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बैंक में कैश के बाद स्वैप मशीनों का भी हुआ अभाव
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Dec 2016 12:03 AM IST
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नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से भले ही देश भर में प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन नगर के बैंकों के पास प्वाइंट ऑफ सेल (पॉस) स्वैप मशीनों का अभाव है। दुकानदारों ने पिछले एक सप्ताह से पॉस मशीनों के लिए बैंकों में अप्लाई किया हुआ है लेकिन अभी तक उनके प्रतिष्ठान पर पॉस मशीने नहीं लग पाई है जबकि दुकानदारों ने स्वैप मशीन के लिए अपने सभी दस्तावेज भी बैंक में जमा करवा दिए हैं। केंद्र सरकार ने बिजली मंत्रालय के अधीन काम करने वाली सार्वजनिक कंपनी ईईएसएल की तरफ से 10 लाख स्वैप मशीनों की खरीददारी के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। लेकिन वर्तमान हालात पर नजर डालें तो बैंक एवं एटीएम दोनों ही कैशलेस हो चुके हैं। न तो बैंक में कैश आ रहा और एटीएम भी खाली पड़े हैं। ऐसे में आमजन के अलावा दुकानदार एवं ग्राहकों को ही भारी परेशानी हो रही है।
पांच उपभोक्ता प्रतिदिन कर रहे आवेदन
इस समय शहर के दुकानदार एवं व्यापारी बैंकों में पॉस मशीन के लिए आवेदन कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में सभी बैंकों का मिलाकर पांच आवेदन पॉस मशीन के लिए बैंकों में जा रहे हैं। बैंक मैनेजर उनकी रिकवेस्ट हेड ऑफिस आईटी में भेज रहे हैं। अभी तक सभी बैंकों की मिलाकर पिछले कुछ दिनों में 50 से अधिक मशीनों के लिए आवेदन किए जा चुके हैं। लेकिन सरकारी बैंकों में से किसी ने भी एक मशीन प्रतिष्ठान पर नहीं लगाई है।
उधार की दुकानदारी बढ़ी
दुकानदार एवं व्यापारियों ने बताया कि नोटबंदी के बाद बाजार में मंदी आ गई है। लोगों के पास कैश का अभाव होने के कारण उधार में सामान लेकर जा रहे हैं। जिससे उधार की दुकानदारी बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त जो लोग चेक से सामान लेकर जा रहे हैं उनके चेक बाउस हो रहे हैं। इससे उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। इससे बचने के लिए पॉस मशीन के लिए बैंक में आवेदन किए हैं लेकिन अभी तक मशीने नहीं लग पाई हैं।
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बाक्स:
मांग बढ़ने पर स्वैप मशीनों की आई किल्लत
नोटबंदी से पहले शहर में कुछ चुनिंदा शोरुमों पर डेबिट कार्ड स्वैप मशीनें लगी थीं। अब प्रधानमंत्री की कैशलेस भारत बनाने की योजना के बाद पूरे देश में स्वैप मशीनों के आवेदन करने के लिए हड़कंप मचा हुआ है। अब पूरे देेश व्यापारी एवं दुकानदारों ने स्वैप मशीनों के लिए आवेदन किया हुआ है, जिस कारण स्वैप मशीनों की मांग बढ़ गई है। मांग बढ़ने के कारण मशीनों की भी किल्लत हो रही है। यही कारण है कि एक सप्ताह बीत जाने के बाद प्रतिष्ठानों पर स्वैप मशीने नहीं लग पाई।
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स्वैप मशीन के लिए अपने बैंक में आवेदन किया हुआ है। एक सप्ताह बीत चुका है लेकिन अभी तक स्वैप मशीने नहीं लग पाई हैं। इस कारण उन्हें उधारी की दुुकानदारी करनी पड़ रही है। -विकास मेहता, कपड़ा व्यापारी
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नोट बंदी के बाद उधारी बढ़ रही है जिस कारण हमें नुकसान हो रहा है। इससे बचने के लिए पॉस मशीन के लिए बैंक में अप्लाई किया था। जो कि अभी तक नहीं लग पाई है अभी कितना समय लगेगा यह भी पता नहीं चल पाया हैै। -पवन भारद्वाज, जरनल स्टोर व्यापारी
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कैशलेस अभियान को सफल बनाने के लिए स्वैप मशीन के लिए आवेदन किया था। एक सप्ताह का समय बीत गया है लेकिन अभी तक मशीन नहीं लग पाई है जबकि सभी दस्तावेज भी जमा करवा दिए हैं। -दीपक अग्रवाल, कपड़ा व्यापारी
इस हफ्ते आने की है उम्मीद:
स्वैप मशीनों के लिए जिन भी व्यापारियों ने दस्तावेज जमा करवाए थे उनकी रिकवेस्ट हेड ऑफिस आईटी में भेज दी है। इस हफ्ते में सभी स्वैप मशीनें आने की उम्मीद है। -पंकज भाटिया, बैंक मैनेजर
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पांच उपभोक्ता प्रतिदिन कर रहे आवेदन
इस समय शहर के दुकानदार एवं व्यापारी बैंकों में पॉस मशीन के लिए आवेदन कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में सभी बैंकों का मिलाकर पांच आवेदन पॉस मशीन के लिए बैंकों में जा रहे हैं। बैंक मैनेजर उनकी रिकवेस्ट हेड ऑफिस आईटी में भेज रहे हैं। अभी तक सभी बैंकों की मिलाकर पिछले कुछ दिनों में 50 से अधिक मशीनों के लिए आवेदन किए जा चुके हैं। लेकिन सरकारी बैंकों में से किसी ने भी एक मशीन प्रतिष्ठान पर नहीं लगाई है।
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उधार की दुकानदारी बढ़ी
दुकानदार एवं व्यापारियों ने बताया कि नोटबंदी के बाद बाजार में मंदी आ गई है। लोगों के पास कैश का अभाव होने के कारण उधार में सामान लेकर जा रहे हैं। जिससे उधार की दुकानदारी बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त जो लोग चेक से सामान लेकर जा रहे हैं उनके चेक बाउस हो रहे हैं। इससे उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। इससे बचने के लिए पॉस मशीन के लिए बैंक में आवेदन किए हैं लेकिन अभी तक मशीने नहीं लग पाई हैं।
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मांग बढ़ने पर स्वैप मशीनों की आई किल्लत
नोटबंदी से पहले शहर में कुछ चुनिंदा शोरुमों पर डेबिट कार्ड स्वैप मशीनें लगी थीं। अब प्रधानमंत्री की कैशलेस भारत बनाने की योजना के बाद पूरे देश में स्वैप मशीनों के आवेदन करने के लिए हड़कंप मचा हुआ है। अब पूरे देेश व्यापारी एवं दुकानदारों ने स्वैप मशीनों के लिए आवेदन किया हुआ है, जिस कारण स्वैप मशीनों की मांग बढ़ गई है। मांग बढ़ने के कारण मशीनों की भी किल्लत हो रही है। यही कारण है कि एक सप्ताह बीत जाने के बाद प्रतिष्ठानों पर स्वैप मशीने नहीं लग पाई।
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स्वैप मशीन के लिए अपने बैंक में आवेदन किया हुआ है। एक सप्ताह बीत चुका है लेकिन अभी तक स्वैप मशीने नहीं लग पाई हैं। इस कारण उन्हें उधारी की दुुकानदारी करनी पड़ रही है। -विकास मेहता, कपड़ा व्यापारी
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नोट बंदी के बाद उधारी बढ़ रही है जिस कारण हमें नुकसान हो रहा है। इससे बचने के लिए पॉस मशीन के लिए बैंक में अप्लाई किया था। जो कि अभी तक नहीं लग पाई है अभी कितना समय लगेगा यह भी पता नहीं चल पाया हैै। -पवन भारद्वाज, जरनल स्टोर व्यापारी
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कैशलेस अभियान को सफल बनाने के लिए स्वैप मशीन के लिए आवेदन किया था। एक सप्ताह का समय बीत गया है लेकिन अभी तक मशीन नहीं लग पाई है जबकि सभी दस्तावेज भी जमा करवा दिए हैं। -दीपक अग्रवाल, कपड़ा व्यापारी
इस हफ्ते आने की है उम्मीद:
स्वैप मशीनों के लिए जिन भी व्यापारियों ने दस्तावेज जमा करवाए थे उनकी रिकवेस्ट हेड ऑफिस आईटी में भेज दी है। इस हफ्ते में सभी स्वैप मशीनें आने की उम्मीद है। -पंकज भाटिया, बैंक मैनेजर