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हाथ से मैला ढोने का काम लिया तो दो साल तक हो सकती है सजा
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किसी नागरिक से हाथ से मैला ढोने का काम करवाना गैर जमानती अपराध है। ऐसा करने पर 2 साल जेल की सजा हो सकती है। सभी संबंधित विभागों के अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी इस एक्ट का उल्लंघन न हो। यह निर्देश उपायुक्त अजय कुमार ने बुधवार को इस एक्ट के संबंध में लघु सचिवालय में बुलाई अधिकारियों की बैठक में दिए।
उन्होंने बताया कि यह अधिनियम स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सीवर व शैक्षिक टैंक की सफाई को हाथ से करवाने पर निषेध करता है। जो संस्थाएं व कंपनियां ऐसा कार्य करती हैं तो वह इस अधिनियम की धारा 23 (1) के तहत दोषी होती हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार यदि ऐसे हालात में सफाई कर्मचारी की मौत होती है तो उनके आश्रितों को वित्तीय सहायता दी जानी जरूरी है। अगर इस संबंध में किसी सत्य को छिपाया जाता है तो यह भी कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होगी।
उपायुक्त ने नगर परिषद व पालिकाओं के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी कर्मचारियों को सभी प्रकार के सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाए जाएं। इसके अलावा सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच के लिए समय-समय पर शिविर भी लगवाने की व्यवस्था करें। उन्होंने निर्देश दिए कि सफाई कर्मचारियों को अपना व्यवसाय चलाने के लिए अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम से आसान शर्तों पर कर्ज दिलाने के लिए अधिकारी उनकी सहायता करें। हरियाणा सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र, व्यापारिक क्षेत्र व व्यवसायिक क्षेत्र में आसान किस्तों में हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम द्वारा बेरोजगार प्रार्थी को ऋण दिया जाता है। इसमें उन्हें सब्सिडी भी दी जाती है।
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इसी प्रकार नेशनल शेड्यूल कास्ट फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की ओर से महिला समृद्धि योजना, सूक्ष्म ऋण योजना, लघु व्यवसाय योजना व शिक्षा ऋण स्कीम चलाई जा रही है। इनमें भी पात्र नागरिकों को विभिन्न स्तर पर अनुदान दिया जाता है। बैठक में जिला कल्याण अधिकारी जगदेव सिंह, उप अधीक्षक धर्मेंद्र कुमार, निरीक्षक जयप्रकाश, कुलदीप यादव, चेयरमैन हजारीलाल, भागीरथ खनगवाल मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि यह अधिनियम स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सीवर व शैक्षिक टैंक की सफाई को हाथ से करवाने पर निषेध करता है। जो संस्थाएं व कंपनियां ऐसा कार्य करती हैं तो वह इस अधिनियम की धारा 23 (1) के तहत दोषी होती हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार यदि ऐसे हालात में सफाई कर्मचारी की मौत होती है तो उनके आश्रितों को वित्तीय सहायता दी जानी जरूरी है। अगर इस संबंध में किसी सत्य को छिपाया जाता है तो यह भी कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होगी।
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उपायुक्त ने नगर परिषद व पालिकाओं के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी कर्मचारियों को सभी प्रकार के सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाए जाएं। इसके अलावा सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच के लिए समय-समय पर शिविर भी लगवाने की व्यवस्था करें। उन्होंने निर्देश दिए कि सफाई कर्मचारियों को अपना व्यवसाय चलाने के लिए अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम से आसान शर्तों पर कर्ज दिलाने के लिए अधिकारी उनकी सहायता करें। हरियाणा सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र, व्यापारिक क्षेत्र व व्यवसायिक क्षेत्र में आसान किस्तों में हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम द्वारा बेरोजगार प्रार्थी को ऋण दिया जाता है। इसमें उन्हें सब्सिडी भी दी जाती है।
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इसी प्रकार नेशनल शेड्यूल कास्ट फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की ओर से महिला समृद्धि योजना, सूक्ष्म ऋण योजना, लघु व्यवसाय योजना व शिक्षा ऋण स्कीम चलाई जा रही है। इनमें भी पात्र नागरिकों को विभिन्न स्तर पर अनुदान दिया जाता है। बैठक में जिला कल्याण अधिकारी जगदेव सिंह, उप अधीक्षक धर्मेंद्र कुमार, निरीक्षक जयप्रकाश, कुलदीप यादव, चेयरमैन हजारीलाल, भागीरथ खनगवाल मौजूद रहे।