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Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   Sharmila Devi Becomes Her Son's Guide; 24 Years After Her Husband's Martyrdom, She Helps Her Son Become an Army Captain.

Mahendragarh-Narnaul News: शर्मिला देवी बेटे के लिए बनीं सारथी, पति की शहादत के 24 साल बाद बेटे को बनाया सेना में कैप्टन

Sat, 09 May 2026 11:14 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2026 11:14 PM IST
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Sharmila Devi Becomes Her Son's Guide; 24 Years After Her Husband's Martyrdom, She Helps Her Son Become an Army Captain.
फोटो संख्या:63 माता शर्मिला देवी के साथ कैप्टन अरुण कुमार। स्वयं
महेंद्रगढ़। अपने बेटे के लिए सारथी बनीं मां शर्मिला देवी ने अपने संघर्षों से पति की शहादत के 24 साल बाद बेटे को भी भारतीय सेना में कैप्टन बनाकर प्रत्येक मां का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। गांव भगड़ाना निवासी शर्मिला देवी के पति सिपाही आनंद कुमार 14 अगस्त 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए थे।
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उस समय शर्मिला देवी की उम्र महज 23 वर्ष थी। दो बेटी व एक बेटे की कामयाबी तक शर्मिला देवी ने हार नहीं मानी और अपने संघर्ष के दम पर तीन बच्चों को कामयाब बनाया।
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खेती से लेकर पशुपालन किया। पति की शहादत की सूचना मिली तो वह पूरी तरह टूट गई थीं लेकिन बच्चों के लिए मां व पिता दोनों की भूमिका निभाई। बड़ी बेटी जोनी छह साल की थी और छोटी बेटी सुमित महज चार साल की थी जबकि सबसे छोटा अरूण कुमार महज 14 माह का था। पिता के जाने के बाद अकेली मां ढाल बनीं।
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आज बेटा भारतीय सेना में कैप्टन बनकर देश सेवा कर रहा है। बड़ी बेटी बीएड, एमएसी, सीटेट और रीट की परीक्षा पास कर शिक्षक बनने की तैयारी कर रही हैं।छोटी बेटी सुमित एमएससी नर्सिंग से पीएचडी कर एक निजी कॉलेज में प्राध्यापक हैं।
परवरिश के साथ-साथ पिता के सपनों से भी जोड़ा
श्रीनगर में सेवाएं दे रहे अरूण कुमार ने बताया कि पिता आनंद कुमार भारतीय सेना में कार्यरत थे। 14 अगस्त 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन रक्षक में देश की रक्षा करते हुए वह शहीद हो गए थे। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन मां ने हिम्मत नहीं हारी। तीनों बहन-भाई की परवरिश के साथ-साथ पिता के सपनों से भी जोड़े रखा। आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बीच तीनों को ही अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए दिन-रात संघर्ष किया।

बचपन से ही सेना में जाने का सपना
खेती व पशुपालक कर उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाई। मां की प्रेरणा और अनुशासन का ही परिणाम रहा कि बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखने लगा था। सेना में कैप्टन बनना केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि शहीद पिता के सपने और मां के संघर्ष की जीत भी है। वर्ष 2023 में एसएसबी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सीधे लेफ्टिनेंट से भर्ती हुए थे। वर्तमान में बतौर कैप्टन श्रीनगर में सेवाएं दे रहे हैं।
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