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Mahendragarh-Narnaul News: तकनीक का उपयोग समय से पहले युवाओं में ला रहा बुढ़ापा

Fri, 13 Oct 2023 12:17 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 13 Oct 2023 12:17 AM IST
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Use of technology is causing premature aging of youth
महेंद्रगढ़। आधुनिक युग में तकनीक के उपयोग के कारण शरीर में लगातार घट रहे टेलोमियर के कारण युवाओं में समय से पहले ही बुढ़ापा दिखने लगा है, जो भविष्य के लिए चिंता है। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय(हकेंवि) के जैव रसायन के विभागाध्यक्ष डॉ. पवन मौर्य की ओर से किए जा रहे शोध में यह खुलासा हुआ है। अब पवन मौर्य शोध के माध्यम से ऐसी तकनीक या दवाओं की खोज कर रहे हैं, जिससे समय से पहले शरीर में टेलोमियर कम होना शुरू न हो।
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वर्तमान में तेजी से बढ़ रहा तकनीक का उपयोग

आधुनिक युग में हर कार्य तकनीक पर आधारित हो गया है। दैनिक कार्याें में मोबाइल से लेकर चिकित्सा सहित विभिन्न क्षेत्र में तकनीक का बोलबाला है। एक तरफ जहां तकनीक ने काम को सुगम बनाया है। वहीं, इसके मानव जीवन पर भी कई नाकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं। तकनीक के उपयोग के कारण हमारे शरीर में टेलोमियर तेजी से कम होता जा रहा है। हकेंवि के जैव रसायन विज्ञान के विभागाध्यक्ष पिछले नौ सालों से इसी पर शोध कार्य में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया की हमारे डीएनए में टेलोमियर पाया जाता है। यह उम्र बढ़ने के साथ कम होता रहता है। इसी के कारण बुढ़ापा नजर आने लगता है। तकनीक के उपयोग के कारण यह तेजी से कम हो रहा है, जिसके कारण युवा जल्दी बूढ़े नजर आने लगते हैं। समय से पहले टेलोमियर का कम होना अति चिंतनीय है। इसको लेकर शोध कार्य जारी है। वहीं इस समस्या से जुड़े शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि शोध के माध्यम से ऐसी तकनीक या दवाओं का पता कर रहे हैं, जिससे की टेलोमियर समय से पहले कम होना शुरू न हो।
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कई देशों में शोध कर चुके डॉ. मौर्य



जैव रसायन विभाग से जुड़े डॉक्टर पवन मौर्य 93 शोध पत्र लिख चुके हैं। इसके अलावा ब्राजील, ताईवान, यूएस, सिंगापुर सहित 4 देशों में शोध कार्य कर चुके हैं। इसी विषय से जुड़ी हुई उनके द्वारा लिखी गई 11 पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं। वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली की ओर से शोध कार्य के लिए उन्हें 48 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया है।
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तकनीक के उपयोग से लगातार बढ़ रही यह बीमारियां

डॉ. पवन मौर्य ने बताया कि तकनीक के उपयोग के कारण सिजोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर व डिप्रेशन की समस्या भी उत्पन्न हो रही हैं। सिजोफ्रेनिया, बाइपोलर व डिसऑर्डर की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति खुशी में रहते हुए एकदम से आक्रामक हो जाता है। इसके कारण पिछले कुछ समय के दौरान अपराध की घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। कोविड के दौरान अत्याधिक तकनीक का उपयोग हुआ है, जिसके कारण यह समस्या भी तेजी से बढ़ रही है। मोबाइल, लैपटॉप, एक्से, अल्ट्रासाउंड सहित चिकित्सा के क्षेत्र में अधिक तकनीक का प्रयोग हो रहा है। हालांकि अभी तक के शोध में कुछ दवाओं की खोज की गई है जो इसे नियंत्रित करने में काफी हद तक कामयाब हैं। वहीं, अभी शोध जारी है।
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