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Mahendragarh-Narnaul News: बिजली लाइन से लगी आग में जली फसल के लिए किसान को मिलेगा 1.05 लाख मुआवजा
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नारनौल। गांव बिहाली निवासी किसान निहाल सिंह को बिजली लाइन से लगी आग में फसल जलने के मामले में अदालत से राहत मिली है। सिविल जज राकेश कुमार ने बिजली निगम की लापरवाही मानते निगम को 1.05 लाख रुपये मुआवजा देने के साथ भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश दिए हैं।
किसान निहाल सिंह ने याचिका में बताया कि उसके खेत के ऊपर से गुजर रही बिजली लाइन काफी पुरानी और जर्जर अवस्था में थी। 7 अप्रैल 2023 को अचानक लाइन में स्पार्किंग हुई जिससे आग लग गई और लगभग 12 कनाल में खड़ी गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई। घटना के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
वहीं, बिजली निगम (डीएचबीवीएनएल) ने कहा कि लाइन पूरी तरह ठीक थी और आग किसी अन्य कारण से लगी होगी। निगम ने यह भी तर्क दिया कि यदि स्पार्किंग होती तो लाइन स्वतः ट्रिप हो जाती। हालांकि, अदालत ने पुलिस रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण मानते हुए आग लगने का सबसे संभावित कारण बिजली लाइन ही थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली जैसी खतरनाक व्यवस्था के मामलों में विभाग की जिम्मेदारी अधिक सख्त होती है।
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किसान ने 1.50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी लेकिन अदालत ने स्थानीय उत्पादन और बाजार दर को आधार बनाकर 1.05 लाख रुपये का मुआवजा तय किया। इसमें 90 हजार रुपये गेहूं की फसल और 15 हजार रुपये भूसे के शामिल हैं। साथ ही अदालत ने मुकदमे का खर्च भी बिजली निगम को ही वहन करने के निर्देश दिए हैं।
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किसान निहाल सिंह ने याचिका में बताया कि उसके खेत के ऊपर से गुजर रही बिजली लाइन काफी पुरानी और जर्जर अवस्था में थी। 7 अप्रैल 2023 को अचानक लाइन में स्पार्किंग हुई जिससे आग लग गई और लगभग 12 कनाल में खड़ी गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई। घटना के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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वहीं, बिजली निगम (डीएचबीवीएनएल) ने कहा कि लाइन पूरी तरह ठीक थी और आग किसी अन्य कारण से लगी होगी। निगम ने यह भी तर्क दिया कि यदि स्पार्किंग होती तो लाइन स्वतः ट्रिप हो जाती। हालांकि, अदालत ने पुलिस रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण मानते हुए आग लगने का सबसे संभावित कारण बिजली लाइन ही थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली जैसी खतरनाक व्यवस्था के मामलों में विभाग की जिम्मेदारी अधिक सख्त होती है।
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किसान ने 1.50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी लेकिन अदालत ने स्थानीय उत्पादन और बाजार दर को आधार बनाकर 1.05 लाख रुपये का मुआवजा तय किया। इसमें 90 हजार रुपये गेहूं की फसल और 15 हजार रुपये भूसे के शामिल हैं। साथ ही अदालत ने मुकदमे का खर्च भी बिजली निगम को ही वहन करने के निर्देश दिए हैं।