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Mahendragarh-Narnaul News: शादी के 28 दिन बाद आ गया था बुलावा, रक्षाबंधन पर आने का बहनों से किया वादा रह गया अधूरा

Wed, 09 Jul 2025 09:34 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Wed, 09 Jul 2025 09:34 PM IST
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The invitation came 28 days after the wedding, the promise made to the sisters to come on Rakshabandhan remained unfulfilled
उन्हाणी गांव  में कारगिल शहीद परमिंद्र के साथ माता संतरा और पिता राजेंद्र सिंह--संवाद
इंद्रजीत शर्मा
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कनीना (महेंद्रगढ़)। आर्टलेरी रजिमेंट में सिपाही रहे उन्हाणी गांव के परमिंद्र को शादी के 28 दिन बाद ही सेना से बुलावा आ गया था। कारगिल युद्ध शुरू होते ही वे अपना बैग पैक कर बटालियन के लिए रवाना हो गए थे। परमिंद्र ने अपनी शहादत से एक सप्ताह पहले फोन पर अपनी दोनों बहनों को रक्षाबंधन पर घर आने का वादा किया था अफसोस परमिंद्र का वादा अधूरा रह गया।
शहीद की मां संतरा देवी व पिता पूर्व सैनिक राजेंद्र सिंह ने बताया कि परमिंद्र जनवरी 1999 में दो माह की छुट्टी लेकर घर आया था। उसकी 2 फरवरी 1999 को शादी हुई थी। परमिंद्र की शादी से 3 माह पहले दोनों बहनों उर्मिला व मंजू की शादी की थी।
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शादी के तुरंत बाद ही कारगिल युद्ध शुरू हो गया और सेना से बुलावा आ गया। परमिंद्र ने जाते हुए कहा था कि वह जल्द वापस आएगा लेकिन घरवालों को नहीं पता था कि वह हमेशा के लिए जा रहा है।
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मां और पिता ने बताया कि शहादत के बाद परमिंद्र की पत्नी सुमन अपने पिता के घर से केवल एक दिन के लिए आई थी। इसके बादआज तक कभी नहीं लौटी। मां को परमिंद्र की पेंशन का 30 प्रतिशत हिस्सा मिलता है, जिससे परिवार का गुजर बसर चल रहा है।



1997 में बीआरओ की खुली भर्ती में हुआ था सेना में चयन

परमिंद्र का लक्ष्य शुरू से ही भारतीय सेना में जाकर देशसेवा करने का था। 1997 में दादरी बीआरओ की खुली भर्ती में परमिंद्र का सेना में चयन हुआ था। कारगिल युद्ध में 21 जून को वह 17 हजार फीट की ऊंचाई पर दुश्मनाें के छक्के छुड़ाते हुए बलिदान हो गया था। शहीद का पार्थिव शरीर चार दिन बाद 24 जून को गांव पहुंचा तो क्षेत्र से हजारों की संख्या में लोगों ने नम आंखों से विदाई दी थी।

उन्हाणी गांव  में कारगिल शहीद परमिंद्र के साथ माता संतरा और पिता राजेंद्र सिंह--संवाद

उन्हाणी गांव  में कारगिल शहीद परमिंद्र के साथ माता संतरा और पिता राजेंद्र सिंह--संवाद

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