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कथा के स्मरण से सहजता तथा सरलता आती: श्रीरामप्रपन्नचार्य
Mon, 04 Aug 2025 12:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 04 Aug 2025 12:28 AM IST
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फोटो संख्या:65- श्री रामलीला परिषद महेंद्रगढ़ में आयोजित श्रीमद्भगावत कथा में कथा सुनते श्रद्धा
महेंद्रगढ़। श्री सतगुरु सेवा समिति के तत्वावधान में शनिवार से रामलीला परिषद में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह समारोह का शुभारंभ हुआ। कथा के दूसरे दिन वृंदावन से आए स्वामी श्रीरामप्रपन्नाचार्य महाराज ने कथा की अमृत वर्षा करते हुए बताया कि ईश्वर की अनुपम कृपा से ही लोगों को भागवत कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
कथा के स्मरण से मानव के जीवन में सहजता तथा सरलता आती है। ईश्वर का मिलना सहज है लेकिन संतों का मिलना और संतों के साथ सत्संग मिलना दुर्लभ है। उन्होंने ने उपस्थित लोगों को भाग्यशाली बताया कि उन्हें भागवत कथा सुनने का अवसर प्रदान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसके सुनने से मात्र सात दिन में ही राजा परीक्षित ने अपने जीवन को दिव्य बना लिया था ।
उन्होंने कहा कि मृत्यु को मंगलमय बनाने का उपक्रम साधन भी श्रीमद्भागवत कथा है जिसमें भगवान के 24 अवतारों का वर्णन है। नारद के पूर्व जन्म की कथा नाम संकीर्तन और सभी की सेवा करना ही श्रेष्ठ भक्ति है। उन्होंने कहा कि सभी में भगवान का दर्शन करते हुए छोटी से छोटी सेवा में भी शांति व आनंद की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि महेंद्रगढ़ में 25 वर्षों से सतगुरु सेवा समिति के आग्रह पर यहां आकर उन्हें कृतार्थ कर रहे हैं।
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इस अवसर पर सुरेश राजस्थानी, मनोज जेरपुरिया, रोहताश सौनी, विष्णु दत्त शर्मा, प्रेम चोधरी, धर्मबीर चिकना, मुकेश मैहता, अमित गोयल, प्रेम पाल वाले, कुसम अहरोदीया, सुषमा देवी, पुष्पा देवी शर्मा सहित अनेकों लोग लोग मौजूद रहे।
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कथा के स्मरण से मानव के जीवन में सहजता तथा सरलता आती है। ईश्वर का मिलना सहज है लेकिन संतों का मिलना और संतों के साथ सत्संग मिलना दुर्लभ है। उन्होंने ने उपस्थित लोगों को भाग्यशाली बताया कि उन्हें भागवत कथा सुनने का अवसर प्रदान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसके सुनने से मात्र सात दिन में ही राजा परीक्षित ने अपने जीवन को दिव्य बना लिया था ।
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उन्होंने कहा कि मृत्यु को मंगलमय बनाने का उपक्रम साधन भी श्रीमद्भागवत कथा है जिसमें भगवान के 24 अवतारों का वर्णन है। नारद के पूर्व जन्म की कथा नाम संकीर्तन और सभी की सेवा करना ही श्रेष्ठ भक्ति है। उन्होंने कहा कि सभी में भगवान का दर्शन करते हुए छोटी से छोटी सेवा में भी शांति व आनंद की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि महेंद्रगढ़ में 25 वर्षों से सतगुरु सेवा समिति के आग्रह पर यहां आकर उन्हें कृतार्थ कर रहे हैं।
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इस अवसर पर सुरेश राजस्थानी, मनोज जेरपुरिया, रोहताश सौनी, विष्णु दत्त शर्मा, प्रेम चोधरी, धर्मबीर चिकना, मुकेश मैहता, अमित गोयल, प्रेम पाल वाले, कुसम अहरोदीया, सुषमा देवी, पुष्पा देवी शर्मा सहित अनेकों लोग लोग मौजूद रहे।