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पुलिस को हजम नहीं हो रही योगेंद्र की बताई कहानी, दोस्तों पर शक

Sun, 27 Dec 2020 01:59 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 27 Dec 2020 01:59 AM IST
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Police are not digesting the story of Yogendra, suspecting friends
गांव लावण में योगेंद्र के घर पर अपहरण की चर्चा करते करते हुए ग्रामीण व अन्य। संवाद - फोटो : Narnol
महेंद्रगढ़। लावण गांव में बीए प्रथम के छात्र योगेंद्र के अपहरण में उसके करीबी शामिल हैं। जिस तरह से योगेंद्र के घर के बेहद घर के पास गाड़ी आकर रुकी। उसके बाद योगेंद्र का गाड़ी में चुपचाप सवार होना कई सवालों को जन्म दे रहा है। योगेंद्र की ओर से पुलिस को बताई गई कहानी हजम नहीं हो रही। पुलिस को योगेंद्र के दोस्तों पर शक है। अपहरण करने वालों ने फिरौती के लिए दो बार फोन किया। दोनों बार अपना फोन उपयोग नहीं किया। पहली बार योगेंद्र के फोन को उपयोग किया। इसके बाद फोन फेंक दिया। दूसरी बार किसी व्यक्ति का फोन छीनकर उसे उपयोग किया।
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गांव लावण में बीए प्रथम के स्टूडेंट योगेंद्र का बेहद नाटकीय अंदाज में अपहरण हुआ। योगेंद्र के घर के पास करीब दो घंटे तक कार खड़ी थी। पुलिस के अनुसार योगेंद्र गाड़ी में सवार लोगों को पूरी अच्छी तरह से जानता है। जिस कारण योगेंद्र गाड़ी में सवार हुआ। इसके बाद योगेंद्र के मोबाइल से उसके पिता सोमदत की बजाए उसके मामा मुनेश को फोन कर 20 लाख रुपये मांगना भी कई सवालों को जन्म दे रहा है। इसके बाद सुबह के समय फिरौती के लिए योगेंद्र की मां के मोबाइल पर फोन किया गया।
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जिसमें अपहरणकर्ताओं ने बीस की बजाए दस लाख रुपये मांगे। कुछ घंटों में ही फिरौती की रकम आधी कर दी। पुलिस के अनुसार अपहरण करने वाले प्रोफेशनल नहीं थे। वह जल्द से जल्द पैसा चाहते थे। इस कारण उन्होंने दस लाख मांग लिए।
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पुलिस को हजम नहीं हो रही योगेंद्र की कहानी
योगेंद्र ने पुलिस को बताया कि तीन लोग मास्क लगाए हुए कार में बैठे थे। उन्होंने उसे गाड़ी में जबरदस्ती बैठाया। इसके बाद उसे पिस्तौल के बल पर धमकी दी। उसके मुंह पर टेप लगा दी। इसके बाद उसे एक कमरे में ले जाकर सुला लिया। सुबह उसे रेवाड़ी से 100 रुपये देकर घर के लिए भेज दिया। जिसके बाद वह घर पहुंचा। योगेंद्र सीधा अपने गांव पहुंचने की बजाए अपने गांव के एक युवक के कनीना स्थित होटल में पहुंचा।
सीआईए की अहम भूमिका
इस अपहरण मामले को सुलझाने के लिए एसपी चंद्रमोहन ने सीआईए इंचार्ज अनिल कमांडो की टीम को लगाया। इस टीम ने परिजनों से बातचीत कर उसके दोस्तों के बारे में पता लगाया। टीम ने पूरी रात रेवाड़ी, गुरुग्राम, कनीना, महेंद्रगढ़ में छापेमारी की। टीम पूरी रात जांच में लगी रही। जिसमें कुछ मोबाइल नंबर भी ट्रैक किए।

फिरौती मांगने के लिए अपना फोन उपयोग नहीं किया
फिरौती के लिए पहला फोन योगेंद्र के मोबाइल से ही किया गया। अपहरणकर्ताओं ने फिरौती मांगने के बाद इस मोबाइल को मालड़ा गांव के पास फेंक दिया। इसके बाद सुबह के समय फिरौती के लिए दूसरा कॉल एक अज्ञात नंबर से किया गया। उस नंबर को ट्रैक करने पर पता लगा कि रेवाड़ी जिले में एक व्यकित से तीन लोगों ने मोबाइल छीन लिया था। उसी नंबर से फिरौती मांगने के लिए दूसरा कॉल किया गया।
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