोरखपुर किसान संघर्ष समिति के प्रधान हंसराज सिवाच ने कहा कि किसानाें की मर्जी के बिना उनकी जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाना चाहिए। सरकार किसानों से जबरदस्ती कर रही है। उन्होंने मांग की कि किसानों की जमीन नए कानून के तहत अधिगृहीत की जानी चाहिए। उन्होंनेकहा कि गोरखपुर की जमीन का अधिग्रहण होने के बाद गोरखपुर के लोग बेघर हो गए।
इतना दिया जा चुका है मुआवजा
1503 एकड़ भूमि पर लगने वाले परमाणु बिजली संयंत्र के लिए अब तक 402 करोड़ रुपये की राशि मुआवजे के रूप में किसानाें को दी जा चुकी है। इसके अलावा 22 करोड़ रुपये नॉन लिटिगेशन व 19 करोड़ रुपये की राशि ट्यूबवेल, पाइप लाइन, मकान और पेड़ पौधों आदि मुआवजे के लिए दी जा चुकी है। प्लांट में 700-700 मेगावाट की चार यूनिट बिजली का उत्पादन करेगी और इस पर लगभग 23502 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
किसानों ने वीरवार को स्वेच्छा से परमाणु संयंत्र की शेष बची 28 एकड़ जमीन एनपीसीआईएल को सौंप दी है।
- डॉ. साकेत कुमार, उपायुक्त, फतेहाबाद
प्रशासन ने अब संयंत्र के लिए निर्धारित पूरी 1503 एकड़ भूमि पर अपना कब्जा ले लिया है। इसके साथ ही लगभग तीन साल तक चला किसानों का विरोध भी एक बार समाप्त हो गया है। वीरवार को दिन भर प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ मौके पर डटा रहा। किसानों द्वारा बिजाई की गई जमीन पर ट्रैक्टर चलाने के बाद सभी ने राहत की सांस ली। अब जमीन का सॉयल टेस्टिंग और टॉपीग्राफिकल सर्वे तेजी से होगा।
सर्वे के लिए चाहिए थी पूरी जमीन
गोरखपुर परमाणु संयंत्र के लिए तीन गांवों की 1503 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना था। इसमें से 28.5 एकड़ भूमि के किसानाें ने न तो मुआवजा लिया और न ही कब्जा छोड़ा था। नेशनल जियोग्राफी रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा जमीन का सॉयल टेस्टिंग सर्वे चल रहा है। इसके अलावा टॉपीग्राफिकल सर्वे भी हो रहा है। एनजीआरआई सर्वे में भूकंप, मिट्टी की क्वालिटी और मिट्टी की सतह आदि का सर्वे किया जाता है। 28 एकड़ भूमि के मालिक रामफल, रामस्वरूप नैन, भगतराम, मंगल, हवा सिंह और रामकुमार आदि न तो जमीन छोड़ रहे थे और न ही सर्वे करने वालों को जमीन में घुसने दे रहे थे। इस स्थिति में एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने जिला प्रशासन को लिखित में शिकायत देकर कब्जा दिलवाने की मांग की थी।
एक-एक करके किसानों को तोड़ा
एनपीसीआईएल की कब्जा दिलाने की शिकायत पर जिला प्रशासन ने रणनीति बनाकर मौके पर पुलिस की चार बटालियन तैनात की। गांव की शांति कमेटी को साथ लेकर एसडीएम बलजीत सिंह, डीएसपी विजय जाखड़ व जिला राजस्व अधिकारी राम सिंह बिश्नोई ने किसानों से बातचीत की। सबसे पहले साढ़े चार एकड़ भूमि के मालिक रामफल से बातचीत की गई और वह मान गया। उसके खेत में लगी गेहूं पर हल चला दिया गया। बाकी किसानों को मनाने में प्रशासनिक अधिकारियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। दिनभर किसान जमीन न देने के लिए अड़े रहे, लेकिन बाद में एक-एक करके टूटते चले गए। इसके अलावा प्रशासन ने मुआवजे और अन्य मांगाें पर बातचीत करने, कोर्ट में जाने सहित कई विकल्प रखें। इस दौरान संजय गोमास्ता, होशियार सिंह, एसके शर्मा, ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार जमीयत राय सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
तीन साल का किसानों का संघर्ष हुआ खत्म
17 जुलाई 2010 को गोरखपुर में परमाणु संयंत्र लगाने के लिए अधिसूचना जारी की गई
1503 एकड़ जमीन गांव गोरखपुर, कुम्हारिया, बडोपल और काजलहेड़ी की होनी थी अधिगृहीत
1313 एकड़ गोरखपुर की जमीन, गोरखपुर किसान संघर्ष समिति का लघु सचिवालय पर धरना शुरू
16 जुलाई 2011 को सेक्शन 4 लागू, 26 जुलाई 2012 को सेक्शन 6 लगाया गया
17 जुलाई 2012 को जनसुनवाई, किसानों ने जमकर विरोध किया, सभी विपक्षी पार्टियां आई साथ, लेकिन किसानों ने मुआवजा लेना शुरू किया, इसके बाद धीरे-धीरे किसानों की एकजुटता बिखरने लगी
सितंबर, 2012 में दो साल से चला आ रहा धरना समाप्त, इस समय के दौरान तीन किसान शहीद हुए
05 दिसंबर 2013 को सभी किसान माने और सारी जमीन पर एनपीसीआईएल का कब्जा
नए कानून के तहत मिले मुआवजा : सिवाच
गोरखपुर किसान संघर्ष समिति के प्रधान हंसराज सिवाच ने कहा कि किसानाें की मर्जी के बिना उनकी जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाना चाहिए। सरकार किसानों से जबरदस्ती कर रही है। उन्होंने मांग की कि किसानों की जमीन नए कानून के तहत अधिगृहीत की जानी चाहिए। उन्होंनेकहा कि गोरखपुर की जमीन का अधिग्रहण होने के बाद गोरखपुर के लोग बेघर हो गए।
इतना दिया जा चुका है मुआवजा
1503 एकड़ भूमि पर लगने वाले परमाणु बिजली संयंत्र के लिए अब तक 402 करोड़ रुपये की राशि मुआवजे के रूप में किसानाें को दी जा चुकी है। इसके अलावा 22 करोड़ रुपये नॉन लिटिगेशन व 19 करोड़ रुपये की राशि ट्यूबवेल, पाइप लाइन, मकान और पेड़ पौधों आदि मुआवजे के लिए दी जा चुकी है। प्लांट में 700-700 मेगावाट की चार यूनिट बिजली का उत्पादन करेगी और इस पर लगभग 23502 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
किसानों ने वीरवार को स्वेच्छा से परमाणु संयंत्र की शेष बची 28 एकड़ जमीन एनपीसीआईएल को सौंप दी है।
- डॉ. साकेत कुमार, उपायुक्त, फतेहाबाद