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Mahendragarh-Narnaul News: जिले में भी शतरंज को खेल के रूप में अपना रहे युवा
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फोटो नंबर- 14अभिनव यादव, गांव- बशीरपुर
नारनौल। जिले में स्कूली बच्चे शतरंज को खेल के रूप में अपना रहे हैं लेकिन सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षण की कमी है। पिछले वर्ष राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में सरकारी स्कूलों के बच्चों की भागीदारी बहुत कम रही थी।
इसका मुख्य कारण सरकारी शिक्षण संस्थानों में निजी स्कूलों की तरह शतरंज प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का अभाव है। सरकारी स्कूलों से केवल वही बच्चे भाग लेते हैं जो अपने स्तर पर खेल को पसंद करते हैं। खेल विभाग की ओर से भी जिले में शतरंज के लिए कोई खेल नर्सरी या क्लब संचालित नहीं है।
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बीते वर्ष मैंने स्कूल स्टेट प्रतियोगिता में भाग लिया था और बेहद कम अंतर से पदक जीतने से चूक गया था। हालांकि जिला स्तर पर मैंने अंडर-19 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था जिससे मेरे आत्मविश्वास में वृद्धि हुई। शतरंज को मैंने खेल के रूप में चुना है और नियमित रूप से शतरंज का अभ्यास कर रहा हूं।-अभिनव यादव, गांव बशीरपुर
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वर्जन :
गत वर्ष आयोजित स्कूल स्टेट प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने शतरंज खेल में बेहतर प्रदर्शन किया था। इस बार खंड स्तरीय प्रतियोगिता का शुभारंभ 20 जुलाई से किया जा रहा है। उम्मीद है खिलाड़ी शतरंज खेल में पदक जीत कर जिले का नाम रोशन करेंगे। -विक्रम सिंह यादव, एईओ, नारनौल।
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इसका मुख्य कारण सरकारी शिक्षण संस्थानों में निजी स्कूलों की तरह शतरंज प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का अभाव है। सरकारी स्कूलों से केवल वही बच्चे भाग लेते हैं जो अपने स्तर पर खेल को पसंद करते हैं। खेल विभाग की ओर से भी जिले में शतरंज के लिए कोई खेल नर्सरी या क्लब संचालित नहीं है।
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बीते वर्ष मैंने स्कूल स्टेट प्रतियोगिता में भाग लिया था और बेहद कम अंतर से पदक जीतने से चूक गया था। हालांकि जिला स्तर पर मैंने अंडर-19 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था जिससे मेरे आत्मविश्वास में वृद्धि हुई। शतरंज को मैंने खेल के रूप में चुना है और नियमित रूप से शतरंज का अभ्यास कर रहा हूं।-अभिनव यादव, गांव बशीरपुर
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वर्जन :
गत वर्ष आयोजित स्कूल स्टेट प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने शतरंज खेल में बेहतर प्रदर्शन किया था। इस बार खंड स्तरीय प्रतियोगिता का शुभारंभ 20 जुलाई से किया जा रहा है। उम्मीद है खिलाड़ी शतरंज खेल में पदक जीत कर जिले का नाम रोशन करेंगे। -विक्रम सिंह यादव, एईओ, नारनौल।