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नारी शिक्षा के बिना राष्ट्र निर्माण अधूरा : डॉ. पवित्रा
Sun, 25 May 2025 11:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 25 May 2025 11:47 PM IST
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फोटो संख्या:56- गांव दौंगड़ा अहीर में आयोजित सम्मेलन में मौजूद श्रद्धालु--स्रोत- आयोजक
कनीना। दौगड़ा अहीर में रविवार को आर्य समाज के राज्यस्तरीय सम्मेलन के दूसरे दिन मुख्य अतिथि आरपीएस ग्रुप की चेयरपर्सन डॉ. पवित्रा राव ने कहा कि नारी शिक्षा के बिना राष्ट्र निर्माण अधूरा है।
स्त्री शिक्षा का नाश समस्त जातियों के विनाश का मूल कारण है। उन्होंने आह्वान किया कि यदि हम भारत को सशक्त बनाना चाहते हैं, तो नारी शिक्षा को राष्ट्र सेवा का माध्यम बनाना होगा। विशिष्ट अतिथि नरेंद्र कुमार त्यागी ने आर्य समाज के विचारों को समय की आवश्यकता बताया। भजन उपदेशक कैलाश कर्मठ ने कहा कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये पुरुषार्थ अष्टांग योग की साधना से ही संभव हैं। उन्होंने यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवात्मा का परम लक्ष्य मोक्ष है।
इसके लिए स्तुति, प्रार्थना व उपासना को जीवन में अपनाना आवश्यक है। सम्मेलन में प्रभावशाली वक्तव्य अंतरराष्ट्रीय क्रांतिकारी संत स्वामी सच्चिदानंद शास्त्री का रहा। उन्होंने कहा कि धर्म की पैकिंग में भ्रमित न हों, वेद ही मूल है। स्वामी सच्चिदानंद शास्त्री ने स्वामी दयानंद सरस्वती के अजमेर ब्रह्मा मंदिर में किए गए वेद भाष्य का उल्लेख किया।
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उन्होंने कहा कि वेद न किसी जाति, धर्म की संपत्ति है। ये अनादि, अपौरुषेय और सार्वभौमिक ज्ञान है। आर्य समाज वेद का प्रचार कर सत्य, न्याय और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में स्वामी यश देव, कलावती, वेद प्रकाश, अरविंद कुमार, महाशय पूर्ण चंद आर्य, हिमांक आर्य, धर्मवीर विद्यार्थी, महाशय मंतूराम, रामअवतार, पुरुषार्थ सहित अनेक विद्वानों ने राष्ट्रधर्म, वेद प्रचार और सामाजिक समस्याओं पर अपने विचार साझा किए। सम्मेलन का आयोजन प्रेरणास्पद, जागरूकता से परिपूर्ण और सामाजिक चेतना को दिशा देने वाला रहा। अंत में सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया गया कि वैदिक ज्ञान, नारी शिक्षा और योग को जन-जन तक पहुंचाना ही सच्चा राष्ट्रधर्म है। सम्मेलन की अध्यक्षता मास्टर ओमप्रकाश ने की।
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स्त्री शिक्षा का नाश समस्त जातियों के विनाश का मूल कारण है। उन्होंने आह्वान किया कि यदि हम भारत को सशक्त बनाना चाहते हैं, तो नारी शिक्षा को राष्ट्र सेवा का माध्यम बनाना होगा। विशिष्ट अतिथि नरेंद्र कुमार त्यागी ने आर्य समाज के विचारों को समय की आवश्यकता बताया। भजन उपदेशक कैलाश कर्मठ ने कहा कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये पुरुषार्थ अष्टांग योग की साधना से ही संभव हैं। उन्होंने यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवात्मा का परम लक्ष्य मोक्ष है।
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इसके लिए स्तुति, प्रार्थना व उपासना को जीवन में अपनाना आवश्यक है। सम्मेलन में प्रभावशाली वक्तव्य अंतरराष्ट्रीय क्रांतिकारी संत स्वामी सच्चिदानंद शास्त्री का रहा। उन्होंने कहा कि धर्म की पैकिंग में भ्रमित न हों, वेद ही मूल है। स्वामी सच्चिदानंद शास्त्री ने स्वामी दयानंद सरस्वती के अजमेर ब्रह्मा मंदिर में किए गए वेद भाष्य का उल्लेख किया।
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उन्होंने कहा कि वेद न किसी जाति, धर्म की संपत्ति है। ये अनादि, अपौरुषेय और सार्वभौमिक ज्ञान है। आर्य समाज वेद का प्रचार कर सत्य, न्याय और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में स्वामी यश देव, कलावती, वेद प्रकाश, अरविंद कुमार, महाशय पूर्ण चंद आर्य, हिमांक आर्य, धर्मवीर विद्यार्थी, महाशय मंतूराम, रामअवतार, पुरुषार्थ सहित अनेक विद्वानों ने राष्ट्रधर्म, वेद प्रचार और सामाजिक समस्याओं पर अपने विचार साझा किए। सम्मेलन का आयोजन प्रेरणास्पद, जागरूकता से परिपूर्ण और सामाजिक चेतना को दिशा देने वाला रहा। अंत में सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया गया कि वैदिक ज्ञान, नारी शिक्षा और योग को जन-जन तक पहुंचाना ही सच्चा राष्ट्रधर्म है। सम्मेलन की अध्यक्षता मास्टर ओमप्रकाश ने की।