{"_id":"674df5333edf973ecc02d73c","slug":"old-woman-dies-after-waiting-for-pension-for-12-years-narnol-news-c-196-1-mgh1001-118782-2024-12-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: 12 साल से पेंशन के इंतजार में वृद्धा की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: 12 साल से पेंशन के इंतजार में वृद्धा की मौत
Mon, 02 Dec 2024 11:28 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 02 Dec 2024 11:28 PM IST
विज्ञापन
फोटो नंबर-03स्व. बर्फी देवी।
नारनौल। नांगल चौधरी क्षेत्र के गांव तोताहेड़ी की एक वीरांगना की न्यायालय में पेंशन की सुनवाई से पहले ही 9 नवंबर को मौत हो गई। अब उनकी हाईकोर्ट में 13 दिसंबर को तारीख है। पति सुल्तान राम को 1972 से 2011 तक स्वतंत्रता सेनानी होने का लाभ मिलता रहा, लेकिन उनका प्रमाण पत्र अपडेट न होने के कारण यह बंद कर दिया गया। हालांकि 2012 में उनकी मौत हो गई थी। उनकी पत्नी बर्फी देवी तब से स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित के रूप में पेंशन के लिए मुकदमा लड़ रही थीं।
यहां तक कि महेंद्रगढ़ में डिप्टी कमिश्नर (डीसी) कार्यालय ने भी उनने सभी दावों की पुष्टि करने के बाद केंद्र को मामला सौंपने की सिफारिश की गई थी। आखिरकार सितंबर 2023 में उन्हें अपनी पेंशन पाने के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि मामले में उचित कार्रवाई न करने के लिए हाईकोर्ट ने केंद्र पर दो बार जुर्माना भी लगाया। शुरुआत में 24 अप्रैल को हाईकोर्ट ने 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया और फिर 24 जुलाई को केंद्र सरकार पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
विडंबना यह है कि केंद्र ने उच्च न्यायालय की चेतावनी के बाद जवाब दाखिल किया और मामले को 13 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया, लेकिन पेंशन के लिए बर्फी देवी का अंतहीन इंतजार, उनकी याचिका पर फैसला करने से एक महीने पहले उनकी मृत्यु के साथ समाप्त हो गया।
विज्ञापन
बेटी सुमित्रा देवी और ज्ञान देवी ने बताया कि मां की मौत इस बात की शिकायत के साथ हुई कि उन्हें उनके पिता की पेंशन नहीं दी जा रही थी, जिसे उन्होंने देश की सेवा करके गर्व के साथ कमाया था। उन्होंने कहा कि मां इस मुद्दे से भावनात्मक रूप से जुड़ी थी। क्योंकि उन्हें पति की पेंशन नहीं मिल पा रही थी।
अधिवक्ता रविंदर ढुल ने कहा कि पिछले साल जब यह मामला दायर किया गया था, तब हाईकोर्ट के समक्ष पहली दलील थी कि उनकी मौत हो चुकी है, लेकिन उनके भुगतान की अनदेखी की जा रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि परिवार ने पिछले कुछ वर्षों में गृह मंत्रालय को भेजे गए संदेशों का एक बड़ा रिकाॅर्ड संभाल के रखा है।
विज्ञापन
यहां तक कि महेंद्रगढ़ में डिप्टी कमिश्नर (डीसी) कार्यालय ने भी उनने सभी दावों की पुष्टि करने के बाद केंद्र को मामला सौंपने की सिफारिश की गई थी। आखिरकार सितंबर 2023 में उन्हें अपनी पेंशन पाने के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि मामले में उचित कार्रवाई न करने के लिए हाईकोर्ट ने केंद्र पर दो बार जुर्माना भी लगाया। शुरुआत में 24 अप्रैल को हाईकोर्ट ने 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया और फिर 24 जुलाई को केंद्र सरकार पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
विज्ञापन
विडंबना यह है कि केंद्र ने उच्च न्यायालय की चेतावनी के बाद जवाब दाखिल किया और मामले को 13 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया, लेकिन पेंशन के लिए बर्फी देवी का अंतहीन इंतजार, उनकी याचिका पर फैसला करने से एक महीने पहले उनकी मृत्यु के साथ समाप्त हो गया।
विज्ञापन
बेटी सुमित्रा देवी और ज्ञान देवी ने बताया कि मां की मौत इस बात की शिकायत के साथ हुई कि उन्हें उनके पिता की पेंशन नहीं दी जा रही थी, जिसे उन्होंने देश की सेवा करके गर्व के साथ कमाया था। उन्होंने कहा कि मां इस मुद्दे से भावनात्मक रूप से जुड़ी थी। क्योंकि उन्हें पति की पेंशन नहीं मिल पा रही थी।
अधिवक्ता रविंदर ढुल ने कहा कि पिछले साल जब यह मामला दायर किया गया था, तब हाईकोर्ट के समक्ष पहली दलील थी कि उनकी मौत हो चुकी है, लेकिन उनके भुगतान की अनदेखी की जा रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि परिवार ने पिछले कुछ वर्षों में गृह मंत्रालय को भेजे गए संदेशों का एक बड़ा रिकाॅर्ड संभाल के रखा है।