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जन परिवेदना में जनता की कम नेताओं की ज्यादा छलकी वेदना

Tue, 29 Nov 2016 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 29 Nov 2016 12:00 AM IST
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जन परिवेदना की बैठक जनता के लिए होती है। इसमें जनता अपना परिवाद रखती है तथा अधिकारी उसका समाधान करते हैं। जिला स्तर पर होने वाली यह बैठक अपने आप में मायने रखती है। मगर नारनौल में होने वाली जन परिवेदना समिति की बैठक  में जनता की नहीं, बल्कि नेताओं की वेदना उभर कर ज्यादा आ रही है। गत दो-तीन बैठकों में नेता अधिकारियों के कामों से खुश दिखाई नहीं दे रहे तथा अपनी नहीं चलने का उलहाना मंत्री को दे रहे हैं। सोमवार को भी हुई जन परिवेदना एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिसके कारण बैठक में जमकर हंगामा हुआ।
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सोमवार को स्थानीय पंचायत भवन में जन  परिवेदना एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता उद्योगमंत्री विपुल गोयल ने की। वैसे तो यह बैठक माह में एक बार होनी चाहिए। मगर एक साल से यह दो माह में एक बार हो रही है। बैठक में जनता  की शिकायतें मंत्री सुनते हैं तथा अधिकारियों को उन पर कार्रवाई करने को कहते हैं। यह बैठक कांग्रेस राज के समय से चली आ रही है। जिसमें अधिकारियों  के अलावा समिति के मेंबर भी होते हैं। कांग्रेस के राज में कांग्रेस के मेंबर थे। वहीं भाजपा का राज आने के बाद इसमें भाजपा के मेंबर बनाए गए। ये  मेंबर भी समिति में अपनी बात रखते हैं तथा लोगों की शिकायत को कमेटी तक  पहुंचाने का काम करते हैं।
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-जनता ने नहीं नेताओं ने बताया दर्द
सोमवार को हुई समिति की बैठक में जनता का दर्द कम सुना गया, बल्कि नेताओं ने अपना दर्द ज्यादा बताया। कोई भी शिकायत आती, भाजपा नेता अपना काम न होने का दर्द पहले बयां करने लगते। नेताओं के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों ने भी अपना दर्द रखा।
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-विधायक ने कहा, सीएमओ चलाते अपनी, नहीं मानते मेरी
सबसे पहले नांगल चौधरी के विधायक अभय सिंह ने बैठक में अपने तीन-चार मुद्दे रखे। विधायक जी के सभी मुद्दे वे थे जो उनके काम नहीं हो रहे थे। काम न होने से परेशान विधायक जी ने मंत्री को कहा कि सीएमओ मानते ही नहीं हैं तथा अपनी  चलाते हैं। उन्होंने कहा कि सीएमओ नांगल चौधरी के पीएचसी में चिकित्सकों को रखने की बजाए, उन्हें नारनौल नागरिक अस्पताल में बैठा रहे हैं। कई बार  कहने के बाद भी वे गांवों की सीएचसी व पीएचसी पर डाक्टर नहीं बैठाते। इस पर सीएमओ डीएन बागड़ी भी अपना स्पष्टीकरण देने के लिए उठ खड़े हुए। उन्होंने डटकर विधायक की बातों का जवाब दिया। जिससे कई देर तक विधायक व सीएमओ की नोकझोंक भी हुई।
-चेयरमैन भी खुश नजर नहीं आए अधिकारियों से
बैठक में केवल अपनी बात रखने के लिए हरियाणा एग्रो के चेयरमैन गोविंद भारद्वाज पहुंचे। वे काफी देरी से आए थे। ऐसा लगा कि वे केवल अपनी पीड़ा ही व्यक्त करने आए हों। उन्होंने आते ही कहा अध्यक्ष महोदय पता नहीं यहां के अधिकारी हमें नहीं समझ पाए कि हम अधिकारियों को नहीं समझ पाए। यहां पर बैठे अधिकारी पार्टी नेताओं की नहीं मान रहे। उन्होंने कई अधिकारियों पर रिश्वत लेकर  काम करने तक का आरोप लगा दिया। उन्होंने नप के सचिव पर भी सीधा-सीधा काम न करने का आरोप लगाया। जिस पर नप सचिव केके यादव ने उठकर बेबाक रूप से जवाब  दिया।
-डीईओ पर लगाये रिश्वत लेकर काम करने का आरोप
बैठक में पुराने भाजपा नेता महेंद्र गौड़ ने डीईओ पर सीधे-सीधे रिश्वत लेने का आरोप लगा दिया। जिसका समर्थन भाजपा के जिला प्रधान शिव कुमार महता व अन्य दो-तीन भाजपा नेताओं ने किया। उनका आरोप था कि डीईओ बिना रिश्वत लिए कोई काम नहीं करते तथा एक डेपूटेशन भी नहीं कर रहे। इस पर डीईओ मुकेश लावणियां ने भी खुलकर जवाब दिया तथा नेताओं की बोलती बंद कर दी।

पृथ्वी सिंह ने केवल उठाए जनता के मुद्दे
भाजपा नेता व पूर्व में भाजपा से विधानसभा का चुनाव लड़े पृथ्वी सिंह एडवोकेट ही एकमात्र ऐसे नेता थे, जिन्होंने अपनी नहीं बल्कि लोगों की आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि वे चार बैठकों से लुहारों व झुग्गी झोपड़ी के लोगों के लिए शौचालय बनवाने का मुद्दा उठा रहे हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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