{"_id":"6a3590e0777629149a0498b7","slug":"toiletoilet-system-in-shambles-work-orders-worth-lakhs-prove-ineffectiveh-lakhs-prove-ineffective-narnol-news-c-203-1-sroh1010-127521-2026-06-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: शौचालय व्यवस्था चरमराई लाखों का वर्क ऑर्डर बेअसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: शौचालय व्यवस्था चरमराई लाखों का वर्क ऑर्डर बेअसर
विज्ञापन
फोटो संख्या:69- लोक निर्माण विश्राम गृह के नजदीक शौचालय के लगा ताला--संवाद
- फोटो : 1
महेंद्रगढ़। शहर में सार्वजनिक सुविधा के लिए बनाए गए पांच शौचालय आज बदहाल स्थिति में पड़े हैं। नगर पालिका ने इनके रखरखाव के लिए मई माह में 28.32 लाख रुपये का वर्क ऑर्डर जारी किया था और दो साल के लिए एक निजी एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
करीब 50 हजार की आबादी वाले शहर और मुख्य बाजारों में आने वाले ग्रामीणों की सुविधा के लिए ये शौचालय बनाए गए थे लेकिन देखरेख की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के चलते ये पूरी तरह अनुपयोगी स्थिति में पहुंच गए हैं। कई शौचालयों पर ताले लगे हुए हैं और अभी तक काम शुरू भी नहीं हो पाया है।
पहले भी इनके रखरखाव के लिए निजी एजेंसी नियुक्त की गई थी लेकिन निगरानी के अभाव में व्यवस्था बिगड़ती चली गई। समय के साथ नल टूट गए, पानी की टंकियां गायब हो गईं और शौचालय उपयोग के लायक नहीं रहे।
विज्ञापन
टेंडर की शर्तों के अनुसार एजेंसी को तीन शिफ्टों में 35 कर्मचारियों की तैनाती करनी थी। साथ ही नियमित सफाई, पानी की सुविधा और मरम्मत का काम भी करना था। शर्तों का पालन न होने पर टेंडर रद्द करने का प्रावधान भी है।
इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। आम लोगों, खासकर महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें या तो निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ता है या फिर अन्य विकल्प ढूंढने पड़ते हैं। स्थानीय लोगों ने जल्द व्यवस्था सुधारने की मांग की है।
विज्ञापन
करीब 50 हजार की आबादी वाले शहर और मुख्य बाजारों में आने वाले ग्रामीणों की सुविधा के लिए ये शौचालय बनाए गए थे लेकिन देखरेख की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के चलते ये पूरी तरह अनुपयोगी स्थिति में पहुंच गए हैं। कई शौचालयों पर ताले लगे हुए हैं और अभी तक काम शुरू भी नहीं हो पाया है।
विज्ञापन
पहले भी इनके रखरखाव के लिए निजी एजेंसी नियुक्त की गई थी लेकिन निगरानी के अभाव में व्यवस्था बिगड़ती चली गई। समय के साथ नल टूट गए, पानी की टंकियां गायब हो गईं और शौचालय उपयोग के लायक नहीं रहे।
विज्ञापन
टेंडर की शर्तों के अनुसार एजेंसी को तीन शिफ्टों में 35 कर्मचारियों की तैनाती करनी थी। साथ ही नियमित सफाई, पानी की सुविधा और मरम्मत का काम भी करना था। शर्तों का पालन न होने पर टेंडर रद्द करने का प्रावधान भी है।
इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। आम लोगों, खासकर महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें या तो निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ता है या फिर अन्य विकल्प ढूंढने पड़ते हैं। स्थानीय लोगों ने जल्द व्यवस्था सुधारने की मांग की है।

फोटो संख्या:69- लोक निर्माण विश्राम गृह के नजदीक शौचालय के लगा ताला--संवाद- फोटो : 1