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Mahendragarh-Narnaul News: लाइब्रेरी की खामोशी से निकली सफलता की गूंज
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फोटो संख्या:58- गांव सीगड़ा निवासी संजय
महेंद्रगढ़/नारनौल। नीट का परिणाम वीरवार रात घोषित हो गया। इसके साथ हजारों अभ्यर्थियों के लंबे इंतजार, संघर्ष और उम्मीदों की कहानी भी सामने आईं हैं। किताबों से भरी लाइब्रेरी में घंटों तक एक ही सीट पर बैठकर, त्योहारों और आराम का त्याग कर इन छात्रों ने डॉक्टर बनने के सपने को जिंदा रखा।
वहीं, पुनः आयोजित हुई परीक्षा देने के बाद आए परिणाम ने कई छात्रों की वर्षों की तपस्या को सफलता में बदल दिया जबकि कुछ को अगली कोशिश के लिए फिर से हौसला जुटाना होगा। यह सिर्फ अंकों का परिणाम नहीं, बल्कि धैर्य, संघर्ष और अटूट विश्वास की कहानी है।
फार्मासिस्ट के बेटे संजय ने नीट में हासिल किए 604 अंक
महेंद्रगढ़ के गांव सिगड़ा निवासी संजय ने नीट में 604 अंक हासिल कर एमबीबीएस में प्रवेश की मजबूत दावेदारी पेश की है। उन्होंने सीकर में कोचिंग लेकर चार वर्षों तक लगातार तैयारी की। पहली बार 12वीं कक्षा के दौरान नीट देने वाले संजय ने तीसरे प्रयास में यह सफलता प्राप्त की। रोज आठ घंटे की नियमित पढ़ाई उनकी सफलता की कुंजी रही। उनके पिता रामनिवास महेंद्रगढ़ नागरिक अस्पताल में फार्मासिस्ट हैं और माता शर्मिला गृहिणी हैं। परिवार में डॉक्टर चाचा डॉ. कमल सिंह (बीएमएस) और चाची पूजा यादव से प्रेरणा लेकर संजय ने चिकित्सा क्षेत्र को अपना लक्ष्य बनाया।
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किसान मां की बेटी मुस्कान ने नीट में लाए 575 अंक
महेंद्रगढ़ के गांव आनावास की मुस्कान ने नीट में 575 अंक प्राप्त कर एमबीबीएस में प्रवेश का रास्ता बनाया है। उन्होंने सीकर में कोचिंग के साथ दो वर्षों तक नियमित और समर्पित तैयारी की। मुस्कान के पिता सतीश कुमार का कई वर्ष पहले निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां ममता ने खेती कर परिवार का पालन-पोषण किया और बेटी की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया। मां के संघर्ष और अपने अथक परिश्रम के दम पर मुस्कान ने यह सफलता हासिल की। वह अपने परिवार की पहली सदस्य हैं जिन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में कदम रखने की उपलब्धि हासिल की है।
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सुपरवाइजर ने बेटे ने नीट में पाई 2206वीं रैंक
नारनौल के गांव शहरपुर निवासी होनहार छात्र प्रिंस ने नीट के पहले प्रयास में 619 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक 5360 और ओबीसी वर्ग में 2206वीं रैंक हासिल की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों के मार्गदर्शन और नियमित मेहनत को दिया। प्रिंस के पिता संजय यादव नहर विभाग में सुपरवाइजर हैं जबकि माता सुनीता देवी गृहिणी हैं।
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वहीं, पुनः आयोजित हुई परीक्षा देने के बाद आए परिणाम ने कई छात्रों की वर्षों की तपस्या को सफलता में बदल दिया जबकि कुछ को अगली कोशिश के लिए फिर से हौसला जुटाना होगा। यह सिर्फ अंकों का परिणाम नहीं, बल्कि धैर्य, संघर्ष और अटूट विश्वास की कहानी है।
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फार्मासिस्ट के बेटे संजय ने नीट में हासिल किए 604 अंक
महेंद्रगढ़ के गांव सिगड़ा निवासी संजय ने नीट में 604 अंक हासिल कर एमबीबीएस में प्रवेश की मजबूत दावेदारी पेश की है। उन्होंने सीकर में कोचिंग लेकर चार वर्षों तक लगातार तैयारी की। पहली बार 12वीं कक्षा के दौरान नीट देने वाले संजय ने तीसरे प्रयास में यह सफलता प्राप्त की। रोज आठ घंटे की नियमित पढ़ाई उनकी सफलता की कुंजी रही। उनके पिता रामनिवास महेंद्रगढ़ नागरिक अस्पताल में फार्मासिस्ट हैं और माता शर्मिला गृहिणी हैं। परिवार में डॉक्टर चाचा डॉ. कमल सिंह (बीएमएस) और चाची पूजा यादव से प्रेरणा लेकर संजय ने चिकित्सा क्षेत्र को अपना लक्ष्य बनाया।
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किसान मां की बेटी मुस्कान ने नीट में लाए 575 अंक
महेंद्रगढ़ के गांव आनावास की मुस्कान ने नीट में 575 अंक प्राप्त कर एमबीबीएस में प्रवेश का रास्ता बनाया है। उन्होंने सीकर में कोचिंग के साथ दो वर्षों तक नियमित और समर्पित तैयारी की। मुस्कान के पिता सतीश कुमार का कई वर्ष पहले निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां ममता ने खेती कर परिवार का पालन-पोषण किया और बेटी की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया। मां के संघर्ष और अपने अथक परिश्रम के दम पर मुस्कान ने यह सफलता हासिल की। वह अपने परिवार की पहली सदस्य हैं जिन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में कदम रखने की उपलब्धि हासिल की है।
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सुपरवाइजर ने बेटे ने नीट में पाई 2206वीं रैंक
नारनौल के गांव शहरपुर निवासी होनहार छात्र प्रिंस ने नीट के पहले प्रयास में 619 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक 5360 और ओबीसी वर्ग में 2206वीं रैंक हासिल की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों के मार्गदर्शन और नियमित मेहनत को दिया। प्रिंस के पिता संजय यादव नहर विभाग में सुपरवाइजर हैं जबकि माता सुनीता देवी गृहिणी हैं।

फोटो संख्या:58- गांव सीगड़ा निवासी संजय

फोटो संख्या:58- गांव सीगड़ा निवासी संजय