फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   Three years ago, the accident took away the father's shadow from the heads of three girls

तीन वर्ष पूर्व हादसे ने छीना तीन बच्चियों के सिर से पिता का साया

Thu, 17 Feb 2022 12:05 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 17 Feb 2022 12:05 AM IST
विज्ञापन
Three years ago, the accident took away the father's shadow from the heads of three girls
वाहन चलाते समय कई बार की गई थोड़ी सी लापरवाही भी परिवारों को जीवनभर का दर्द दे जाती है। परिवार लाख प्रयासों के बावजूद भी हादसों में जाने वालों की कमी को पूरा नहीं कर पाते। ऐसा ही एक हादसा तीन वर्ष पूर्व गांव अगिहार निवासी अजीत सिंह के साथ अपने ससुराल गांव किशनपुरा जाते समय गांव रामबास के नजदीक जुलाई 27 को हुआ था। हादसे में 27 वर्षीय अजीत सिंह की मौत हो गई थी जिसके बाद तीन बच्चियों के सिर से पिता का साया उठ गया था।
विज्ञापन

उस समय अजीत सिंह के पीछे उनकी 12 वर्षीय बेटी मुस्कान, सात वर्षीय खुशी व चार वर्षीय देविका तीन बेटियां व 23 वर्षीय पत्नी कृष्णा देवी थी। अचानक हुए इस हादसे के बाद मृतक अजीत के बड़े भाई भंवर सिंह व माता कोशल्या देवी तथा मृतक की पत्नी कृष्णा ने बड़े संघर्षों के बाद बेटियों को विद्यालय तक भेजकर पढ़ाई शुरू कराई है। मृतक अजीत एक निजी कंपनी में कार्यरत था तथा परिवार की हर जरूरतों को पूरा करता था।
विज्ञापन

न बरतें लापरवाही
वाहन चलाते समय किसी भी प्रकार की थोड़ी सी लापरवाही जीवनभर परिवारों को दर्द देती है। लाख प्रयासों के बाद इन हादसों को उबरने में बड़ा समय लगता है। बेटा जिस दिन सुबह घर ससुराल गया था उसे हेलमेट लेकर भेजा था लेकिन आगे से आ रहे बाइक सवार की लापरवाही ने तीन बेटियों के सिर से पिता का साया छीन लिया। वाहन चलते समय कभी भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

-कौशल्या देवी।
तीन वर्ष करना पड़ा है बेटियों के लिए संघर्ष
हादसे में अजीत के जाने के बाद सास कौशल्या व उनके बड़े भाई ने पूरी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने परिवार व खुद को संभाला तथा बेटियों को स्कूल भेजा। अब बड़ी बेटी मुस्कान सातवीं, खुशी पांचवीं तथा छोटी बेटी देविका पहली कक्षा में पढ़ रही है। शायद हादसे के दौरान सामने से आने वाले बाइक सवार लापरवाही न करते तो आज अजीत परिवार के साथ होता।
-कृष्णा देवी।
जिम्मेदारी संभालने के लिए करना पड़ा है संघर्ष
अजीत के जाने के बाद उसकी पत्नी सहित तीन बेटियों, व अपने दो बच्चों के साथ-साथ परिवार की अचानक मिली जिम्मेदारी को निभाने के लिए बड़ा संघर्ष करना पड़ा है। हादसों में जाने वाले चले जाते हैं लेकिन उनकी कमी को पूरा नहीं किया जा सकता। खेती बाड़ी कर पांच बच्चों व मां सहित नौ सदस्यों के परिवार को पूरी जिम्मेदारी के साथ संभालने का प्रयास किया है।

-भंवर सिंह।
-यातायात नियमों का पालन कर रोके जा सकते हैं 80 प्रतिशत हादसे
वाहन चलाते समय यातायात नियमों की पूरी ईमानदारी से पालन किया जाए तो सड़क हादसों में 80 प्रतिशत तक की कई लाई जा सकती है। इसके लिए यातायात पुलिस द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर वाहन चालकों को जागरूक किया जाता है। यातायात नियमों का पालन करके ही सुरक्षित यात्रा की जा सकती है। थोड़ी सी लापरवाही के कारण भी बड़े हादसे हो जाते हैं। सावधानियां बरतने से सुरक्षित यात्रा संभव है।
-जगवंत सिंह श्योराण, यातायात प्रभारी, महेंद्रगढ़।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed