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Mahendragarh-Narnaul News: शुभ मुहूर्त... कल से फिर बजेगी शहनाई
Wed, 17 Apr 2024 05:19 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 17 Apr 2024 05:19 AM IST
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महेंद्रगढ़। पिछले एक महीने से शुभ कार्यों पर विराम लगा हुआ था। अब 18 अप्रैल से फिर शहनाई बजेगी। 17 अप्रैल रामनवमी के अबूझ मुहूर्त के अलावा 18, 19, 20, 21, 22 अप्रैल को विवाह के शुभ मुहूर्त रहेंगे। फिर 10 मई का आखा तीज के दिन अबूझ साया रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि 13 अप्रैल को सूर्य देव मीन राशि से निकल कर मेष राशि में आ चुके है। मेष में प्रवेश करते ही खरमास की अवधि समाप्त हो गई है। शुभ कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, उपनयन संस्कार फिर से शुरू हो जाएंगे।
शुक्र, गुरु होंगे अस्त
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 23 अप्रैल से दो जून तक फिर से शादियों पर ब्रेक लग जायेगा। हालांकि इस दौरान 10 मई को अबूझ मुहूर्त रहेगा। यह विराम तारा अस्त होने के कारण लगेगा। 23 अप्रैल को शुक्र और 6 मई को गुरु अस्त हो जाएगा। दो जून को गुरु उदय व 30 जून को शुक्र उदय होंगे। शास्त्रों के अनुसार शुक्र को भौतिक सुखों का कारक माना जाता है। गुरु शुभ कार्यों के कारक होते हैं। इसलिए इनके अस्त होंगे पर विवाह शादियां नहीं होती। विवाह के लिए गुरु और शुक्र का उदय जरूरी है। सूर्य के नजदीक जब भी कोई ग्रह आता है तो वह बलहीन अवस्था में होकर अस्त हो जाता है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि 13 अप्रैल को सूर्य देव मीन राशि से निकल कर मेष राशि में आ चुके है। मेष में प्रवेश करते ही खरमास की अवधि समाप्त हो गई है। शुभ कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, उपनयन संस्कार फिर से शुरू हो जाएंगे।
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शुक्र, गुरु होंगे अस्त
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 23 अप्रैल से दो जून तक फिर से शादियों पर ब्रेक लग जायेगा। हालांकि इस दौरान 10 मई को अबूझ मुहूर्त रहेगा। यह विराम तारा अस्त होने के कारण लगेगा। 23 अप्रैल को शुक्र और 6 मई को गुरु अस्त हो जाएगा। दो जून को गुरु उदय व 30 जून को शुक्र उदय होंगे। शास्त्रों के अनुसार शुक्र को भौतिक सुखों का कारक माना जाता है। गुरु शुभ कार्यों के कारक होते हैं। इसलिए इनके अस्त होंगे पर विवाह शादियां नहीं होती। विवाह के लिए गुरु और शुक्र का उदय जरूरी है। सूर्य के नजदीक जब भी कोई ग्रह आता है तो वह बलहीन अवस्था में होकर अस्त हो जाता है।
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