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Mahendragarh-Narnaul News: गूगल के क्रोम ब्राउजर का पकड़ा बग, नारनौल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने कमाए 1,000 डॉलर
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फोटो 01: आलोक यादव
नारनौल। नीरपुर निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर आलोक यादव ने एक बार फिर अपनी तकनीकी प्रतिभा का परिचय दिया है। उन्होंने गूगल के क्रोम ब्राउजर में एक गंभीर सुरक्षा खामी (बग) खोजकर कंपनी को इसकी जानकारी दी। गूगल ने उनकी रिपोर्ट को गंभीर मानते हुए उन्हें 1,000 अमेरिकन डॉलर का पुरस्कार दिया है। पुरस्कार राशि उनके खाते में भेज दी गई है।
आलोक की पत्नी भावना यादव ने बताया कि आलोक पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, लेकिन बग ढूंढ़ना उनका पसंदीदा काम है। वह बीटेक के समय से ही इंटरनेट को सुरक्षित बनाने के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर और वेबसाइटों में सुरक्षा खामियां तलाशते रहे हैं। उन्होंने पहली बार 2017-18 में गूगल के क्रोम ब्राउजर में एक गंभीर बग खोजा था। इसके लिए गूगल ने वर्ष 2019 में उन्हें 5 हजार अमेरिकन डॉलर का पुरस्कार दिया था।
भावना के अनुसार, आलोक ने वर्ष 2024 में भी गूगल को दो बग की जानकारी दी थी। इनमें से एक को गंभीर श्रेणी का माना गया और इसके लिए 14 सितंबर को उन्हें 1,000 डॉलर का इनाम मिला। इसके साथ ही गूगल से मिलने वाले उनके कुल पुरस्कार 6 हजार डॉलर यानी करीब 5 लाख रुपये हो गए हैं। कुछ अन्य बग अभी गूगल के पास पेंडिंग हैं जिन पर निर्णय होना बाकी है।
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आलोक ने एसवीएन स्कूल, नीरपुर से नॉन मेडिकल में 12वीं की पढ़ाई की और जेईई मेन्स पास करने के बाद जालंधर से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक किया। कॅरिअर की शुरुआत उन्होंने टीसीएस में ट्रेनी इंजीनियर के रूप में की। आलोक प्रसिद्ध दोहाकार एवं वरिष्ठ साहित्यकार रघुविंद्र यादव के बेटे हैं।
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आलोक की पत्नी भावना यादव ने बताया कि आलोक पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, लेकिन बग ढूंढ़ना उनका पसंदीदा काम है। वह बीटेक के समय से ही इंटरनेट को सुरक्षित बनाने के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर और वेबसाइटों में सुरक्षा खामियां तलाशते रहे हैं। उन्होंने पहली बार 2017-18 में गूगल के क्रोम ब्राउजर में एक गंभीर बग खोजा था। इसके लिए गूगल ने वर्ष 2019 में उन्हें 5 हजार अमेरिकन डॉलर का पुरस्कार दिया था।
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भावना के अनुसार, आलोक ने वर्ष 2024 में भी गूगल को दो बग की जानकारी दी थी। इनमें से एक को गंभीर श्रेणी का माना गया और इसके लिए 14 सितंबर को उन्हें 1,000 डॉलर का इनाम मिला। इसके साथ ही गूगल से मिलने वाले उनके कुल पुरस्कार 6 हजार डॉलर यानी करीब 5 लाख रुपये हो गए हैं। कुछ अन्य बग अभी गूगल के पास पेंडिंग हैं जिन पर निर्णय होना बाकी है।
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आलोक ने एसवीएन स्कूल, नीरपुर से नॉन मेडिकल में 12वीं की पढ़ाई की और जेईई मेन्स पास करने के बाद जालंधर से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक किया। कॅरिअर की शुरुआत उन्होंने टीसीएस में ट्रेनी इंजीनियर के रूप में की। आलोक प्रसिद्ध दोहाकार एवं वरिष्ठ साहित्यकार रघुविंद्र यादव के बेटे हैं।