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Mahendragarh-Narnaul News: 40 साल में 30 गुना बढ़ गया सरसों का रकबा, पहले 8-10 हजार एकड़ में होती थी खेती
Fri, 15 Mar 2024 03:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 15 Mar 2024 03:34 AM IST
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महेंद्रगढ़। जिले में पिछले 40 साल में सरसों का रकबा 30 गुना तक बढ़ गया है। पहले यहां सरसों का औसतन रकबा करीब 8 से 10 हजार एकड़ था, जो वर्तमान में बढ़कर 2.41 लाख एकड़ पहुंच गया है। सरसों के औसतन उत्पादन में प्रदेश के रेवाड़ी जिले को अग्रणी माना जाता था, लेकिन महेंद्रगढ़ जिला वर्तमान में रेवाड़ी को पछाड़कर पहले पायदान पर पहुंच चुका है।
चार दशक के दौरान रबी सीजन में जिले की सरसों ही प्रमुख फसल बन गई है। वर्ष 2021 में सरसों उत्पादन में रेवाड़ी प्रदेश में पहले पायदान पर था, लेकिन 2022 व 23 में महेंद्रगढ़ जिला औसतन उत्पादन में पहले पायदान पर पहुंच गया। वर्तमान समय में कृषि योग्य भूमि पर एक तिहाई रकबा रबी की प्रमुख फसल के रूप में सरसों का ही है।
हर साल औसतन 10 हजार एकड़ बढ़ रहा रकबा
सिंचाई के पर्याप्त साधन होने से रकबा भी लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में जिले की 597792 एकड़ भूमि कृषि योग्य है। इसमें से 273405 एकड़ भूमि सिंचित है, जिसमें भूमिगत जल से सिंचाई हो रही है। 40 साल पहले सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण अधिकांश भूमि पर बारानी फसलें की जाती थीं। इनमें चने व जौ का रकबा सबसे अधिक था। लेकिन, जैसे ही सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध होने लगे तो सरसों का रकबा भी लगातार बढ़ने लगा। अब रबी सीजन में जिले की प्रमुख फसल सरसों ही है। साथ ही सरसों में रोग एवं मौसम की मार की आशंका भी कम होती है। सिंचाई की जरूरत कम होने से किसान भी इसे नकदी फसल के रूप में लेते हैं।
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नहरी पानी के अभाव के बावजूद अव्वल रहा जिला
महेंद्रगढ़ में नहरी पानी का अभाव एवं जल स्तर अधिक गहराई पर होने के बावजूद जिले का प्रदेश में दूसरा स्थान रहा है। जबकि नांगल चौधरी, नारनौल, सतनाली क्षेत्र में भूमिगत जल स्तर काफी गहराई पर है और इन क्षेत्रों में अधिकांश कृषि भूमि सिंचाई के अभाव में उत्पादन भी प्रभावित करती है।
यह है जिले की सरसों की गुणवत्ता
जिले में औसत पैदावार की बात करें तो प्रतिवर्ष 7 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार होती है। अगर किसी वर्ष मौसम अच्छा रहता है तो यह उत्पादन 9 से 10 क्विंटल तक भी बढ़ सकता है। वहीं गुणवत्ता के हिसाब से महेंद्रगढ़ क्षेत्र प्रदेशभर में अव्वल स्थान पर रहा है। यहां की सरसों में तेल की मात्रा भी 36 से 40 प्रतिशत तक रहती है जो तेल उत्पादन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिला में गत वर्ष 2.70 लाख एकड़ में 8 क्विंटल प्रति एकड़ औसत पैदावार के साथ 21 लाख 60 हजार क्विंटल सरसों का उत्पादन हुआ था।
जिले में सरसों उत्पादन के लिए भौगोलिक परिस्थितियां अनुकूल हैं। पिछले चार दशक से सरसों का रकबा भी बढ़ रहा है। चार दशक पूर्व सीमित सिंचाई संसाधन होने एवं भूजल स्तर गहराई में होने के कारण अधिकांश क्षेत्र बारानी थी, जो बारिश पर आधारित था। लेकिन, जैसे-जैसे तकनीक बढ़ी, जिले में सरसों का रकबा भी बढ़ता गया।
-डॉ. अजय यादव, उपमंडल अधिकारी कृषि एवं किसान कल्याण विभाग
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चार दशक के दौरान रबी सीजन में जिले की सरसों ही प्रमुख फसल बन गई है। वर्ष 2021 में सरसों उत्पादन में रेवाड़ी प्रदेश में पहले पायदान पर था, लेकिन 2022 व 23 में महेंद्रगढ़ जिला औसतन उत्पादन में पहले पायदान पर पहुंच गया। वर्तमान समय में कृषि योग्य भूमि पर एक तिहाई रकबा रबी की प्रमुख फसल के रूप में सरसों का ही है।
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हर साल औसतन 10 हजार एकड़ बढ़ रहा रकबा
सिंचाई के पर्याप्त साधन होने से रकबा भी लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में जिले की 597792 एकड़ भूमि कृषि योग्य है। इसमें से 273405 एकड़ भूमि सिंचित है, जिसमें भूमिगत जल से सिंचाई हो रही है। 40 साल पहले सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण अधिकांश भूमि पर बारानी फसलें की जाती थीं। इनमें चने व जौ का रकबा सबसे अधिक था। लेकिन, जैसे ही सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध होने लगे तो सरसों का रकबा भी लगातार बढ़ने लगा। अब रबी सीजन में जिले की प्रमुख फसल सरसों ही है। साथ ही सरसों में रोग एवं मौसम की मार की आशंका भी कम होती है। सिंचाई की जरूरत कम होने से किसान भी इसे नकदी फसल के रूप में लेते हैं।
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नहरी पानी के अभाव के बावजूद अव्वल रहा जिला
महेंद्रगढ़ में नहरी पानी का अभाव एवं जल स्तर अधिक गहराई पर होने के बावजूद जिले का प्रदेश में दूसरा स्थान रहा है। जबकि नांगल चौधरी, नारनौल, सतनाली क्षेत्र में भूमिगत जल स्तर काफी गहराई पर है और इन क्षेत्रों में अधिकांश कृषि भूमि सिंचाई के अभाव में उत्पादन भी प्रभावित करती है।
यह है जिले की सरसों की गुणवत्ता
जिले में औसत पैदावार की बात करें तो प्रतिवर्ष 7 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार होती है। अगर किसी वर्ष मौसम अच्छा रहता है तो यह उत्पादन 9 से 10 क्विंटल तक भी बढ़ सकता है। वहीं गुणवत्ता के हिसाब से महेंद्रगढ़ क्षेत्र प्रदेशभर में अव्वल स्थान पर रहा है। यहां की सरसों में तेल की मात्रा भी 36 से 40 प्रतिशत तक रहती है जो तेल उत्पादन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिला में गत वर्ष 2.70 लाख एकड़ में 8 क्विंटल प्रति एकड़ औसत पैदावार के साथ 21 लाख 60 हजार क्विंटल सरसों का उत्पादन हुआ था।
जिले में सरसों उत्पादन के लिए भौगोलिक परिस्थितियां अनुकूल हैं। पिछले चार दशक से सरसों का रकबा भी बढ़ रहा है। चार दशक पूर्व सीमित सिंचाई संसाधन होने एवं भूजल स्तर गहराई में होने के कारण अधिकांश क्षेत्र बारानी थी, जो बारिश पर आधारित था। लेकिन, जैसे-जैसे तकनीक बढ़ी, जिले में सरसों का रकबा भी बढ़ता गया।
-डॉ. अजय यादव, उपमंडल अधिकारी कृषि एवं किसान कल्याण विभाग