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Mahendragarh-Narnaul News: जैन मंदिर में अभिषेक और शांतिधारा के दर्शन करने की लगी रही कतार
Thu, 12 Sep 2024 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 12 Sep 2024 11:51 PM IST
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फोटो नंबर-35दसलक्षण महापर्व में भाग लेते जैन समाज के लोग। स्त्रोत-स्वयं
नारनौल। उत्तम सत्य धर्म के साथ शुरू दिगंबर जैन समाज के दस लक्षण पर्व वीरवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। इसे लेकर सुबह से ही शहर के तीनों जैन मंदिरों में अभिषेक और शांतिधारा व दर्शन करने वालों की कतार लगी रही।
पांचवें दिन पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिरों में शांतिधारा करने का सौभाग्य सचिन जैन, विकास जैन कोटा को प्राप्त हुआ। आचार्य विज्ञान भूषण महाराज के सानिध्य में शांतिधारा व मंगल आरती कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर जैन समाज के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने बताया कि उत्तम सत्य धर्म का अर्थ मनुष्य अनेक कारणों से असत्य बोला करता है, उनमें से एक तो झूठ बोलने का प्रधान कारण लोभ है। लोभ में आकर मनुष्य अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए असत्य बोला करता है। असत्य भाषण करने का दूसरा कारण भय है। मनुष्य को सत्य बोलने से जब अपने ऊपर कोई आपत्ति आती हुई दिखाई देती है अथवा अपनी कोई हानि होती दिखती है। उस समय वह डर कर झूठ बोल देता है, झूठ बोलकर वह उस विपत्ति या हानि से बचने का प्रयत्न करता है। असत्य बोलने को तीसरा कारण मनोरंजन भी है।
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पांचवें दिन पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिरों में शांतिधारा करने का सौभाग्य सचिन जैन, विकास जैन कोटा को प्राप्त हुआ। आचार्य विज्ञान भूषण महाराज के सानिध्य में शांतिधारा व मंगल आरती कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर जैन समाज के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने बताया कि उत्तम सत्य धर्म का अर्थ मनुष्य अनेक कारणों से असत्य बोला करता है, उनमें से एक तो झूठ बोलने का प्रधान कारण लोभ है। लोभ में आकर मनुष्य अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए असत्य बोला करता है। असत्य भाषण करने का दूसरा कारण भय है। मनुष्य को सत्य बोलने से जब अपने ऊपर कोई आपत्ति आती हुई दिखाई देती है अथवा अपनी कोई हानि होती दिखती है। उस समय वह डर कर झूठ बोल देता है, झूठ बोलकर वह उस विपत्ति या हानि से बचने का प्रयत्न करता है। असत्य बोलने को तीसरा कारण मनोरंजन भी है।
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