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महेंद्रगढ़ के साथ लगते गांव सोहली में आया बारिश का पानी
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गांव सोहली में घर में भरा पानी।
- फोटो : Narnol
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जिले के साथ लगते राजस्थान के गांव सोहली में शुक्रवार को अचानक बारिश का पानी आ गया। जिससे गांव में करीब आठ-आठ फुट पानी भर गया तथा घरों मे चार-चार फुट पानी चला गया। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए गांव ग्रामीण छतों पर चढ़ गए। पानी की वजह से लगभग 200 घर प्रभावित हो गए। घरों के अंदर रखे गेहूं तथा पशु चारा पानी में बह गया। इसके अलावा खेतों में भी पानी भर गया जिससे किसानों की लाखों रुपये की फसल बर्बाद हो गई। इस मौके पर बुहाना के विधायक सुभाष पुनिया प्रशासन की ओर से तहसीलदार, बीडीपीओ कृष्ण कुमार चावला, प्रधान हरि कृष्ण यादव ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया तथा ग्रामीणों को सर्वे करवाकर मुआवजा दिलाये जाने का आश्वासन दिया।
इस मौके पर ग्रामीण बलबीर सिंह, नंदलाल, कंवर सिंह, महेंद्र, धन्नाराम, राजकुमार, बिल्लु और शेर सिंह आदि ने बताया कि रात एक बजे से सुबह सात बजे तक लगातार तेज बारिश हुई थी। लगभग पांच बजे गांव कलोठड़ा, निहालपुर, ब्रिजपुरा, घसेड़ा, मांढी की पहाड़ियों का पानी गांव में आ गया। धीरे-धीरे पानी का जलस्तर बढ़ता चला गया। पानी मकानों के अंदर भी घूस गया। उसके बाद भी पानी रूका नहीं। घरों के अंदर चार-चार फुट तथा गांव के गलियों में आठ-आठ फुट पानी भर गया। मजबूरी लोग छतों पर चढ़ गए। ग्रामीणों ने गांव को बचाने के लिए पानी खेतों में खोल दिया। उसके बाद लगभग 11 बजे बाद गांव में पानी कम होना शुरू हुआ। शाम पांच बजे तक पानी दो-दो फुट पर रह गया था। पानी निकलने के बाद घरों में एक से डेढ़ फुट मिट्टी जमा हो गई। सूचना मिलने पर मौके पर पुलिस प्रशासन भी पहुंचाया। इसके बाद तहसीलदार, बीडीपीओ तथा प्रधान भी पहुंचे। बुहाना के तहसीलदार ने लोगों को आश्वासन दिया कि वो दो से तीन में पटवारी से सर्वे करवाएंगे। उसके बाद सरकार को मुआवजे के लिए अपनी रिपोर्ट भेज देंगे।
सुबह के समय पानी कम था। प्राथमिक चिकित्सा केंद्र पर महिला चिकित्सक पहुंच गई थी। उसके बाद पानी ज्यादा बढ़ने लगा और अस्पताल के अंदर पानी घूस गया। ग्रामीणों ने ट्रैक्टर के माध्यम से चिकित्सक को बाहर निकाला। इसके अलावा अस्पताल की चहार दीवारी, स्कूल ग्राउंड की चहार दीवारी, पंचायत भवन की चहारदीवारी टूट गई।
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गांव में लगभग 600 घरों की आबादी है। पानी आ जाने से लगभग 200 घर प्रभावित हो गए। लोगों का खाने पीने का सामान तथा पशुओं का चारा पानी में बह गया। शाम के समय लोगों ने रोटियां बनाने के लिए दूसरों से आटा लेना पड़ा। इसी प्रकार पशुओं चारे की सबसे बड़ी समस्या पैदा हो गई। शाम का चारा इधर-उधर से लेकर पशुओं का डाला गया। लगभग 100 घरों में दरारें आ गईं तथा 8 से 10 घर बिल्कुल डेमेज हो गई।
गांव के बुजुर्गों ने बताया कि मांढी की पहाड़ी का पानी गांव में आता है। ऐसी ही बाढ़ लगभग 70 वर्ष पहले आई थी। उस समय इतना नुकसान नहीं हो पाया था। लगभग आठ से दस घर ही प्रभावित हुए थे। पानी का जलस्तर लगभग दो फुट तक ही थी।
गांव सोहली का पानी खेतों के रास्ते महेंद्रगढ़ के गांव दूूलोठ की सीम तक पहुंच गया। गांव की तरफ पानी आता देखकर दूलोठ गांव के ग्रामीण अलर्ट हो गए। इस दौरान लोगों ने ट्रैक्टरों से मिट्टी मंगवा कर घरों के चारों लगवा दी ताकि मकान की नींव में पानी न जाए। गांव में चौकीदार की ओर से दूूलोठ में पानी की सूचना को लेकर गलियों में जा जाकर आवाज भी मारी। इसकी एक वीडियो भी वायरल हो रही है।
आज गांव में आठ-आठ फुट पानी आया है। पानी कम होने पर ऊंचाई मापी भी गई है। पानी की वजह से ग्रामीणों को काफी नुकसान हो गया है। बाढ़ से 200 घर प्रभावित हुए हैं। नुकसान की भरपाई से प्रशासन से गुहार लगाई गई है।
- राजेश कुमार, सरपंच प्रतिनिधि, गांव सोहली।
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इस मौके पर ग्रामीण बलबीर सिंह, नंदलाल, कंवर सिंह, महेंद्र, धन्नाराम, राजकुमार, बिल्लु और शेर सिंह आदि ने बताया कि रात एक बजे से सुबह सात बजे तक लगातार तेज बारिश हुई थी। लगभग पांच बजे गांव कलोठड़ा, निहालपुर, ब्रिजपुरा, घसेड़ा, मांढी की पहाड़ियों का पानी गांव में आ गया। धीरे-धीरे पानी का जलस्तर बढ़ता चला गया। पानी मकानों के अंदर भी घूस गया। उसके बाद भी पानी रूका नहीं। घरों के अंदर चार-चार फुट तथा गांव के गलियों में आठ-आठ फुट पानी भर गया। मजबूरी लोग छतों पर चढ़ गए। ग्रामीणों ने गांव को बचाने के लिए पानी खेतों में खोल दिया। उसके बाद लगभग 11 बजे बाद गांव में पानी कम होना शुरू हुआ। शाम पांच बजे तक पानी दो-दो फुट पर रह गया था। पानी निकलने के बाद घरों में एक से डेढ़ फुट मिट्टी जमा हो गई। सूचना मिलने पर मौके पर पुलिस प्रशासन भी पहुंचाया। इसके बाद तहसीलदार, बीडीपीओ तथा प्रधान भी पहुंचे। बुहाना के तहसीलदार ने लोगों को आश्वासन दिया कि वो दो से तीन में पटवारी से सर्वे करवाएंगे। उसके बाद सरकार को मुआवजे के लिए अपनी रिपोर्ट भेज देंगे।
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सुबह के समय पानी कम था। प्राथमिक चिकित्सा केंद्र पर महिला चिकित्सक पहुंच गई थी। उसके बाद पानी ज्यादा बढ़ने लगा और अस्पताल के अंदर पानी घूस गया। ग्रामीणों ने ट्रैक्टर के माध्यम से चिकित्सक को बाहर निकाला। इसके अलावा अस्पताल की चहार दीवारी, स्कूल ग्राउंड की चहार दीवारी, पंचायत भवन की चहारदीवारी टूट गई।
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गांव में लगभग 600 घरों की आबादी है। पानी आ जाने से लगभग 200 घर प्रभावित हो गए। लोगों का खाने पीने का सामान तथा पशुओं का चारा पानी में बह गया। शाम के समय लोगों ने रोटियां बनाने के लिए दूसरों से आटा लेना पड़ा। इसी प्रकार पशुओं चारे की सबसे बड़ी समस्या पैदा हो गई। शाम का चारा इधर-उधर से लेकर पशुओं का डाला गया। लगभग 100 घरों में दरारें आ गईं तथा 8 से 10 घर बिल्कुल डेमेज हो गई।
गांव के बुजुर्गों ने बताया कि मांढी की पहाड़ी का पानी गांव में आता है। ऐसी ही बाढ़ लगभग 70 वर्ष पहले आई थी। उस समय इतना नुकसान नहीं हो पाया था। लगभग आठ से दस घर ही प्रभावित हुए थे। पानी का जलस्तर लगभग दो फुट तक ही थी।
गांव सोहली का पानी खेतों के रास्ते महेंद्रगढ़ के गांव दूूलोठ की सीम तक पहुंच गया। गांव की तरफ पानी आता देखकर दूलोठ गांव के ग्रामीण अलर्ट हो गए। इस दौरान लोगों ने ट्रैक्टरों से मिट्टी मंगवा कर घरों के चारों लगवा दी ताकि मकान की नींव में पानी न जाए। गांव में चौकीदार की ओर से दूूलोठ में पानी की सूचना को लेकर गलियों में जा जाकर आवाज भी मारी। इसकी एक वीडियो भी वायरल हो रही है।
आज गांव में आठ-आठ फुट पानी आया है। पानी कम होने पर ऊंचाई मापी भी गई है। पानी की वजह से ग्रामीणों को काफी नुकसान हो गया है। बाढ़ से 200 घर प्रभावित हुए हैं। नुकसान की भरपाई से प्रशासन से गुहार लगाई गई है।
- राजेश कुमार, सरपंच प्रतिनिधि, गांव सोहली।

गांव में भरे पानी में से जाते ग्रामीण।- फोटो : Narnol