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Mahendragarh-Narnaul News: संत रविदास ने भेदभाव मिटाने का प्रयास किया
Fri, 23 Feb 2024 01:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 23 Feb 2024 01:15 AM IST
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फोटो संख्या:90- हकेंविवि में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थी व स्टाफ सदस्य--स्रोत-हकें
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) के हिंदी विभाग के द्वारा वीरवार को रविदास जयंती के उपलक्ष्य पर सामाजिक चेतना के महामानव गुरु रविदास विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रो. बीरपाल सिंह यादव की अध्यक्षता में होने वाले इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. राजेंद्र बड़गूजर अध्येता भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान राष्ट्रपति निवास शिमला (हिमाचल प्रदेश) उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि संत रविदास ने अपने जीवनकाल में लोगों के बीच भेदभाव को दूर करने का अथक प्रयास किया और हमेशा सद्भाव और शांति से रहने की शिक्षा दी। उन्होंने भगवान की भक्ति में समर्पित होने के साथ-साथ अपने सामाजिक और पारिवारिक कर्तव्यों का भी बखूबी निर्वहन किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति और कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि इस व्याख्यान से लोगों को बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने की शिक्षा मिली है। संरक्षक प्रो. सुषमा यादव ने कहा कि तर्क व कुतर्क के अंतर को समझकर तर्कसंगत विचार को बेझिझक स्वीकार करने से ही समाज में वैचारिक क्रांति आएगी। संयोजक डॉ. कामराज सिंधु ने कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि रैदास की वाणी, भक्ति की सच्ची भावना, समाज के व्यापक हित की कामना तथा मानव प्रेम से ओत-प्रोत है। इसलिए उनकी शिक्षाओं का श्रोताओं के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता था। उनके भजनों तथा उपदेशों से लोगों को ऐसी शिक्षा मिलती है जिससे उनकी शंकाओं का संतोषजनक समाधान हो जाता है और लोग स्वत: उनके अनुयायी बन जाते हैं।
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प्रो. बीरपाल सिंह यादव ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मुख्यातिथि प्रो. राजेंद्र बड़गूजर अध्येता भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान राष्ट्रपति निवास शिमला (हिमाचल प्रदेश), संयोजक डॉ. कामराज सिंधु के साथ ही शिक्षक साथी डॉ. कमलेश कुमारी, डॉ. रीना स्वामी, डॉ. सिद्धार्थ शंकर राय डॉ. अमित कुमार, डॉ. अरविंद सिंह तेजावत का धन्यवाद दिया। साथ ही विभिन्न विभागों के शोधार्थियों और विद्यार्थियों का भी धन्यवाद किया।
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उन्होंने कहा कि संत रविदास ने अपने जीवनकाल में लोगों के बीच भेदभाव को दूर करने का अथक प्रयास किया और हमेशा सद्भाव और शांति से रहने की शिक्षा दी। उन्होंने भगवान की भक्ति में समर्पित होने के साथ-साथ अपने सामाजिक और पारिवारिक कर्तव्यों का भी बखूबी निर्वहन किया।
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विश्वविद्यालय के कुलपति और कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि इस व्याख्यान से लोगों को बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने की शिक्षा मिली है। संरक्षक प्रो. सुषमा यादव ने कहा कि तर्क व कुतर्क के अंतर को समझकर तर्कसंगत विचार को बेझिझक स्वीकार करने से ही समाज में वैचारिक क्रांति आएगी। संयोजक डॉ. कामराज सिंधु ने कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि रैदास की वाणी, भक्ति की सच्ची भावना, समाज के व्यापक हित की कामना तथा मानव प्रेम से ओत-प्रोत है। इसलिए उनकी शिक्षाओं का श्रोताओं के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता था। उनके भजनों तथा उपदेशों से लोगों को ऐसी शिक्षा मिलती है जिससे उनकी शंकाओं का संतोषजनक समाधान हो जाता है और लोग स्वत: उनके अनुयायी बन जाते हैं।
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प्रो. बीरपाल सिंह यादव ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मुख्यातिथि प्रो. राजेंद्र बड़गूजर अध्येता भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान राष्ट्रपति निवास शिमला (हिमाचल प्रदेश), संयोजक डॉ. कामराज सिंधु के साथ ही शिक्षक साथी डॉ. कमलेश कुमारी, डॉ. रीना स्वामी, डॉ. सिद्धार्थ शंकर राय डॉ. अमित कुमार, डॉ. अरविंद सिंह तेजावत का धन्यवाद दिया। साथ ही विभिन्न विभागों के शोधार्थियों और विद्यार्थियों का भी धन्यवाद किया।