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स्वैप मशीन बनी कमशीन खोरी का धंधा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 06 Jan 2017 11:34 PM IST
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नगर के बाजार में स्वैप मशीन कमीशन खोरी का धंधा बना हुआ है। यह कमशीन खोरी का धंधा पूरे शहर में चल रहा है। इसके अलावा चेक बाउंस होने पर भी दुकानदार हजारों रुपये चार्ज करे रहे हैं यानी डिजिटल लेनदेन का भी लोगों ने मिस यूज करना शुरू कर दिया है। यह मिस यूज स्वैप मशीनें नहीं पहुंचने के कारण ही हो रहा है। नगर के 150 दुकानदारों ने स्वैप मशीन के लिए अप्लाई किया हुआ है लेकिन किसी भी दुकानदार के प्रतिष्ठानों पर स्वैप मशीन नहीं लगी है। जिससे दुकानदारों को इसका हर्जाना भुगतना पड़ रहा है। दुकानदार एक दूसरे से 4 से 5 प्रतिशत कर के रुपये में चार्ज कर रहे हैं। जब इस संबंध में सेलस मैनेजर से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से कार्ड स्वैप करने पर 5 प्रतिशत कर का कोई प्रावधान नहीं है।
दुकानदार ऐसे कर रहे हैं ठगी
आपने अब तक दुकानदार द्वारा उपभोक्ता को ठगते हुए देखा है लेकिन अब दुकादार एक दूसरे को भी ठगने लगे हैं। इस ठगी का जरिया है स्वैप मशीन। स्वैप मशीन के अभाव में एक दुकानदार पड़ोस के दुकानदार से कार्ड स्वैप करवा रहे हैं। इससे स्वैप मशीन रखने वाले दुकानदार 5 प्रतिशत टैक्स के रूप में ले रहे हैं। यानी डेबिट कार्ड स्वैप करने पर दस हजार रुपये पर 500 रुपये लेते हैं जबकि इसका कर मात्र 115 रुपये ही लगता है। इस 5 प्रतिशत टैक्स का भय अन्य दुकानदार को भी हो गया जिससे वो स्वैप मशीनें लगवाने से डर रहे हैं। उनका मानना है कि यह कर दुकानदारों से कटेगा जिससे उनको नुकसान होगा लेकिन वास्तविकता यह कि यह भार उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
तीन तरह की होती हैं स्वैप मशीनें
स्वैप मशीनें तीन तरह की होती हैं। तीनों मशीनों का काम डेबिट कार्ड स्वैप करना ही होता है। लेकिन तीनों को चलाने का तरीका अलग-अलग होता है। एक स्वैप मशीन जीपीआरएस से चलती है जिसमें एक सिम कार्ड डाला जाता है। यह सिम कार्ड आपकों बैंक से ही मिलेगा। दूसरी स्वैप मशीन टेलीफोन लाइन से चलती है तथा तीसरी एंड्रायड मोबाइल से चलती है। तीनों ही मशीनों में इंटरनेट की आवश्यकता होती है।
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कार्ड स्वैप की यह है स्लैब प्रणाली
डेबिट कार्ड स्वैप करने की आरबीआई ने तीन स्लैप प्रणाली बनाई हुई है। इसी स्लैब प्रणाली के अनुसार उपभोक्ताओं को टैक्स अदा करना पड़ता है। एचडीएफसी सेल्स मार्केटिंग मैनेजर गुड़गांव बिसवा रंजन ने बताया कि डेबिट कार्ड से 1000 रुपये से नीचे खरीददारी करने पर 0.25 प्रतिशत, 1000 से 2000 तक 0.50 प्रतिशत तथा 2000 रुपये से अधिक 1 प्रतिशत मरचेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के रूप में कटता है। इसके अलावा एमडीआर पर 15 प्रतिशत सर्विस टैक्स भी लगेगा। एमडीआर के रूप में कटा पैसा विसा, मास्टर, रुपे आदि डेबिट कार्ड की कंपनियां चार्ज के रूप में वसूलती है जबकि क्रेडिट कार्ड की कोई स्लैप प्रणाली नहीं है। क्रेडिट कार्ड से 1 रुपये से लेकर हजारों रुपये तक सामान खरीदने पर 1.75 रुपये चार्ज के रूप में लगता है।
दस हजार रुपये पर इतना लगेगा टैक्स
अगर आपने किसी भी दुकानदार से दस हजार रुपये का सामान डेबिट कार्ड से खरीदा है। तो उस पर आपको दस हजार रुपये का एक प्रतिशत 100 रुपये एमडीआर का तथा 100 रुपये का 15 प्रतिशत यानी 15 रुपये सर्विस टैक्स के रूप में देने पड़ेंगे। यानी उपभोक्ताओं को दस हजार रुपये के अलावा 115 रुपये चार्ज के रूप में देने होंगे। अगर क्रेडिट कार्ड से खरीददारी करते हैं तो दस हजार रुपये पर 1.75 प्रतिशत के अनुसार 175 रुपये प्लस 175 का 15 प्रतिशत यानी 26.25 रुपये सर्विस टेक्स के रूप में देना होगा। यानी उपभोक्ता को दस हजार प्लस 201.25 रुपये देने होंगे।
चेक बाउंस पर यह सिस्टम
नोटबंदी के बाद कैश के अभाव में ग्राहक दुकानदारों से चेक से खरीददारी कर रहे हैं। ग्राहक का चेक बाउंस होने पर दुकान उनसे एक हजार रुपये 15 सौ रुपये चेक बाउंस के नाम का ले रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि एक लाख रुपये का चेक बाउंस होने पर अधिकतम 375 रुपये तथा एक लाख से ऊपर 575 रुपये चार्ज अधिकतम चार्ज लगता है जबकि इतनी ही राशि पर कम से कम 115 रुपये लगते हैं। यह फर्क स्थानीय शाखा एवं बाहर की शाखा के अनुसार है। अलग अलग बैंकों के चैक बाउंस पर अलग-अलग रेट चार्ज करते हैं लेकिन इनमें 50 रुपए से 100 रुपयेम के बीच का ही डिफ्रेंस है।
5 प्रतिशत कर का सरकार की ओर से कोई प्रावधान नहीं है। आरबीआई ने डेबिट कार्ड की स्लैप प्रणाली बनाई हुई हैं उसी अनुसार टैक्स कटता है। -बिसवा रंजन, सेल्स मार्केटिंग मैनेजर एचडीएफसी-गुरुग्राम
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दुकानदार ऐसे कर रहे हैं ठगी
आपने अब तक दुकानदार द्वारा उपभोक्ता को ठगते हुए देखा है लेकिन अब दुकादार एक दूसरे को भी ठगने लगे हैं। इस ठगी का जरिया है स्वैप मशीन। स्वैप मशीन के अभाव में एक दुकानदार पड़ोस के दुकानदार से कार्ड स्वैप करवा रहे हैं। इससे स्वैप मशीन रखने वाले दुकानदार 5 प्रतिशत टैक्स के रूप में ले रहे हैं। यानी डेबिट कार्ड स्वैप करने पर दस हजार रुपये पर 500 रुपये लेते हैं जबकि इसका कर मात्र 115 रुपये ही लगता है। इस 5 प्रतिशत टैक्स का भय अन्य दुकानदार को भी हो गया जिससे वो स्वैप मशीनें लगवाने से डर रहे हैं। उनका मानना है कि यह कर दुकानदारों से कटेगा जिससे उनको नुकसान होगा लेकिन वास्तविकता यह कि यह भार उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
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तीन तरह की होती हैं स्वैप मशीनें
स्वैप मशीनें तीन तरह की होती हैं। तीनों मशीनों का काम डेबिट कार्ड स्वैप करना ही होता है। लेकिन तीनों को चलाने का तरीका अलग-अलग होता है। एक स्वैप मशीन जीपीआरएस से चलती है जिसमें एक सिम कार्ड डाला जाता है। यह सिम कार्ड आपकों बैंक से ही मिलेगा। दूसरी स्वैप मशीन टेलीफोन लाइन से चलती है तथा तीसरी एंड्रायड मोबाइल से चलती है। तीनों ही मशीनों में इंटरनेट की आवश्यकता होती है।
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कार्ड स्वैप की यह है स्लैब प्रणाली
डेबिट कार्ड स्वैप करने की आरबीआई ने तीन स्लैप प्रणाली बनाई हुई है। इसी स्लैब प्रणाली के अनुसार उपभोक्ताओं को टैक्स अदा करना पड़ता है। एचडीएफसी सेल्स मार्केटिंग मैनेजर गुड़गांव बिसवा रंजन ने बताया कि डेबिट कार्ड से 1000 रुपये से नीचे खरीददारी करने पर 0.25 प्रतिशत, 1000 से 2000 तक 0.50 प्रतिशत तथा 2000 रुपये से अधिक 1 प्रतिशत मरचेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के रूप में कटता है। इसके अलावा एमडीआर पर 15 प्रतिशत सर्विस टैक्स भी लगेगा। एमडीआर के रूप में कटा पैसा विसा, मास्टर, रुपे आदि डेबिट कार्ड की कंपनियां चार्ज के रूप में वसूलती है जबकि क्रेडिट कार्ड की कोई स्लैप प्रणाली नहीं है। क्रेडिट कार्ड से 1 रुपये से लेकर हजारों रुपये तक सामान खरीदने पर 1.75 रुपये चार्ज के रूप में लगता है।
दस हजार रुपये पर इतना लगेगा टैक्स
अगर आपने किसी भी दुकानदार से दस हजार रुपये का सामान डेबिट कार्ड से खरीदा है। तो उस पर आपको दस हजार रुपये का एक प्रतिशत 100 रुपये एमडीआर का तथा 100 रुपये का 15 प्रतिशत यानी 15 रुपये सर्विस टैक्स के रूप में देने पड़ेंगे। यानी उपभोक्ताओं को दस हजार रुपये के अलावा 115 रुपये चार्ज के रूप में देने होंगे। अगर क्रेडिट कार्ड से खरीददारी करते हैं तो दस हजार रुपये पर 1.75 प्रतिशत के अनुसार 175 रुपये प्लस 175 का 15 प्रतिशत यानी 26.25 रुपये सर्विस टेक्स के रूप में देना होगा। यानी उपभोक्ता को दस हजार प्लस 201.25 रुपये देने होंगे।
चेक बाउंस पर यह सिस्टम
नोटबंदी के बाद कैश के अभाव में ग्राहक दुकानदारों से चेक से खरीददारी कर रहे हैं। ग्राहक का चेक बाउंस होने पर दुकान उनसे एक हजार रुपये 15 सौ रुपये चेक बाउंस के नाम का ले रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि एक लाख रुपये का चेक बाउंस होने पर अधिकतम 375 रुपये तथा एक लाख से ऊपर 575 रुपये चार्ज अधिकतम चार्ज लगता है जबकि इतनी ही राशि पर कम से कम 115 रुपये लगते हैं। यह फर्क स्थानीय शाखा एवं बाहर की शाखा के अनुसार है। अलग अलग बैंकों के चैक बाउंस पर अलग-अलग रेट चार्ज करते हैं लेकिन इनमें 50 रुपए से 100 रुपयेम के बीच का ही डिफ्रेंस है।
5 प्रतिशत कर का सरकार की ओर से कोई प्रावधान नहीं है। आरबीआई ने डेबिट कार्ड की स्लैप प्रणाली बनाई हुई हैं उसी अनुसार टैक्स कटता है। -बिसवा रंजन, सेल्स मार्केटिंग मैनेजर एचडीएफसी-गुरुग्राम