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मोबाइल की रोशनी में हो रहा उपचार
ऐलनाबाद (सिरसा)/ब्यूरो
Updated Sat, 09 Nov 2013 07:34 PM IST
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बिजली जाने पर नर्सों को मोबाइल की रोशनी में रोगियों को इलाज करना पड़ रहा है। वार्ड नंबर 15 नोहर रोड कॉलोनी में डायरिया के कारण मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है वहीं केंद्र में सुविधाओं की कमी भी मरीजों की परेशानी का सबब बन रही है।
स्वास्थ्य केंद्र में रात में उपचार की जिम्मेदारी दो स्टाफ नर्स पर होती है। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी का कहना है कि स्टाफ कम है और जनरेटर की सुविधा भी नहीं है। शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो और रोगी उपचार के लिए पहुंचे। केंद्र में इस समय पचास से अधिक रोगी दाखिल हैं।
ऐलनाबाद के वार्ड नंबर 15 में डायरिया पीड़िताें की संख्या 150 से अधिक पहुंच गई है। स्वास्थ्य केंद्र में 50 से अधिक रोगी उपचाराधीन हैं। वहीं स्वास्थ्य केंद्र खुद परेशानियों से जूझ रहा है। रोगियों की देखभाल के लिए रात में सिर्फ दो स्टाफ नर्स ही ड्यूटी पर होती हैं।
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ऐसे में रोगियाें को खासी परेशानी होती हैं। मरीजों के सामने बिस्तरों की संख्या भी कम है। तीमारदारों सुरेश कुमार, विद्या देवी, गिरधारी, राम किशन, सुलोचना, मनोज आदि ने बताया कि शुक्रवार रात ड्यूटी पर कोई चिकित्सक नहीं था। वहीं केंद्र में जनरेटर नहीं है। बिजली जाते ही अस्पताल अंधेरे में डूब जाता है। अगर किसी रोगी को ड्रिप लगानी हो या इंजेक्शन लगाना पड़े तो मोबाइल फोन की रोशनी से काम चलना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य केंद्र में रात में उपचार की जिम्मेदारी दो स्टाफ नर्स पर होती है। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी का कहना है कि स्टाफ कम है और जनरेटर की सुविधा भी नहीं है। शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो और रोगी उपचार के लिए पहुंचे। केंद्र में इस समय पचास से अधिक रोगी दाखिल हैं।
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ऐलनाबाद के वार्ड नंबर 15 में डायरिया पीड़िताें की संख्या 150 से अधिक पहुंच गई है। स्वास्थ्य केंद्र में 50 से अधिक रोगी उपचाराधीन हैं। वहीं स्वास्थ्य केंद्र खुद परेशानियों से जूझ रहा है। रोगियों की देखभाल के लिए रात में सिर्फ दो स्टाफ नर्स ही ड्यूटी पर होती हैं।
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ऐसे में रोगियाें को खासी परेशानी होती हैं। मरीजों के सामने बिस्तरों की संख्या भी कम है। तीमारदारों सुरेश कुमार, विद्या देवी, गिरधारी, राम किशन, सुलोचना, मनोज आदि ने बताया कि शुक्रवार रात ड्यूटी पर कोई चिकित्सक नहीं था। वहीं केंद्र में जनरेटर नहीं है। बिजली जाते ही अस्पताल अंधेरे में डूब जाता है। अगर किसी रोगी को ड्रिप लगानी हो या इंजेक्शन लगाना पड़े तो मोबाइल फोन की रोशनी से काम चलना पड़ रहा है।