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जानकारी नहीं देने पर सरपंच पर लगा 25 हजार रुपये का जुर्माना
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राज्य सूचना आयोग कार्यालय। संवाद
- फोटो : Narnol
जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सरपंच द्वारा जानकारी नहीं देने पर राज्य सूचना आयोग ने सरपंच पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के आदेश दिए है। वहीं आवेदनकर्ता को दो हजार रुपये हर्जाने के रूप में भी देने के निर्देश दिए है।
बता दें कि गांव खेड़ी निवासी युवक सतेंद्र यादव ने 14 अगस्त 2019 को जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत गांव कांटी के सरपंच से गांव कांटी में प्रशासनिक कार्यकाल में कुल कितने डस्टबिन की खरीद की गई तथा गांव में डस्टबिन कहां-कहां पर रखे गए से संबंधित खरीद प्रस्ताव, खरीद बिल कोटेशन, स्टॉक रजिस्टर, कैश बुक, पासबुक, बाउचर फाइल सरकार द्वारा निर्धारित रेट, वजन, साइज व जवाबदेही संबंधित सत्यापित दस्तावेज मांगे थे, लेकिन सरपंच ने आवेदनकर्ता को जानकारी नहीं दी। इसके बाद आवेदनकर्ता सतेंद्र यादव ने 18 सितंबर 2019 को बीडीपीओ अटेली नांगल को प्रथम अपील करते हुए जानकारी दिलाने के लिए आवेदन किया।
बताया जाता है कि बीडीपीओ कार्यालय द्वारा सरपंच को दो बार बुलाया गया, लेकिन उन्होंने जानकारी देना तो दूर खंड कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई। इसके बाद नियमानुसार आवेदनकर्ता ने 13 अप्रैल 2021 को द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग चंडीगढ़ में की। राज्य सूचना आयोग ने सरपंच, आवेदनकर्ता व सचिव को 5 जनवरी को अपने कार्यालय में बुलाया था, लेकिन सरपंच वहां भी पेश नहीं हुआ। इस पर सूचना आयुक्त चंद्रप्रकाश ने सरपंच पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए आवेदनकर्ता को जानकारी देने का आदेश दिया। साथ ही आवेदनकर्ता को दो हजार रुपये हर्जाना देने के भी आदेश दिए हैं। आवेदनकर्ता ने बताया कि सरपंच या अधिकारी जानकारी देने में देरी व परेशान कर सकते हैं, मगर उन्हें जानकारी तो देनी ही होगी।
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विभाग की ओर से वे चंडीगढ़ राज्य सूचना आयोग के समक्ष मौजूद थे। उन्होंने सरपंच पर समय अनुसार आरटीआई आवेदक को जानकारी नहीं देने पर जुर्माना लगाने का आदेश पारित किया है। लेकिन कितना जुर्माना लगाया गया उसके लिए अभी तक कोई लिखित में आदेश उपलब्ध नहीं हुए है। -सुरेंद्र कुमार, ग्राम सचिव बीडीपीओ कार्यालय मंडी अटेली।
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बता दें कि गांव खेड़ी निवासी युवक सतेंद्र यादव ने 14 अगस्त 2019 को जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत गांव कांटी के सरपंच से गांव कांटी में प्रशासनिक कार्यकाल में कुल कितने डस्टबिन की खरीद की गई तथा गांव में डस्टबिन कहां-कहां पर रखे गए से संबंधित खरीद प्रस्ताव, खरीद बिल कोटेशन, स्टॉक रजिस्टर, कैश बुक, पासबुक, बाउचर फाइल सरकार द्वारा निर्धारित रेट, वजन, साइज व जवाबदेही संबंधित सत्यापित दस्तावेज मांगे थे, लेकिन सरपंच ने आवेदनकर्ता को जानकारी नहीं दी। इसके बाद आवेदनकर्ता सतेंद्र यादव ने 18 सितंबर 2019 को बीडीपीओ अटेली नांगल को प्रथम अपील करते हुए जानकारी दिलाने के लिए आवेदन किया।
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बताया जाता है कि बीडीपीओ कार्यालय द्वारा सरपंच को दो बार बुलाया गया, लेकिन उन्होंने जानकारी देना तो दूर खंड कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई। इसके बाद नियमानुसार आवेदनकर्ता ने 13 अप्रैल 2021 को द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग चंडीगढ़ में की। राज्य सूचना आयोग ने सरपंच, आवेदनकर्ता व सचिव को 5 जनवरी को अपने कार्यालय में बुलाया था, लेकिन सरपंच वहां भी पेश नहीं हुआ। इस पर सूचना आयुक्त चंद्रप्रकाश ने सरपंच पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए आवेदनकर्ता को जानकारी देने का आदेश दिया। साथ ही आवेदनकर्ता को दो हजार रुपये हर्जाना देने के भी आदेश दिए हैं। आवेदनकर्ता ने बताया कि सरपंच या अधिकारी जानकारी देने में देरी व परेशान कर सकते हैं, मगर उन्हें जानकारी तो देनी ही होगी।
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विभाग की ओर से वे चंडीगढ़ राज्य सूचना आयोग के समक्ष मौजूद थे। उन्होंने सरपंच पर समय अनुसार आरटीआई आवेदक को जानकारी नहीं देने पर जुर्माना लगाने का आदेश पारित किया है। लेकिन कितना जुर्माना लगाया गया उसके लिए अभी तक कोई लिखित में आदेश उपलब्ध नहीं हुए है। -सुरेंद्र कुमार, ग्राम सचिव बीडीपीओ कार्यालय मंडी अटेली।