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सचिन को बनाओ खेल मंत्री : मिल्खा सिंह
रोहतक/ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2013 07:27 PM IST
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पद्मश्री मिल्खा सिंह ने सचिन तेंदुलकर को खेल मंत्री बनाने की मांग की है। मिल्खा सिंह रविवार को भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) की ओर से आयोजित रन फॉर गर्ल चाइल्ड मिनी मैराथन दौड़ के दौरान बोल रहे थे।
इस दौरन उन्होंने कहा कि राजनैतिक लोगों को खिलड़ियों की समस्याओं के बारे में पता नहीं है, इसलिए सचिन तेंदुलकर को भारत सरकार में खेल मंत्री बना देना चाहिए, वह एमपी भी हैं और संन्यास भी लेने वाले हैं। साथ ही वे खिलाड़ियों के दुख-दर्द को अच्छी तरह से समझ सकते हैं।
इस मौके पर उन्होंने मैच फिक्सिंग पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में खिलाड़ी पैसा लेकर देश की इज्जत को बेच देते हैं इसलिए मैं इसके खिलाफ हूं और मैच देखने भी नहीं जाता। क्रिकेट में प्लानिंग ठीक है। मैं इसके खिलाफ नहीं हूं, लेकिन किसी भी खिलाड़ी के लिए देश की इज्जत पहले है।
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क्रिकेट में खिलाड़ी मैच फिक्सिंग में पैसा लेकर देश की इज्जत को बेच देते हैं, जो सरासर गलत है और इसलिए मैं क्रिकेट देखने ही नहीं जाता।
उन्होंने कहा कि भारत में सचिन, पीटी उषा जैसे बडे़ नामचीन खिलाड़ी हुए हैं। पूरे देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। लेकिन खिलाड़ियों की मेहनत और प्रशिक्षकों द्वारा सही रास्ता ना दिखाना उनकी राह में रोड़ा है। इसलिए खिलाड़ियों को चाहिए कि उनमें इच्छा शक्ति हो और वे मेहनत करें तो जो पदक मिल्खा सिंह को नहीं मिल पाया वह भारत में फिर से आ सकता है।
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इस दौरन उन्होंने कहा कि राजनैतिक लोगों को खिलड़ियों की समस्याओं के बारे में पता नहीं है, इसलिए सचिन तेंदुलकर को भारत सरकार में खेल मंत्री बना देना चाहिए, वह एमपी भी हैं और संन्यास भी लेने वाले हैं। साथ ही वे खिलाड़ियों के दुख-दर्द को अच्छी तरह से समझ सकते हैं।
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इस मौके पर उन्होंने मैच फिक्सिंग पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में खिलाड़ी पैसा लेकर देश की इज्जत को बेच देते हैं इसलिए मैं इसके खिलाफ हूं और मैच देखने भी नहीं जाता। क्रिकेट में प्लानिंग ठीक है। मैं इसके खिलाफ नहीं हूं, लेकिन किसी भी खिलाड़ी के लिए देश की इज्जत पहले है।
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क्रिकेट में खिलाड़ी मैच फिक्सिंग में पैसा लेकर देश की इज्जत को बेच देते हैं, जो सरासर गलत है और इसलिए मैं क्रिकेट देखने ही नहीं जाता।
उन्होंने कहा कि भारत में सचिन, पीटी उषा जैसे बडे़ नामचीन खिलाड़ी हुए हैं। पूरे देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। लेकिन खिलाड़ियों की मेहनत और प्रशिक्षकों द्वारा सही रास्ता ना दिखाना उनकी राह में रोड़ा है। इसलिए खिलाड़ियों को चाहिए कि उनमें इच्छा शक्ति हो और वे मेहनत करें तो जो पदक मिल्खा सिंह को नहीं मिल पाया वह भारत में फिर से आ सकता है।