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Mahendragarh-Narnaul News: 24 साल बाद दो धुरंधरों के बीच नहीं होगी चुनावी जंग
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फोटो संख्या:71- पूर्व शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा--संवाद
मनोज राजपूत
महेंद्रगढ़। महेंद्रगढ़ विधान सभा सीट पर 24 सालों के बाद इस बार दो धुरंधरों के बीच मुकाबला नहीं होगा। महेंद्रगढ़ सीट से पांच बार विधायक बने कद्दावर नेता प्रो. रामबिलास शर्मा व कांग्रेस के धुरंधर के रूप में चार बार विधान सभा से चुनाव जीने वाले राव दान सिंह के बीच इस बार मुकाबला नहीं होगा।
वर्ष 2000 के चुनावों से 2019 तक हुए चार चुनावों में कांग्रेस व भाजपा के यह दोनों धुरंधर मैदान में रहते थे तथा एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देते रहे हैं, लेकिन इस बार भाजपा की ओर से प्रो. रामबिलास शर्मा को टिकट नहीं दिया गया। चार बार महेंद्रगढ़ से विधायक बनकर प्रदेश में अपनी अच्छी पकड़ रखने वाले राव दान सिंह पर कांग्रेस ने इस बार भी दाव खेला है।
रामबिलास और रावदान में इस तरह चली चुनावी जंग
प्रदेश में भाजपा के पितामह कहे जाने वाले प्रो. रामबिलास शर्मा ने वर्ष 1982 में पहली बार महेंद्रगढ़ विधान सभा से कमल खिलाया था। इसके बाद वर्ष 1987, 1991, 1996 में लगातार चुनाव जीतकर प्रो. रामबिलास शर्मा ने जीत की हैट्रिक लगाई । वर्ष 2000 में विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी के रूप में पहली बार मैदान में उतरे राव दान सिंह ने भी 2000 के चुनावों में भाजपा को टक्कर देते हुए जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2004 व 2009 का चुनाव जीतकर हैट्रिक लगाई। वर्ष 2013 में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद 2014 में हुए चुनावों में प्रो. रामबिलास शर्मा फिर से मैदान में कमल खिलने में सफल रहे थे। वर्ष 2019 में हुए विधान सभा चुनावों में भाजपा लहर के बावजूद राव दान सिंह ने प्रो. रामबिलास शर्मा को पटखनी देते हुए कांग्रेस का परचम लहराया था।
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महेंद्रगढ़। महेंद्रगढ़ विधान सभा सीट पर 24 सालों के बाद इस बार दो धुरंधरों के बीच मुकाबला नहीं होगा। महेंद्रगढ़ सीट से पांच बार विधायक बने कद्दावर नेता प्रो. रामबिलास शर्मा व कांग्रेस के धुरंधर के रूप में चार बार विधान सभा से चुनाव जीने वाले राव दान सिंह के बीच इस बार मुकाबला नहीं होगा।
वर्ष 2000 के चुनावों से 2019 तक हुए चार चुनावों में कांग्रेस व भाजपा के यह दोनों धुरंधर मैदान में रहते थे तथा एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देते रहे हैं, लेकिन इस बार भाजपा की ओर से प्रो. रामबिलास शर्मा को टिकट नहीं दिया गया। चार बार महेंद्रगढ़ से विधायक बनकर प्रदेश में अपनी अच्छी पकड़ रखने वाले राव दान सिंह पर कांग्रेस ने इस बार भी दाव खेला है।
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रामबिलास और रावदान में इस तरह चली चुनावी जंग
प्रदेश में भाजपा के पितामह कहे जाने वाले प्रो. रामबिलास शर्मा ने वर्ष 1982 में पहली बार महेंद्रगढ़ विधान सभा से कमल खिलाया था। इसके बाद वर्ष 1987, 1991, 1996 में लगातार चुनाव जीतकर प्रो. रामबिलास शर्मा ने जीत की हैट्रिक लगाई । वर्ष 2000 में विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी के रूप में पहली बार मैदान में उतरे राव दान सिंह ने भी 2000 के चुनावों में भाजपा को टक्कर देते हुए जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2004 व 2009 का चुनाव जीतकर हैट्रिक लगाई। वर्ष 2013 में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद 2014 में हुए चुनावों में प्रो. रामबिलास शर्मा फिर से मैदान में कमल खिलने में सफल रहे थे। वर्ष 2019 में हुए विधान सभा चुनावों में भाजपा लहर के बावजूद राव दान सिंह ने प्रो. रामबिलास शर्मा को पटखनी देते हुए कांग्रेस का परचम लहराया था।
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