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Hindi News ›   Haryana ›   Won the battle with cancer, will now visit Ayodhya, all due to the blessings of Ramji...

Ram Mandir: कैंसर से जंग जीते, अब अयोध्या में दर्शन करेंगे, सब रामजी की कृपा है...

Tue, 09 Jan 2024 11:50 PM IST
रोहतक ब्यूरो मनोज राजपूत, संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़ (हरियाणा)
मनोज राजपूत, संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़ (हरियाणा) Updated Tue, 09 Jan 2024 11:50 PM IST
सार

महेंद्रगढ़ के गांव बेरी के राजपाल ने कारसेवा से जुड़े संस्मरण सुनाए। बोले- यह सपना पूरा  हुआ, अब मौत का भी भय नहीं है। कहा कि दो घंटे का जोखिमभरा सफर तय कर जब डिब्बों में सवार हुए थे तो पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

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Won the battle with cancer, will now visit Ayodhya, all due to the blessings of Ramji...
राजपाल सिंह - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

वर्ष 1990 में कार सेवा के लिए हरियाणा के महेंद्रगढ़ से अयोध्या जाने के लिए पांच घंटे में दस बार व्यवस्थाओं में बदलाव किया गया। कभी ट्रक तो कभी बस से जाने की योजना बनी, लेकिन कभी पुलिस तो कभी प्रशासन के दबाव के कारण आखिरकार ट्रेन में सफर करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों की ओर से संतों पर की गई अभद्र टिप्पणी व अपमान का विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

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वर्ष 1990 के दौरान महेंद्रगढ़ से कार सेवकों के दल में शामिल गांव बेरी निवासी राजपाल सिंह ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उस दौरान रामलला के लिए देशभर में कार सेवकों में भारी उत्साह था। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने अधिकतर ट्रेनों को रद्द करा दिया था।

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यातायात के सभी साधनों को बंद करा दिया था। दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भीड़ देखकर सरकार ने ट्रेनें रद्द करा दीं। 33 वर्षों के बाद तीन वर्ष पूर्व उन्होंने कैंसर से जंग जीती है। ऐसा लग रहा है कि अयोध्या में भव्य मंदिर बनाने का सपना पूरा होते देखना लिखा था।

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वह सौभाग्यशाली हैं कि भगवान श्रीराम का मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम देख पाएगा। अब जीवन से कोई गिला शिकवा नहीं रहा है। जल्द ही वह अपनी पत्नी व बच्चों के साथ अयोध्या जाकर श्रीराम मंदिर को अपनी आंखों से देखेंगे। यह सपना पूरा होने से खुशी है।


गाड़ी चलने पर आने लगे थे चक्कर, साथियों ने संभाला
राजपाल सिंह ने बताया कि लखनऊ के लिए जो गाड़ी मिली, उसमें अधिक भीड़ होने के कारण दोनों डिब्बों के बीच में बैठकर यात्रा प्रारंभ की। गाड़ी चलने पर चक्कर आने लगे फिर साथ बैठे कार सेवक के साथ हाथ पड़कर आंख बंदकर बैठे रहे। दो घंटे जोखिम भरा सफर तय किया।

 

बीच में एक स्थान पर गाड़ी रुकी तो डिब्बे में सवार हुए। कुछ ही दूरी पर चले थे कि पुलिस अधिकारियों ने रोक लिया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने संतों के साथ अपमानजनक बातें की तो उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। वह कार सेवकों के साथ संतों के साथ खड़े हो गए, जिसके बाद महेंद्रगढ़ से जाने वाले सभी कार सेवकों को गिरफ्तार कर लिया गया।

 

पांच दिन बाद गिरफ्तारी से छूटे फिर अयोध्या के लिए प्रस्थान किया। उसी दौरान लखनऊ में कर्फ्यू लगा हुआ था। ऐसे में जान की बाजी लगाकर 36 घंटे तक वहां एक अस्पताल के तहखाने में शरण ली। बाहर पुलिस गोलियां चला रही थी, लेकिन किसी भी कार सेवक का हौसला पस्त नहीं हुआ।

 

सभी लोग रामलला के नाम से अयोध्या जाने के लिए उतावले थे। अयोध्या दर्शन के उपरांत वापसी के समय जेब खाली हो चुकी थी। ऐसे में लोगों ने भी सहयोग किया। कहीं ट्रक तो कहीं बसों व कहीं रेल में बिना टिकट सफर कर महेंद्रगढ़ वापस पहुंचे थे। उसी दिन से मन में हमेशा श्रीराम मंदिर का ख्याल रहता था।

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