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जरूरतमंदों से कैसे मिले मदद, शहर में नहीं लगे हैं जानकारी देने वाले होर्डिंग, बैनर

Sun, 29 Mar 2020 09:45 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 29 Mar 2020 09:45 PM IST
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How to get help from the needy, information hoardings, banners are not installed in the city
बस स्टैंड पर खड़े प्रवासी मजदूर। - फोटो : Narnol
कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर जारी लॉकडाउन मजदूरों के लिए किसी आफत से कम नहीं है। मजदूरी का कार्य बंद होने से प्रवासी मजदूरों को अपना व अपने बच्चों का पेट भरने के लाले पड़े हैं। प्रशासन की तैयारियों के बाद भी दूसरे दिन श्रमिकों के जाने का सिलसिला जारी है। हालांकि प्रशासन की तरफ से मजदूरों को रहने व खाने पीने के लिए रैन बसेरे की भी व्यवस्था की गई है। लेकिन इन मजदूरों को अभी तक जानकारी ही नहीं है। दूसरा प्रशासन गरीबों को जानकारी देने के लिए शहर में होर्डिंग व बैनर नहीं लगवाया है। मुनादी कर खानापूर्ति की गई है।
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बता दें कि प्रशासन की तरफ से मजदूरों के ठहरने व भोजन के लिए रैन बसेरा जैसी व्यवस्था के लिए बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व अन्य सार्वजनिक जगहों पर की गई है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें एक समय का भोजन मिल रहा है। ऐसे में वे अपने बच्चों का पेट भरें या अपना पेट भरें। जो भोजन मिलता है बच्चों के लिए रखना पड़ता है। बस स्टैंड पर राम स्वरुप ने बताया कि हुडा में परिवार के साथ रह रहता हूं। लेकिन, मकान मालिक 1500 रुपये किराया मांग रहा है। दूसरी ओर दुकानदार ने भी उधार में सामान देने से मना कर दिया। ऐसे में उन्हें यूपी के सहारनपुर जाना है। इसके लिए बस की जानकारी लेने आया हूं। नहीं तो पैदल चलना पड़ेगा। वहीं भवन निर्माण में लगे राहुल ने बताया कि काम बंद होने और आगे भी लॉकडाउन हो सकता है, ऐसे में वह लोग मध्य प्रदेश जाना चाहते हैं। अभी उनका प्रयास है कि आनंद विहार किसी प्रकार से पहुंचा जाए। अभी लॉकडाउन में 17 दिन शेष बचे हुए। दूसरा मजदूरों को भय बना है कि अगर कोरोना संक्रमण का प्रभाव कम नहीं हुआ तो लॉकडाउन की अवधि बढ़ा सकती है।
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काम धंधा बंद है, खाने के पैसे नहीं
मजदूरों का कहना है 22 मार्च से उन्हें कोई काम धंधा नहीं मिला रहा है। मजदूरी करके जो रुपये बचे थे वे अब खत्म हो गये हैं अभी 17 दिन शेष बचे। अगर कोरोना का संक्रमण कम नहीं हुआ तो सरकार इसकी अवधि बढ़ा सकती है। ऐसे में समाज सेवी कब तक उन्हें भोजन खिलाते रहेंगे। काम धंधा नहीं मिलने से उन्हें मजबूरी में अपने घरों को ओर लौटना पड़ रहा है। वाहन न चलने से अब वे पैदल ही कच्चे रास्तों से अपने घर पर जायेंगे।
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प्रशासन की तरफ से की गई व्यवस्था की नहीं जानकारी
सुबह जब अमर उजाला की टीम नारनौल बस स्टैंड पहुंची तो बस स्टैंड पर 10-15 मजदूर बस चलने के इंतजार में खड़े थे। जब टीम ने उनसे जाने का कारण पूछा तो उनका एक ही जवाब था कि कब तक भूखे प्यासे रहेंगे। टीम ने जब प्रशासन की तरफ से रैन बसेरा में ठहरने व खाने के बारे में कहा तो उन्होंने कहा कि हमें अभी तक इसकी कोई जानकारी नहीं है। प्रशासन ने इसकी बारे में कहीं पर भी अलाउंसमेंट नहीं की है। मजदूरों ने कहा कि वे किसी भी तरह से दिल्ली पहुंचना चाहते हैं। दिल्ली पहुंचने के बाद वे अपने घरों पर पहुंच जाएंगे। दूसरी और बस स्टैंड के रैन बसेरे का भी इंतजाम सही नहीं मिला। दूसरी ओर शहर में कोई भी सरकारी सेवाओं की जानकारी देने वाले बैनर व पोस्टर नहीं लगे हैं। हालांकि पुलिस विभाग ने महावीर व होंडा चौक पर लॉकडाउन के दौरान नियम तोड़ने पर जुर्माने संबंधी बैनर जरूर लगवाया है।
- मुनादी कराई जा रही है। प्रशासन की ओर से सभी इंतजाम किए गए हैं। जल्द ही मुख्य जगहों पर होर्डिंग व बैनर लगाए जाएंगे।
मनीष फौगाट, एसडीएम नारनौल
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