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अगर देश पुकारे तो मैं फिर से मोर्चे पर जाने के लिए तैयार : जसवंत सोनी

Sun, 26 Apr 2026 11:20 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 26 Apr 2026 11:20 PM IST
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If the country calls, I am ready to head to the front lines once again: Jaswant Soni
फोटो 18जसवंत सिंह सोनी।
मंडी अटेली। गांव सिलारपुर के निवासी 80 वर्षीय सेवानिवृत्त कमांडेंट जसवंत सिंह सोनी का जीवन देशभक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रेरणादायक उदाहरण है। करीब चार दशकों तक उन्होंने राष्ट्र सेवा में अपना अमूल्य योगदान दिया और हर चुनौती का डटकर सामना किया। उनका कहना है अगर देश पुकारे तो मैं फिर से मोर्चे पर जाने के लिए तैयार हूं।
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जसवंत सिंह ने भारत-पाक युद्ध 1965 और 1971 के दौरान सीमाओं पर बहादुरी से मोर्चा संभाला। उन्होंने न केवल दुश्मनों का मुंह तोड़ जवाब दिया, बल्कि अपने नेतृत्व और अनुशासन से साथियों में भी जोश भरा। युद्ध के बाद भी उनका सफर थमा नहीं। उन्होंने विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में भावी जवानों को प्रशिक्षित कर उन्हें देश सेवा के लिए तैयार किया।
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आंतरिक सुरक्षा में भी निभाई जिम्मेदारी
चुनाव ड्यूटी हो या भीड़ नियंत्रण जैसी कठिन परिस्थितियां हर बार वे अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। उत्तर-पूर्व भारत के नागालैंड, मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश जैसे इलाकों में तैनाती के दौरान उन्होंने कठिन हालात में शांति स्थापित की और स्थानीय लोगों का विश्वास जीता।
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पंजाब और जम्मू-कश्मीर में निर्णायक भूमिका
पंजाब में उग्रवाद के दौर में वे वरिष्ठ अधिकारी के रूप में केपीएस गिल के नेतृत्व में तैनात रहे। उन्होंने कई आतंकवाद-रोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाकर प्रदेश में शांति बहाली में योगदान दिया। जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 98 बटालियन के ऑफिसर कमांडिंग के रूप में 1991 से 1994 तक उन्होंने बारामुला और सोपोर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की।

दंगा नियंत्रण और प्रशिक्षण में योगदान
रैपिड एक्शन फोर्स में 100 बटालियन की कंपनी का नेतृत्व करते हुए उन्होंने गुजरात के सुरेंद्रनगर में 1995 से 2000 तक हुए दंगों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा, उन्होंने सीआरपीएफ की 153 बटालियन में नए जवानों को प्रशिक्षित कर उन्हें सेवा के लिए तैयार किया।
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