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Mahendragarh-Narnaul News: सूखे जोहड़ व प्यासे वन्यजीव...नहरी पानी की कमी से गहराया जल संकट
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फोटो नंबर- 12गांव अलीपुर का सूखा पड़ा जोहड़
- फोटो : कटरा पीएचसी में मरीजों का इलाज करती चिकित्सक।
नांगल चौधरी। क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच नहरी पानी की भारी कमी से गांवों के जोहड़ सूखने लगे हैं। इससे जहां वन्य जीवों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है, वहीं भूजल स्तर सुधारने की योजना भी प्रभावित होती नजर आ रही है।
नारनौल डिविजन के लिए करीब 450 क्यूसिक पानी की मांग की गई थी लेकिन विभाग को केवल 150 क्यूसिक पानी ही मिल पाया। यानी कुल मांग का मात्र 33 प्रतिशत पानी उपलब्ध हो सका। कम सप्लाई के चलते प्रशासन ने पेयजल व्यवस्था को प्राथमिकता दी जिसके कारण जोहड़ों तक पानी नहीं पहुंच पाया।
अब हालत यह है कि कई जोहड़ पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि कुछ में नाममात्र पानी बचा है। कई जगहों पर जोहड़ों की तलहटी साफ दिखाई देने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर नहरी पानी छोड़ा जाए तो इन जोहड़ों को दोबारा भरा जा सकता है।
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ग्रामीणों के अनुसार पहले जोहड़ों का पानी जमीन में रिसकर भूजल स्तर को बनाए रखता था। इससे आसपास के कुएं और ट्यूबवेल भी लंबे समय तक जलयुक्त रहते थे लेकिन जोहड़ों के सूखने से जल स्तर तेजी से गिर रहा है। संवाद
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नारनौल डिविजन के लिए करीब 450 क्यूसिक पानी की मांग की गई थी लेकिन विभाग को केवल 150 क्यूसिक पानी ही मिल पाया। यानी कुल मांग का मात्र 33 प्रतिशत पानी उपलब्ध हो सका। कम सप्लाई के चलते प्रशासन ने पेयजल व्यवस्था को प्राथमिकता दी जिसके कारण जोहड़ों तक पानी नहीं पहुंच पाया।
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अब हालत यह है कि कई जोहड़ पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि कुछ में नाममात्र पानी बचा है। कई जगहों पर जोहड़ों की तलहटी साफ दिखाई देने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर नहरी पानी छोड़ा जाए तो इन जोहड़ों को दोबारा भरा जा सकता है।
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ग्रामीणों के अनुसार पहले जोहड़ों का पानी जमीन में रिसकर भूजल स्तर को बनाए रखता था। इससे आसपास के कुएं और ट्यूबवेल भी लंबे समय तक जलयुक्त रहते थे लेकिन जोहड़ों के सूखने से जल स्तर तेजी से गिर रहा है। संवाद