नारनौल। साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं होना चाहिए। साहित्य समाज के लिए प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद होने के साथ-साथ समाज और देश के लिए पथ प्रदर्शक होना चाहिए। यह बात भिवानी से पहुंचे अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. मनोज भारत ने स्थानीय सरस्वती बाल मंदिर विद्यालय में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित युवा स्वर काव्योत्सव अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहे। कार्यक्रम संयोजक परिषद के संगठन मंत्री डॉ. संजय शर्मा रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजकुमार यादव एडवोकेट ने कहा कि किसी देश और समाज को जानने के लिए उसके साहित्य का महत्व होता है। इस अवसर पर विपिन शर्मा, प्रो. दलजीत शास्त्री, परमानंद दीवान, रामसिंह मधुर, केसरी नंदन, टिंकू प्रधान, श्रीकांत भारद्वाज, सरोज कश्यप, अजय शर्मा, पवन गुप्ता, नरोत्तम सोनी, भीमसेन शर्मा सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। संवाद