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मंढ़ियाली कांड की बरसी पर बारड़ा में श्रद्धांजलि सभा आज, होंगी खेलकूद प्रतियोगिताएं
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बारड़ा के शहीद स्मारक में लगी प्रतिमा
- फोटो : Narnol
सतनाली मंडी। वर्ष 1997 के बहुचर्चित मंढियाली गोलीकांड में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार को गांव बारड़ा में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। किसान संघर्ष समिति बारड़ा प्रधान कैप्टन सूबे सिंह ने बताया कि शहीद स्मारक परिसर में आयोजित सभा में अनेक किसान संगठनों के पदाधिकारी व स्थानीय नेता भाग लेंगे।
किसान संघर्ष समिति पावर हाउस बारड़ा के महासचिव करतार सिंह ने बताया कि शहीदी दिवस पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। इस दौरान 100, 400 व 800 मीटर की महिला ओपन दौड़, 14 वर्ष के कम आयुवर्ग के लड़कों की 100 मीटर दौड़, 100 मीटर से 1600 मीटर की ओपन दौड़ व बुजुर्गों की 100 मीटर दौड़ प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके अलावा लड़कों व लड़कियों की कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा। बता दें कि गांव बारड़ा में मंढियाली गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर वर्ष 10 अक्तूबर को सभा आयोजित की जाती है। सभा में अनेक किसान नेता, संगठन व स्थानीय नेता भाग लेते हैं।
- यह था मंढ़ियाली कांड:
क्षेत्र के किसान फसल के सीजन के समय में जले हुए बिजली के ट्रांसफार्मरों को बदलवाने तथा बिजली बिल को लेकर तत्कालीन सरकार से मांग कर रहे थे। सरकार से कोई सकारात्मक सहयोग नहीं मिलने पर किसानों ने अपनी समस्या को लेकर बारड़ा पावर हाउस पर 1 सितंबर 1997 को पंचायत की और एक दिन का सांकेतिक धरना दिया। इसके बाद 13 सितंबर 1997 को बारड़ा पावर हाउस के सामने दोबारा पंचायत बुलाई। समस्या का समाधान नहीं होने पर गुस्साए किसानों ने सतनाली-महेंद्रगढ़ मुख्यमार्ग को बारड़ा टी-प्वाइंट पर जाम कर दिया। यह कार्यक्रम 18 दिन चला लेकिन सरकार की तरफ से कोई भी अधिकारी किसानों की समस्या सुनने के लिए नहीं पहुंचा। किसानों ने 30 सितंबर 1997 को महेंद्रगढ़ के राव तुलाराम चौक तीसरी बार पंचायत बुलाई और इसके बाद मंढिय़ाली गांव में रेवाड़ी-सादुलपुर रेल ट्रैक जाम कर धरने पर बैठ गए।
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यह आंदोलन 69 दिन चला था और उस समय का यह रेलवे के इतिहास का रेल रोकने का सबसे बड़ा आंदोलन रहा था। इस दौरान रेवाड़ी से सादुलपुर तक रेल यातायात पूर्ण रूप से बाधित रहा था। 10 अक्तूबर को मंढिय़ाली में रेल ट्रैक पर धरने पर बैठे किसान तथा पुलिस में संघर्ष हुआ। इसी बीच पुलिस द्वारा किसानों को खदेड़ने के लिए हवाई फायर किए थे।
- पांच किसानों को लगी थी गोली
इस आंदोलन में बारड़ा के महेंद्र सिंह व वेदप्रकाश, मंढिय़ाली के मनीराम, माधोगढ़ के अमरचंद तथा गोपालवास के धर्मवीर पुलिस की गोलियों का शिकार हो गए थे। इसके बाद से गांव बारड़ा में बने शहीद स्मारक पर प्रतिवर्ष 10 अक्तूबर को मंढिय़ाली गोलीकांड में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
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किसान संघर्ष समिति पावर हाउस बारड़ा के महासचिव करतार सिंह ने बताया कि शहीदी दिवस पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। इस दौरान 100, 400 व 800 मीटर की महिला ओपन दौड़, 14 वर्ष के कम आयुवर्ग के लड़कों की 100 मीटर दौड़, 100 मीटर से 1600 मीटर की ओपन दौड़ व बुजुर्गों की 100 मीटर दौड़ प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके अलावा लड़कों व लड़कियों की कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा। बता दें कि गांव बारड़ा में मंढियाली गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर वर्ष 10 अक्तूबर को सभा आयोजित की जाती है। सभा में अनेक किसान नेता, संगठन व स्थानीय नेता भाग लेते हैं।
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- यह था मंढ़ियाली कांड:
क्षेत्र के किसान फसल के सीजन के समय में जले हुए बिजली के ट्रांसफार्मरों को बदलवाने तथा बिजली बिल को लेकर तत्कालीन सरकार से मांग कर रहे थे। सरकार से कोई सकारात्मक सहयोग नहीं मिलने पर किसानों ने अपनी समस्या को लेकर बारड़ा पावर हाउस पर 1 सितंबर 1997 को पंचायत की और एक दिन का सांकेतिक धरना दिया। इसके बाद 13 सितंबर 1997 को बारड़ा पावर हाउस के सामने दोबारा पंचायत बुलाई। समस्या का समाधान नहीं होने पर गुस्साए किसानों ने सतनाली-महेंद्रगढ़ मुख्यमार्ग को बारड़ा टी-प्वाइंट पर जाम कर दिया। यह कार्यक्रम 18 दिन चला लेकिन सरकार की तरफ से कोई भी अधिकारी किसानों की समस्या सुनने के लिए नहीं पहुंचा। किसानों ने 30 सितंबर 1997 को महेंद्रगढ़ के राव तुलाराम चौक तीसरी बार पंचायत बुलाई और इसके बाद मंढिय़ाली गांव में रेवाड़ी-सादुलपुर रेल ट्रैक जाम कर धरने पर बैठ गए।
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यह आंदोलन 69 दिन चला था और उस समय का यह रेलवे के इतिहास का रेल रोकने का सबसे बड़ा आंदोलन रहा था। इस दौरान रेवाड़ी से सादुलपुर तक रेल यातायात पूर्ण रूप से बाधित रहा था। 10 अक्तूबर को मंढिय़ाली में रेल ट्रैक पर धरने पर बैठे किसान तथा पुलिस में संघर्ष हुआ। इसी बीच पुलिस द्वारा किसानों को खदेड़ने के लिए हवाई फायर किए थे।
- पांच किसानों को लगी थी गोली
इस आंदोलन में बारड़ा के महेंद्र सिंह व वेदप्रकाश, मंढिय़ाली के मनीराम, माधोगढ़ के अमरचंद तथा गोपालवास के धर्मवीर पुलिस की गोलियों का शिकार हो गए थे। इसके बाद से गांव बारड़ा में बने शहीद स्मारक पर प्रतिवर्ष 10 अक्तूबर को मंढिय़ाली गोलीकांड में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि दी जाती है।